कजाकिस्तान को भारत के साथ मजबूत संबंधों की उम्मीद, राजदूत नुरलान बोले- SCO- 2024 मीट में PM मोदी का स्वागत
कजाकिस्तान के राजदूत नुरलान झालगासबायेव ने भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा है कि कजाकिस्तान इस दिशा में अपना प्रयास जारी रखेगा। नई दिल्ली स्थिति कजाकिस्तान गणराज्य के दूतावास में कजाकिस्तान गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर कजाकिस्तान के राजदूत नुरलान झालगासबायेव ने कहा कि कजाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी को ऊंचे स्तर तक ले जाने का हर संभव प्रयास कर रहा है।
भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए कजाकिस्तान के राजदूत नुरलान झालगासबायेव ने कहा कि दोनों देशों के लोगों की दोस्ती और समृद्धि के निरंतर प्रयास जारी हैं। राजदूत नुरलान झालगासबायेव ने कहा, "इस वर्ष कजाकिस्तान भारत में दो बड़े कार्यक्रम में शामिल हुआ। जुलाई में एससीओ शिखर सम्मेलन और जनवरी में वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ। बेशक हम उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव भारत आएंगे। उन्होंने कहा कि अंतिम बार कजाकिस्तान के राष्ट्रपति 2009 में आए थे।

कजाकिस्तान की अध्यक्षता जुलाई 2024 तक चलेगी और अस्ताना में एक शिखर सम्मेलन के साथ समाप्त होगी। कजाकिस्तान की अध्यक्षता में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा, पारिस्थितिकी और शिक्षा के मुद्दे शामिल होंगे। भारत की तरह कजाकिस्तान भी आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने का मजबूत इरादा रखता है।
बता दें भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूती देने के कजाकिस्तान ने पिछले साल एक बड़ा कदम उठाया था। जिसके तहत 180 दिनों में 42 दिन के भारतीयों के लिए कजाकिस्तान ने वीजा फ्री कर दिया। भारतीय टूरिस्ट कजाकिस्तान में 14 दिनों तक वीजा फ्री रह सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारतीय टूरिस्ट प्रत्येक 180 दिन में यहां 42 दिनबिना वीजा के रह सकते हैं।
पर्यटन के दृष्टि से कजाकिस्तान बेहद अहम
कजाकिस्ता में टीएन शान पर्वत और अल्ताई पर्वत की लंबी पैदल यात्रा कर सकते हैं। साथ ही कई एडवेंचर्स एक्टिविटी में भी हिस्सा ले सकते हैं। इसके अलावा अल्माटी सिटी में पानफिलोव पार्क, दुनिया की सबसे बड़ी लकड़ी की इमारत है जिसका नाम कैथेड्रल है। कजाकिस्तान में एक प्रसिद्ध झील लेक कैंडी किसी अजूबे से कम नहीं है। इस झील में सतह के बाहर आपको लकड़ी के खंबे निकलते हुए दिखाई देंगे। यहां पानी में एक दो पेड़ नहीं पूरा जंगल ही बसा हुआ दिखता है। यह झील कजाकिस्तान के सबसे बड़े शहर अल्माटी से महज 80 मील की दूरी पर है।












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