आखिर क्यों जापान के रहस्यमयी मकबरों पर रिसर्च करना है मना? उगते सूरज से जुड़ा है खास रिश्ता
इन मकबरों पर कानूनी तौर पर रिसर्च करना सख्त मना है और इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के मुताबिक, इन कब्रों पर कोई लिखित जानकारियां नहीं मिली हैं।
टोक्यो, जनवरी 22: दुनिया में सैकड़ों मकबरों और ऐतिहासिक धरोंहरों को लेकर दुर्लभ राज छिपे होते हैं और उन रहस्यमयी जानकारियों को जानने के लिए रिसर्च किए जाते हैं, लेकिन जापान में स्थिति एक रहस्यमयी मकबरों का सबसे बड़ा राज ही यही है, कि उसको लेकर रिसर्च नहीं किया जा सकता है। उस मकबरे की तस्वीर लेने से लेकर उसकी जानकारियों जुटाने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है।

रहस्यमयी जापानी मकबरा
जापान के प्राचीन मकबरे को लेकर पहली बार विश्लेषण किया गया है, जिसे कोफून के नाम से जाना जाता है। जापानी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पोलिटेक्निको डि मिलानो के रिसर्च ग्रुप ने पहली बार प्राचीन जापानी कब्र और मकबरों को लेकर रिसर्च किया है और इससे पहले इन मकबरों को लेकर कभी भी रिसर्च नहीं किया गया है। जिस इलाके में मकबरा है, उस क्षेत्र में कई और प्राचीन इमारते हैं, लेकिन इन इमारतों तक काफी मुश्किल से आम लोगों की पहुंच हो पाती है। लेकिन, पहली बार हाई रिजोल्यूशन सैटेलाइट कैमरे से इन शानदार प्राचीन मकबरों की वास्तविक तस्वीर ली गई है और इससे जुड़े कुछ रहस्यमयी खुलासे किए गये हैं।

उगते सूरज की तरफ है मुंह
जापानी रिसर्चर उस वक्त हैरान रह गये, जब सैटेलाइट तस्वीरों में उन्होंने देखा कि, कब्रगाह का मुंह उगते सूरज की तरफ है। दरअसल, जापान में ऐसा माना जाता है कि यह देवी अमेतरासु की कहानी से जुड़ा है। जापानी सम्राटों ने इसे अपने राजवंश की पौराणिक उत्पत्ति से जोड़ा है। जापानी द्वीपों में सैकड़ों प्राचीन दफन मकबरे हैं, जिनमें से सबसे बड़ा मकबरा कीहोल की तरह दिखता है, जिसे कोफुन कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मकबरे का तीसरी से सातवीं शताब्दी के बीच निर्माण करवाया गया और इसके सबसे भव्य मकबरों का संबंध जापान के शुरूआती सम्राटों से जुड़ा है।

दुनिया का सबसे विशाल मकबरा
ऐसा माना जाता है कि इन मकबरों का संबंध जापान के शाही परिवारों के अलावा शारी परिवार से जुड़े अधिकारियों और दूसरे दरबारियों से भी था। वहीं, इस शाही मकबरे को अब तक विश्व में खोजा गया सबसे बड़ा मकबरा माना गया है। इस मकबरे की लंबाई करीब 486 मीटर और चौड़ाई करीब 36 मीटर है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह मकबरा परंपरागत तौर पर जापान के 16वें सम्राट निंटोकू का है और इस विशालकाय मकबरे को यूनेस्को ने विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया हुआ है।

मकबरों पर नहीं हैं सबूत
इन मकबरों पर कानूनी तौर पर रिसर्च करना सख्त मना है और इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के मुताबिक, इन कब्रों पर कोई लिखित जानकारियां नहीं मिली हैं। चूंकि सबसे बड़े को पहले अर्ध-पौराणिक सम्राटों की कब्रें माना जाता है, इसलिए उनकी खोज करना जापानी कानून के तहत कड़ाई से संरक्षित है। लेकिन हमें अभी भी कब्रों के बारे में कुछ समझ है। रिसर्चर्स के मुताबिक, "कोफुन काल के पहले और आखिरी हिस्से में छोटी पहाड़ियों के ऊपर कीहोल कब्रों को बनाया गया है।
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