PM नेहरू ने ओपेनहाइमर को दिया भारतीय नागरिक बनने का ऑफर, वैज्ञानिक ने क्यों कर दिया इनकार?
क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'ओपेनहाइमर' दुनिया भर में चर्चा हो रही है। यह नाभिकीय बम या परमाणु बम के बनने की कहानी है। इस फिल्म की रिलीज के साथ, वैज्ञानिक ओपेनहाइमर के जीवन में दिलचस्पी फिर से बढ़ गई है।
ओपेनहाइमर फिल्म जिस किताब से प्रेरित होकर बनी है, उसके सह-लेखक ने एक खुलासा किया है। आपको बता दें कि ओपेनहाइमर फिल्म काई बर्ड और मार्टिन जे शेरविन द्वारा सह-लिखित पुस्तक पर आधारित है। इस किताब का शीर्षक 'अमेरिकन प्रोमेथियस: द ट्रायम्फ एंड ट्रेजेडी ऑफ जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर' है।

इस किताबके लेखक के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु बम के जनक जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर को 1954 में परमाणु हथियारों के खिलाफ बयानों पर अपमानित होने के बाद भारत में बस जाने के लिए आमंत्रित किया गया था।
हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में काई बर्ड ने कहा कि 1954 में नेहरू ने ओपेनहाइमर को भारत आने और यहां का नागरिक बनने की पेशकश की थी। बर्ड ने आगे कहा कि उन्हें नहीं पता कि ओपेनहाइमर ने इस प्रस्ताव पर शायद गंभीरता से विचार नहीं किया क्योंकि वह एक कट्टर देशभक्त अमेरिकी थे।
ओपेनहाइमर दुनिया का पहले परमाणु बम विकसित करने वाले "मैनहट्टन प्रोजेक्ट" में शामिल थे। इसी प्रोजेक्ट द्वारा निर्मित बम को 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया गया था। हालांकि ओपेनहाइमर ने आगे चलकर युद्ध-विरोधी नीतियों और परमाणु कटौती की मुखर वकालत की थी।
परमाणु हथियारों के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी के कारण, शीत युद्ध के दौर में उन्हें विलेन साबित करने की कोशिशें की जाने लगीं। इसके बाद 1954 में पीएम नेहरू ने ओपेनहाइमर को भारतीय नागरिकता की पेशकश की थी।
इतना ही नहीं, हाल में ही रिलीज हुई एक और किताब में कुछ ऐसा ही दावा किया गया है। जहांगीर भाभा की 723 पन्नों की जीवनी लिखने वाली एक किताब में ये दावा किया गया है कि ओपेनहाइमर को भारत में प्रवास करने और यहां बसने के लिए आमंत्रित किया गया था।
इस किताब के लेखक बख्तियार के दादाभाई हैं। उनकी किताब ओपेनहाइमर और भाभा के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के बारे में बात करती है। किताब के मुताबिक भाभा की तरह ओपेनहाइमर भी एक उच्च सुसंस्कृत व्यक्ति थे। उन्होंने संस्कृत का अध्ययन किया था और लैटिन और ग्रीक भाषा के भी जानकार थे।
पुस्तक के मुताबिक जब अमेरिकी सरकार ने ओपेनहाइमर को अपमानित करना शुरू कर दिया और उनकी सुरक्षा मंजूरी छीन ली तो भाभा के आग्रह पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा उन्हें भारतीय नागरिकता की पेशकश की गई थी।
किताब के मुताबिक नेहरू ने उन्हें एक से अधिक बार भारत में बसने का सुझाव दिया था। लेकिन ओपेनहाइमर ने मना कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि जब तक वह सभी आरोपों से मुक्त नहीं हो जाते, तब तक उनके लिए अमेरिका छोड़ना उचित नहीं होगा।












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