जाग गया जापान: चीन को पीटने के लिए शुरू किया नये द्वीप पर निर्माण, भारत होगा बहुत खुश!
पिछले कुछ सालों में चीन ने जापान को काफी परेशान किया है, लिहाजा पिछले साल के आखिरी महीनों में जापान ने अपने संविधान से 'शांति' शब्द को हटा दिया है और अपनी सेना निर्माण के लिए 400 अरब डॉलर से ज्यादा की घोषणा कर दी है।

Japan Building New Island: दूसरे विश्वयुद्ध में करोड़ों लोगों की मौत देखने के बाद जापान ने अपने संविधान में शांति को शामिल किया था और कहा था, कि अब वो शांति के रास्ते पर ही चलेगा। लेकिन,पिछले कुछ सालों में चीन और रूस ने मिलकर जापान को इतना उकसाया है, कि जापान ने फिर से अपने हथियार उठा लिए हैं। प्राकृतिक तौर पर ही योद्धाओं की पहचान रखने वाला जापान फिर जाग उठा है और उसने उस युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है, जिसकी वजह चीन बनने वाला है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जागा जापान
जापान के कई स्रोत बताते हैं, कि जापान ने मागेशिमा द्वीप पर एक सैन्य अड्डे का निर्माण शुरू करने का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य पास के रयूकू द्वीप समूह में जापान की सुरक्षा को मजबूत करना और दुश्मन के हमले के मामले में फौरन बैकअप एयरबेस प्रदान करना है। जापान का ये कदम रणनीतिक तौर पर काफी बड़ा है, क्योंकि ये द्वीप सीधे तौर पर चीन के शंघाई शहर के सीधे लाइन पर है और यहां से चीन को डायरेक्ट निशाना बनाया जा सकता है। मागेशिमा द्वीप, तनेगाशिमा द्वीप से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक आठ वर्ग किलोमीटर का निर्जन द्वीप है, जिसे साल 2011 में यूएस फील्ड कैरियर लैंडिंग अभ्यास को ट्रांसफर करने के लिए एक जगह के तौर पर चुना गया था। फिलहाल, यूएस फील्ड कैरियर लैंडिंग अभ्यास जापान की राजधानी टोक्यो से सिर्फ 1200 किलोमीटर दूर दक्षिण में इवोटो द्वीप पर आयोजित किया जाता है। ये वो क्षेत्र हैं, जहां से चीन पर डायरेक्ट हमला किया जा सकता है।

12 जनवरी से शुरू हुआ द्वीप पर काम
मागेशिमा द्वीप पर जापान ने 12 जनवरी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया है और एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले चार साल तक इस द्वीप पर निर्माण कार्य जारी रहने की संभावना है। जापान इस दौरान अपने इस द्वीप पर दो रनवे, एक कंट्रोल टावर और एक विस्फोटक डिपो को स्थापित करेगा। वहीं, Nippon.com की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि अमेरिका के कैरियर एक्सरसाइज लैंडिंग जेट्स भी इस रनवे पर उतर सकते हैं। यानि, मागेशिमा नानसी द्वीप समूह, जापान की रक्षा के लिए आपूर्ति और रखरखाव केंद्र के रूप में काम करेगा।

कितना होगा रणनीतिक प्रभाव?
युद्ध के दौरान छोटे-छोटे द्वीप रणनीतिक तौर पर काफी असरदार साबित होते हैं और महान शक्तियों के बीच लॉजिस्टिक सुविधा उपलब्ध करवाने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही ये द्वीप फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस और भौगोलिक मार्कर भी साबित हो सकते हैं। मागेशिमा द्वीप भी इस तरह का कोई परफेक्ट उदाहरण साबित हो सकता है। ताइवान स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च (INDSR) के मार्च 2022 के समाचार पत्र में, येन हंग-लिन द्वीप के सामरिक महत्व को रेखांकित करता है। येन ने नोट किया है, कि मागेशिमा रयुकू द्वीप समूह के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जिसे चीन के नौसैनिक जहाजों को प्रशांत महासागर तक पहुंचने के लिए पार करना होगा। उनका यह भी कहना है कि मागेशिमा एक निर्जन द्वीप है, जो विमान के शोर और सुरक्षा के बारे में चिंताओं को कम करता है।

चीन के खिलाफ सीधा वार करने में सक्षम
येन ने अपनी लेख में जिक्र करते हुए लिखा है, कि मागेशिमा में समतल भूभाग है, जो हवाई क्षेत्र के निर्माण को काफी आसान बनाता है। इसके अलावा, येन ने ये भी नोट किया है, कि जापानी सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (JSDF) के पास नानसी द्वीप समूह में सीमित संख्या में ठिकाने हैं और मागेशिमा के पूरा होने से जापान और अमेरिका, चीन गहराई से रक्षा करने में सक्षम होंगे। मागेशिमा को एक द्वीप एयरबेस के रूप में स्थापित करने की जापान की योजना, एक बड़ी सैन्य रणनीति का हिस्सा हो सकती है। विदेश नीति अनुसंधान संस्थान (FPRI) के अप्रैल 2022 के लेख में, फ़ेलिक्स चांग ने इस बात पर प्रकाश डाला है, कि जापान के द्वीप बेस, एक बड़ी रणनीति की ओर इशारा करते हैं, जिसका उद्देश्य न केवल चीन को सेनकाकू द्वीपों पर कब्जा करने से रोकना है, बल्कि उसकी बड़ी नौसैनिक महत्वाकांक्षाओं को भी नाकामयाब करना है।

चीन ने कैसे जापान को उकसाया?
चीन ने पिछले कुछ सालों में जबरदस्त तरीके से जापान की घेराबंद शुरू कर दी है और रूस के साथ जापान के नजदीक सैन्य अभ्यास करने लगा है। लिहाजा, जापान ने पिछले साल दिसंबर महीने में अपनी नई सुरक्षा नीति बनाई थी, जिसके तहत जापान ने 400 अरब डॉलर से ज्यादा अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में झोंक दिए हैं। लिहाजा, चीन के खिलाफ अपनी जवाबी हमला क्षमताओं में सुधार करने के लिए, जापान ने अपने दक्षिण-पश्चिम द्वीपों और क्यूशू पर लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को तैनात करने की भी योजना बनाई है। इसके साथ ही रक्षा जानकार बताते हैं, कि अब जापान मगेशिमा पर लंबी दूरी की मिसाइलों का बेस बनाने का विकल्प भी चुन सकता है, जो चीन के लिए बहुत बड़ा टेंशन साबित होगा।

खड़ी होगी मिसाइलों की दीवार
इस बीच, अमेरिका भी मागेशिमा द्वीप पर अपनी लंबी दूरी की मिसाइलें लगाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। एशिया टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था, कि पहली और दूसरी द्वीप श्रृंखलाओं में "मिसाइल दीवार" बनाने की योजना पर भी अमेरिका काम कर रहा है। इन मिसाइलों में जमीन से आकाश में मार करने वाली मिसाइलों की तैनाती हो सकती है, जो विवाद की स्थिति में अत्यधिक कारगार साबित हो सकते हैं। इसके साथ ही, मागेशिमा पर जापान-यूएस ज्वाइंट बेसिंग प्रोजेक्ट का भी संभावित उद्देश्य, प्रशांत क्षेत्र में यूएस बेसिंग मुद्रा को मजबूत करना है।
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जापान अब खुद करेगा अपनी रक्षा
वहीं, कई रिपोर्ट्स में साफ कर दिया गया है, कि जापान अब अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि वो अपनी सुरक्षा की खुद तैयारी करेगा। जापान को चीन के साथ साथ उत्तर कोरिया से भी खतरा रहता है, लिहाजा जापान एक ऐसी सेना के निर्माण में जुट गया है, जो चीन के साथ साथ उत्तर कोरिया को भी समय आने पर खामोश कर सके। इसके साथ ही, भारत के लिए भी ये एक शुभ खबर है, क्योंकि जापान और भारत के बीच रक्षा संबंधों का विस्तार हो रहा है, लिहाजा आने वाले वक्त में चीन को लेकर भारत और जापान में कोई संयुक्त रणनीति भी बन सकती है।
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