कश्मीर में सक्रिय जैश और लश्कर के आतंकी भी काबुल में घुसे, सच न हो जाए भारत की आशंका ?
काबुल, 17 अगस्त: अफगानिस्तान की मौजूदा हालात का फायदा इस्लामिक स्टेट, लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठन भी उठाना चाहते हैं। खबरों के मुताबिक ये संगठन अपने दहशतगर्दों को अफगानिस्तान में अस्थिरता का फायदा उठाते हुए उसकी सीमा में दाखिल करा चुके हैं। वैसे जानकारी ये भी सामने आ रही है कि उनके इस तरह से काबुल में घुस आने को लेकर तालिबान लीडरशिप पूरी तरह से वाकिफ नहीं थी। लेकिन,अगर इन संगठनों के मंसूबे आने वाले समय में अफगानिस्तान की धरती पर कामयाब हुए तो यह भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

काबुल में घुसे जैश-लश्कर और आईएस के आतंकी
कुछ दिन पहले ही बड़ी तादाद में इस्लामिक स्टेट (आईएस), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्किर-ए-तैयबा के आतंकवादी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में दाखिल हो चुके हैं, इस बात की जानकारी सूत्रों के हवाले से आई है। इसमें लश्कर और जैश जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठन कश्मीर में सक्रिय हैं और आईएस से सहानुभूति रखने वाले लोग भी कश्मीर से लेकर केरल तक में सामने आ चुके हैं। माना जा रहा है कि ताबिलान सरगनाओं को अब काबुल में इन विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना है, जो कि तालिबान का झंडा लेकर संभवत: पाकिस्तान की सीमा पार कर अफगानिस्तान में घुसे हैं। जानकारी के मुताबिक इन आतंकी संगठनों के लोग काबुल के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं और फिलहाल तालिबान के नियंत्रण से बाहर हैं।
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क्या इन विदेशी आतंकियों को बाहर निकालेगा तालिबान ?
गौरतलब है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान किसी भी विदेश आतंकी संगठन को अफगानिस्तान से काम करने नहीं देगा। अब देखने वाली बात है कि तालिबान भारत विरोधी इन आतंकी संगठनों को निकाल-बाहर करने के लिए क्या करता है ? अफगानिस्तान के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के मुताबिक अगले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण होंगे, क्योंकि इस दौरान ये दहशतगर्द बिना तालिबानी सरगनाओं को भरोसे में लिए खुद से अपनी कारगुजारियों को अंजाम दे सकते हैं। काबुल में रह रहे इस मानवाधिकार कार्यकर्ता को दोहा स्थित तालिबान के राजनीतिक नेतृत्व की गतिविधियों की काफी जानकारी रहती है।

क्या अफगानिस्तान में फिर शुरू होगी जंग ?
जानकारी ये भी आ रही है कि मौजूदा वक्त में जब पूरी दुनिया की नजरें तालिबान पर टिकी हैं, वह फिलहाल किसी भी तरह से इन विदेशी आतंकियों को अफगानिस्तान में जगह बनाने देने से रोकना चाहता है। तालिबान के फाउंडर मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब के सोमवार को काबुल पहुंचने के साथ ही इसके रास्ते तलाशे जा रहे हैं। याकूब क्वेटा से आया है, जो दशकों से तालिबान सरगनाओं का गढ़ रहा है। वैसे आशंका है कि अगर विदेशी आतंकी संगठनों ने तालिबान के हुक्म को मानने से इनकार किया तो दोनों के बीच हिंसक संघर्ष भी शुरू हो सकता है। उस शख्स ने कहा है, 'खतरों के बावजूद, तालिबान ने उन्हें अफगानिस्तान छोड़ने के लिए कहा है और उन्हें फरमान की तामील करनी पड़ेगी।'

सच न हो जाए भारत की आशंका ?
इस वक्त अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान को आतंकवाद से मुक्त रखने के उसके वादों की गौर से निगरानी कर रहा है। चाहे इस्लामिक स्टेट हो या फिर जैश और लश्कर, अफगानिस्तान में इनकी मौजूदगी विश्व के लिए टेंशन की वजह है। सूत्रों के मुताबिक काबुल में अभी सुरक्षा की स्थिति अनियंत्रित है, पुलिस जैसी फोर्स नदारद है। ऐसे में ये आतंकी संगठन काबुल और अफगानिस्तान के दूसरे शहरों में अपना सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ सकते हैं। तालिबान अपने वादे पर कितना अमल करता है, यह इस समय पूरे विश्व के सामने सबसे बड़ा सवाल है।(अंतिम तस्वीर-फाइल)












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