काबुल एयरपोर्ट पर 7500 रुपये प्लेट चावल, 3 हजार में पानी बोतल...भूख प्यास से मरने के करीब पहुंचे लोग
बताया जा रहा है कि कुछ अमेरिकी सैनिकों ने बेबस अफगानों को देख एयरपोर्ट के बाहद अस्थाई घर बना लिया है और वहां से कुछ अफगानों को खाना और पानी दिया जा रहा है।
काबुल, अगस्त 26: अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा है और काबुल एयरपोर्ट अभी भी अमेरिकी सैनिकों के संरक्षण में है, लेकिन काबुल एयरपोर्ट पर देश से बाहर निकलने के इंतजार में मौजूद लोगों की नौबत अब मरने वाली हो गई। काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद कई हजार लोगों को डर है कि अगर वो एयरपोर्ट छोड़कर अपने घर लौटेंगे तो तालिबान उन्हें मार देगा और अगर वो एयरपोर्ट पर रूके तो वो भूख-प्यास से मर जाएंगे। काबुल एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीजें इतनी ज्यादा महंगी हो चुकी हैं कि लोग उसे खरीद नहीं सकते हैं।
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काबुल एयरपोर्ट के बुरे हालात
काबुल में हामिद करजई एयरपोर्ट पर अब लोगों के लिए रहना मतलब मरने के समान हो चुका है। अफगानिस्तान की भीषण गर्मी में एक ग्लास पानी पीने का मतलब है हजारों रुपये खर्च करना। खाने का एक निवाला हलक से नीचे तभी पहुंचेगा, जब आप हजारों रुपये खर्च करेंगे। एयरपोर्ट पर मौजूद भीड़ अब मरने के कगार पर पहुंच रही है। खाने-पीने की चीज के बारे में सोच कर डर लगता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक काबुल हवाई अड्डे पर पानी की एक बोतल 40 डॉलर की मिल रही है, यानि भारतीय करेंसी के हिसाब से देखें तो 3 हजार रुपये से कुछ ज्यादा। वो भी आपको अगर एक बोतल पानी खरीदना है तो आपको अमेरिकन डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, अफगानी करेंसी अब दुकानदारों ने लेना मना क दिया है। और एयरपोर्ट पर डॉलर मिलना अब नामुमकिन सरीखा हो गया है।

एयरपोर्ट पर रहना हुआ मुश्किल
रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट पर एक प्लेट चावल के लिए आपको 100 डॉलर खर्च करने होंगे और उसमें भी आपको इतना चावल मिलेगा कि एक इंसान अपना पेट नहीं भर सकता है। 100 डॉलर मतलब करीब 7500 भारतीय रुपये। ऐसे में फर्ज कीजिए अगर किसी परिवार में चार लोग अभी काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद होंगे तो भला एक वक्त के खाने में उन्हें 15 हजार रुपये से ज्यादा खर्च करने होंगे। और इतना पैसा खर्च करना मुमकिन नहीं है। लिहाजा रिपोर्ट है कि काबुल एयरपोर्ट पर अब लोगों ने भूखा प्यासा रहना शुरू कर दिया है। जिसकी वजह से अब उनकी स्थिति बिगड़ने लगी है। काबुल एयरपोर्ट पर चारों तरफ हताशा है और हर तरफ मायूसी फैली है। हर शख्स बदहवाश है तो हर शख्स नाउम्मीद है।

भूख-प्यास और लंबा इंतजार
काबुल एयरपोर्ट की स्थिति ऐसी है कि लोग भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और अब लोगों का शरीर टूटने लगा है। स्थिति ये है कि कब कौन कहां गिरेगा, कौन बचेगा और कौन मरेगा, कोई कुछ नहीं कह सकता है। भला पानी के बगैर कौन जिंदा रह सकता है। अभी तक काबुल एयरपोर्ट पर मची अफरातफरी और भगदड़ में 20 लोगों की मौत हो चुकी है और अब नौबत भूखे मरने की आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर जगह जगह लोग बेहोश होकर नीचे गिर रहे हैं और उन्हें एक ग्लास पानी पिलाने के लिए भी कोई नहीं है।

पानी खरीदने की स्थिति नहीं
अगर आप कोई पोटो देख रहे हैं, जिसमें आप किसी विदेशी सैनिक को किसी अफगान को पानी पिलाते देख रहे हैं, तो समझ सकते हैं कि आखिर एक विदेशी सैनिक ही किसी अफगान को पानी क्यों पिला रहा है? कोई अफगान पानी क्यों नहीं पिला रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि एयरपोर्ट पर मौजूद कोई अफगान पानी खरीदने की स्थिति में है ही नहीं?

अमेरिका की मदद करने का फल
एयरपोर्ट पर मौजूद किसी भी तरह से देश छोड़ने की कोशिश में लगे ये अफगान वो हैं, जिन्होंने पिछले 20 सालों में अमेरिकन फौज की मदद की है। इन्होंने अमेरिकी सेना की मदद इसलिए की थी, ताकि उनका पीछा तालिबान से छूट सके, लेकिन खुद अमेरिका ने ही उन्हें बेबसी में छोड़ दिया है। फ्रांस ने साफ कह दिया है कि वो आज के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाएगा। वो और ज्यादा अफगानों को अपने देश में नहीं रख सकता है। वहीं, तुर्की भी हाथ पीछे खींच चुका है। कुछ ही देश अब काबुल एयरपोर्ट पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं और वो कब तक अफगानों को वहां से निकालेंगे, कोई नहीं कह सकता है।

सैनिकों ने बनाया अस्थाई घर
बताया जा रहा है कि कुछ अमेरिकी सैनिकों ने बेबस अफगानों को देख एयरपोर्ट के बाहद अस्थाई घर बना लिया है और वहां से कुछ अफगानों को खाना और पानी दिया जा रहा है। वहीं, कुछ अमेरिकी सेना के जवान बच्चों को फल या चिप्स के पैकेट बांटते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, सवाल अमेरिका की उस लीडरशिप पर है, जिनकी वजह से अफगानों की ये दुर्दशा हुई है। सवाल ये है कि आखिर जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया, उसके बाद ही अमेरिका ने लोगों को बाहर निकालना क्यों शुरू किया? ये रेस्क्यू ऑपरेशन एक महीने या दो महीने पहले क्यों नहीं चलाया गया। आखिर जो बाइडेन की सरकार ने आम अफगानों को तालिबान के हाथों या फिर भूख और प्यास से मरने के लिए क्यों छोड़ दिया। इसकी जिम्मेदारी जो बाइडेन कब लेंगे?

एयरपोर्ट पर भयानक स्थिति
हवाई अड्डे के द्वार पर इंतजार कर रहे एक अफगान व्यक्ति ने रॉयटर्स को बताया कि, "हवाई अड्डे पर स्थिति भयानक हो चुकी है। लोगों की भारी भीड़ है और इस भीड़ में महिलाओं और बच्चों की स्थिति काफी ज्यादा खराब हो चुकी है''। दूसरी तरफ अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि 'अमेरिका पहले काबुल से अमेरिकियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और 31 अगस्त से पहले जितने भी जोखिम वाले अफगान हैं, उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की जाएगी'। यानि, अमेरिका पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता है कि वो कितने लोगों को बाहर निकालेगा और कितने लोगों को वहीं पर मरने के लिए छोड़ देगा।

79 हजार लोग निकाले गये बाहर
अमेरिका के राष्ट्रपति के मुताबिक जुलाई से अब तक 79 हजार 900 लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकाला गया है, जिनमें पिछले 10 दिनों में 70 हजार 700 लोग बाहर निकाले गये हैं और कई हजार लोग अभी भी एयरपोर्ट पर मौजूद हैं। माना जाता है कि अफगानिस्तान में रहने वाले करीब ढाई लाख लोगों को तालिबान से काफी ज्यादा खतरा है, जिनमें से करीब 60 हजार लोग ही अपनी जान बचा पाएं हैं और बाकी बचे करीब 2 लाख अफगानों के पास अपनी जान बचाने का मौका महज एक हफ्ते का है, वो भी तब अगर वो सही सलामत काबुल एयरपोर्ट तक पहुंच पाते हैं। क्योंकि देश से बाहर निकलने का कोई और रास्ता मौजूद नहीं है। काबुल एयरपोर्ट जाने वाले हर रास्ते में तालिबानी आतंकियों का कब्जा है, ऐसे में 2 लाख अफगानों का क्या होगा, खुदा ही जानता है।












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