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Explained: JD Vance की अग्नि परीक्षा क्यों है इस्लामाबाद पीस टॉक? अमेरिका का क्या-क्या लगा दांव पर?

Explained: अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस समय ईरान के साथ होने वाली शांति वार्ता में एक बड़े और अहम खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने उन्हें अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग और उसके बाद हुए सीजफायर को एक परमानेंट समाधान में बदलने की जिम्मेदारी दी है। ट्रंप ने वेंस को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस बातचीत के लिए किसी बैकअप प्लान की जरूरत नहीं है। आइए समझते हैं कि ये वेंस के अग्नि परीक्षा क्यों है, अमेरिका का क्या-क्या इस पीस टॉक में दांव पर लगा है और सबसे जरूरी क्या इस पीस टॉक के नतीजे से वेंस के अमेरिका के राष्ट्रपति की उम्मीदवारी पर असर पड़ेगा?

JD वेंस ही क्यों?

पिछले दिनों रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के नेताओं ने खुद इच्छा जताई थी कि जेडी वेंस इस बातचीत को अमेरिका की तरफ से लीड करें। जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे करीब माने जाने वाले उन नेताओं में से आते हैं जो युद्ध के धुर विरोधी रहे। उन्होंने कभी ईरान के खिलाफ स्ट्राइक को अपनी पूरी सहमति नहीं दी। ऐसे में वेंस के रहने से बातचीत आसान हो सकती है।

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पहले लो-प्रोफाइल, अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी कैसे

41 साल के वेंस ने अब तक ईरान के खिलाफ शुरू हुई जंग के दौरान खुद को ज्यादा सुर्खियों से दूर रखा था। लेकिन अब उन्हें इस युद्ध को खत्म करने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के संभावित दावेदार वेंस के लिए यह मौका भी है और चुनौती भी।

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हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड मिशन

जेडी वेंस के इस्लामाबाद शांति वार्ता में जाने के आसानी से समझें तो ऐसा बहुत कम होता है जब कोई उपराष्ट्रपति इस स्तर की बातचीत को लीड करे। आमतौर पर इस तरह की परिस्थितियों को हाई रिस्क- हाई रिवॉर्ड मिशन बताया, यानी इसमें फायदा भी बड़ा है और खतरा भी। अगर वेंस सफल रहते हैं तो शायद इनाम में राष्ट्रपति की उम्मीदवारी भी मिल सकती है और असफल रहे तो पूरा ठीकरा भी उन्हीं पर फूटेगा। वहीं ट्रंप इस गर्माहट से दूर रहेंगे।

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ज्यादा दखल न देने से बनी बात

वेंस की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है जो अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखना चाहते हैं। उन्होंने 2003 के इराक युद्ध में मरीन के तौर पर सेवा भी दी है। हालांकि, 28 फरवरी को ट्रंप द्वारा ईरान युद्ध शुरू करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसका समर्थन किया, लेकिन खुद लो-प्रोफाइल में रहे, जो बताता है समर्थन था सहमति नहीं। अमेरिकी मीडिया में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग से पहले हुई चर्चाओं में वेंस ने सैन्य कार्रवाई का विरोध किया था, हालांकि बात नहीं बनी थी।

सामने नहीं लेकिन फोन पर सब सेट कर रहे थे वेंस

वेंस का मानना था कि सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में और अराजकता फैल सकती है और ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) गठबंधन में भी दरार आ सकती है। लेकिन अब वही वेंस ट्रंप के लिए इस डील को पूरा करने वाले मुख्य कूटनीतिक चेहरे बन गए हैं। इस हफ्ते हंगरी से निकलते समय वेंस ने कहा कि उनकी मुख्य भूमिका लगातार फोन कॉल्स करना और बातचीत बनाए रखना था। उन्होंने कई कॉल रिसीव किए और खुद भी कई कॉल किए, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।

व्हाइट हाउस ने भी सराहा योगदान

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि वेंस ने शुरुआत से ही इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई है। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर भी इस वार्ता में शामिल हैं।

2011 के बाद पहली बार पाकिस्तान दौरा

वेंस 2011 में Joe Biden के बाद पाकिस्तान जाने वाले पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति होंगे। व्हाइट हाउस ने कहा कि वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य अधिकारी लगातार मिलकर इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।

ईरान को वेंस पर ज्यादा भरोसा

व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को उम्मीद है कि यह वार्ता स्थायी शांति ला सकती है। वहीं ईरान वेंस को उनके युद्ध-विरोधी रुख के कारण ज्यादा भरोसेमंद मानता है। ईरान ने लेबनान पर इजरायल के हमलों को लेकर नाराजगी जताई है। इस पर वेंस ने कहा कि ईरान को यह एक गलतफहमी हो सकती है कि लेबनान भी इस जंग में शामिल है। यह उनका एक कूटनीतिक बयान माना जा रहा है।

क्या हमेशा से इतनी कूटनीतिक हैं वेंस? नहीं

वेंस हमेशा इतने कूटनीतिक नहीं रहे हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच ओवल ऑफिस में हुए एक बड़े विवाद में अहम भूमिका निभाई थी।

राजनीतिक भविष्य के लिए भी अहम मौका

चार बच्चों के पिता और कैथोलिक धर्म अपनाने वाले वेंस के लिए यह मौका उनके राजनीतिक करियर के लिए भी अहम है। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से वेंस एक मजबूत और प्रभावशाली उपराष्ट्रपति के रूप में उभरे हैं। जैसा कि आपको बताया, ईरान वार्ता में उनकी भूमिका 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी अहम मानी जा रही है, जहां उनका मुकाबला मार्को रुबियो जैसे नेताओं से हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वेंस इस डील को सफल बना लेते हैं तो यह उनके लिए बड़ा प्लस प्वॉइंट होगा। वेंस भी खुद को अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर अभी से देख रहे हैं।

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कुल मिलाकर क्या है स्थिति?

इस समय जेडी वेंस एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां उनकी कूटनीतिक सफलता या असफलता न सिर्फ अमेरिका-ईरान संबंधों को प्रभावित करेगी, बल्कि उनके अपने राजनीतिक करियर का भविष्य भी तय कर सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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