15 दिनों तक युवाओं को मिलेगा मुफ्त नूडल्स, जितनी मर्जी खाईये, बस करना होगा ये काम
टोक्यो, 06 जुलाईः जापान में युवाओं को वोट देने के प्रति अनिच्छा बड़ी समस्या बनती जा रही है। उनकी शिकायत है कि देश में युवाओं के मुद्दों को महत्व नहीं दिया जाता है, ऐसे में वे वोट डालने से दूर होते जा रहे हैं। जापान के युवा वोट डालने के बदले कहीं घूमने या घर पर ही आराम करने को अधिक तरजीह देते हैं। ऐसे में इन युवाओं को वोट डालने के लिए आकर्षित करने के लिए एक कंपनी ने मुफ्त नूडल्स देने का निर्णय किया है।

15 दिनों तक फ्री नूडल्स
एक प्रमुख जापानी रेमन चेन ने 10 जुलाई रविवार को उच्च सदन चुनावों से पहले युवाओं को मुफ्त नूडल्स देने की घोषणा की है। इप्पुडो, जो देश भर में 50 रेमन दुकानों का संचालन करती है, चुनाव के दिन यानी 10 जुलाई से 24 जुलाई तक अंतहीन मुफ्त नूडल खिलाने करने की पेशकश की है। बस इसके लिए युवाओं को यह सबूत दिखाना होगा कि उन्होंने मतदान किया है।

बुजुर्गों को मिलती है प्राथमिकता
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, तोहोकू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हिरोशी योशिदा ने कहा, " जापान में बुजुर्गों की संख्या अधिक है। ऐसे में राजनेता उम्रदराज लोगों की तरफ देखते हैं, क्योंकि उनका मत प्रतिशत अधिक होता है, वे महत्वपूर्ण ग्राहकों की तरह होते हैं जिनसे वे वोट जीत सकते हैं। दूसरी ओर, युवा कभी-कभार ग्राहकों की तरह होते हैं, इसलिए कम महत्वपूर्ण होते हैं...। इसलिए बुजुर्गों द्वारा पसंद की जाने वाली नीतियों को अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाती है।"

सत्तारूढ़ पार्टी जीत की ओर अग्रसर
एक जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक, जापान में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और कोमिटो का सत्तारूढ़ गठबंधन आगामी हाउस ऑफ काउंसिलर्स चुनाव में जीत जीत की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की एलडीपी की संख्या से अधिक सीटें जीतने की संभावना है। ऐसा दावा किया जा रहा है फुमियो किशिदा की सत्तारूढ़ पार्टी अपने दम पर सीटों की संख्या बढ़ा सकती है। कुल 125 सीटों पर चुनाव लड़ा जा रहा है, जिससे 63 को साधारण बहुमत मिल रहा है।

अकेले दम पर चुनाव जीत रही फुमियो किशिदा की पार्टी
समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने निक्केई बिजनेस डेली द्वारा किए गए सर्वेक्षण के हवाले से कहा कि एलडीपी के अपने दम पर लगभग 60 सीटें छीनने का अनुमान है, जो मौजूदा 55 से अधिक है। निक्केई चुनाव परिणाम हाल के जनमत सर्वेक्षणों के विपरीत हैं, जिन्होंने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के मद्देनजर बढ़ती कीमतों और उच्च ईंधन लागत के कारण उनकी सरकार के फिसलने की बात कही थी।












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