जानिए, पीएम मोदी से क्यों 'घबराए' हुए हैं चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग?
वाशिंगटन। 2 महीने से भी ज्यादा का वक्त गुजरने को है लेकिन डोकलाम पर चीन और भारत के बीच पनपे गतिरोध पर अभी तक कोई सुलह नहीं हो सकी है। इसी बीच एक अमेरिकी चीनी एक्सपर्ट ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐसे नेता के तौर पर देखते हैं जो भारतीय हितों के लिए खड़े होने की क्षमता रखते हैं और क्षेत्र में दूसरे अन्य देशों के साथ काम कर चीन पर प्रतिबंध थोप सकें।
सामरिक और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (सीएसआईएस) के बोनी एस ग्लेसर ने कहा कि 'मेरा मानना है कि शी जिनपिंग, पीएम मोदी को एक ऐसे नेता के तौर पर देखते हैं जो भारतीय हितों के लिए खड़े हो सकते हैं और क्षेत्र में अन्य देशों के साथ मिल कर चीन पर प्रतिबंध थोप सकते हैं और इसमें भी अमेरिका और जापान का साथ मिल सकता है। मेरा मानना है कि बीजिंग इस पर चिंतित है।'

भारत से खराब रिश्ते लाभकारी नहीं
ग्लेसर का मानना है कि चीन खुद को भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्ते को लाभ के रूप में नहीं देखता। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के अनुसार एक साक्षात्कार में ग्लेसर ने कहा कि शी जिनपिंग पर बहुत जल्दी दिल्ली गए और पीएम मोदी के साथ जुड़ने की कोशिश की। मुझे लगता है कि उन्होंने आशा व्यक्त की थी कि भारत में एक नीति होगी जो चीनी हित को चुनौती नहीं देगी। लेकिन मुझे लगता है कि वास्तव में ऐसा नहीं किया गया क्योंकि वो दक्षिण चीन सागर में अभी भी शामिल है।
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दोनों साझा करत हैं लंबी सीमा
ग्लेसर ने कहा कि हिंद महासागर और अन्य समुद्री क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। चीन खुद को भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्ते को लाभ के रूप में नहीं देखता है। आखिरकार, दोनों देश लंबी सीमा साझा करते हैं।

सबसे बड़ी विकासशील शक्ति!
डोकलाम मामले पर करीब से नजर रख रहीं ग्लेसर ने कहा कि चीन भारत को सबसे बड़ी विकासशील शक्ति के रूप में देखता है जो लंबे समय तक चुनौतियों का सामना कर सकता है। निकट भविष्य में चीन अन्य देशों के साथ भारत के सहयोग के बारे में अधिक परेशान है, जिसमें भारत जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे अन्य देशों के साथ गठबंधन बना रहा है।

तो और विस्तारवादी हो जाएगा चीन!
डोकलाम पर ग्लेसर ने कहा कि अगर चीन इस मसले पर अपने रास्ते से सफल हो गया तो वो बाकी देशों से भी इसी तरह से निपटेगा जिसके चलते वो और अधिक विस्तारवादी हो जाएगा। गौरतलब है कि 16 जून से ही डोकलाम का गतिरोध बना हुआ और सीमा पर दोनों देशों के सैनिक मौजूद हैं।












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