Japan Election Explained: जापान में आज संसदीय चुनाव, क्या भारत समर्थक पार्टी हो जाएगी सत्ता से बाहर?

Explained Japan Election: जापान में मतदाता आज अपने प्रतिनिधि सभा यानि संसद के सदस्यों को चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं और इस चुनाव को देश के नए प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के लिए एक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

इशिबा की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) घोटालों में उलझी हुई है और उसे जनता का समर्थन लगातार कम होता जा रहा है, इसलिए इस चुनाव में पार्टी को एक दशक से भी ज्यादा समय में सबसे कठिन चुनावी चुनौती मिलने की उम्मीद है। LDP, भारत के दोस्त रहे दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पार्टी है, जिसको लेकर माना जा रहा है, उसकी राह इस चुनाव में मुश्किलों से भरी है।

Japan Election 2024

हालांकि इस चुनाव परिणाम को प्रधानमंत्री इशिबा के प्रति जनता के समर्थन या नाराजगी के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इस चुनाव में उनकी एलडीपी - जिसने 1955 से जापान की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है - उसके अपने स्थान से बहुत दूर गिरने की संभावना नहीं है।

विश्लेषकों का मानना ​​है, कि विपक्षी संवैधानिक डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (CDPJ) को महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी, लेकिन इतनी नहीं कि सरकार बदल सके। उनका अनुमान है कि एलडीपी को कुछ दर्जन सीटें कम हो सकती हैं। लेकिन सबसे खराब स्थिति में भी, पार्टी अपनी सत्तारूढ़ गठबंधन में नंबर एक पर बनी रहेगी।

आइये, जापान के चुनाव के बारे में कुछ जरूरी बातें जानते हैं:-

रेस में कौन हैं?

LDP पार्टी ने सेकंड वर्ल्ड वार के बाद के लगभग पूरे दौर में जापान पर शासन किया है और 465 सीटों वाले निचले सदन में बहुमत बनाए रखा है। एलडीपी का पुराना गठबंधन सहयोगी कोमीतो है, जो एक बड़े बौद्ध समूह द्वारा समर्थित पार्टी है, जिसने अक्सर अपने राजनीतिक सहयोगी को महत्वपूर्ण अभियान समर्थन दिया है।

1955 में बनी और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की आर्थिक सुधार का श्रेय पाने वाली एलडीपी का शासन दो बार बाधित हुआ, 1993-1994 और 2009-2012 में। दोनों बार रिश्वतखोरी और घोटालों ने पार्टी और उसके जन समर्थन को हिलाकर रख दिया।

लेकिन अब एलडीपी की लोकप्रियता फिर से कम हो गई है।

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सर्वेक्षण क्या कहते हैं?

जापान के असाही अखबार द्वारा हाल ही में किए गए सर्वेक्षण से पता चला है, कि एलडीपी को चुनाव में संघर्ष करना पड़ सकता है, संभवतः संसद में अपनी 247 सीटों में से 50 सीटें खो सकती है। मुख्य विपक्षी दल सीडीपीजे बढ़त बना रहा है, असाही सर्वेक्षण का अनुमान है कि वह चुनाव में 140 सीटें जीत सकता है, वर्तमान में उसकी 98 सीटें हैं। अगर ऐसा होता है, तो नए प्रधानमंत्री द्वारा अचानक चुनाव कराने का फैसला उल्टा पड़ सकता है।

अन्य सर्वेक्षण भी एलडीपी के लिए बुरी खबर का संकेत देते हैं।

प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, मार्च में सर्वेक्षण किए गए जापानी लोगों में से सिर्फ 30 प्रतिशत लोगों का एलडीपी के प्रति सकारात्मक रूख था, जबकि 68 प्रतिशत लोग LDP को लेकन निगेटिव राय दे रहे थे। लेकिन विपक्ष की स्थिति भी जनता की राय में बेहतर नहीं है। प्यू के अनुसार सर्वेक्षण किए गए लोगों में से सिर्फ 29 प्रतिशत लोगों ने ही विपक्षी पार्टी सीडीपीजे को लेकर पॉजिटिव राय दी है।

इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है, कि प्यू रिसर्च सर्वेक्षण में केवल एक तिहाई लोग जापान में "लोकतंत्र के काम करने के तरीके" से संतुष्ट थे।

दांव पर क्या है?

इशिबा ने 1 अक्टूबर को प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के तुरंत बाद संसद को भंग कर दिया और चुनाव की घोषणा कर दी। उन्होंने एलडीपी के निवर्तमान और संकटग्रस्त प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की जगह ली थी।

टोक्यो में होसेई विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर क्रेग मार्क ने कहा, कि इशिबा ने जापान के संविधान के तहत चुनाव की आवश्यकता से एक साल पहले चुनाव की घोषणा की, ताकि विपक्ष को "अचानक चौंकाया जा सके और अपने नीतिगत एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा ठोस जनादेश हासिल किया जा सके।"

मार्क ने द कन्वर्सेशन पत्रिका में लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की अलोकप्रियता के बाद, वह अपनी पार्टी के लिए एक नए चेहरे और छवि के पीछे जनता की रैली पर भरोसा कर रहे हैं।"

राजनीतिक फंड से जुड़े भ्रष्टाचार को लेकर फुमियो किशिदा की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई थी और उन्होंने प्रधानमंत्री पद छोड़ने का फैसला किया था।

मार्क ने कहा कि विपक्षी पार्टी CDPJ भी "विश्वसनीयता और स्थिरता की छवि" पेश करके अपने वोट बढ़ाने की उम्मीद कर रही है। उन्होंने कहा, "इस शुरुआती चुनाव में इशिबा की चुनौती न सिर्फ सरकार को बनाए रखने के लिए पर्याप्त वोट जीतना है, बल्कि एलडीपी के रूढ़िवादी विंग से अपने प्रतिद्वंद्वियों को रोकने के लिए चुनावी रूप से सफल होना है।"

एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन (ANFREL) ने हाल के घोटालों और बढ़ती आर्थिक चिंताओं के बाद जनता के विश्वास को मापने के मामले में एलडीपी और इशिबा के लिए चुनाव को "महत्वपूर्ण" बताया है। ANFREL ने कहा, "यह इस बात का महत्वपूर्ण संकेतक होगा, कि क्या एलडीपी जनता का विश्वास पुनः हासिल कर सकती है और अपना प्रभुत्व बरकरार रख सकती है या विपक्षी दल जनता के असंतोष का फायदा उठा सकते हैं।"

मतदान कब शुरू होगा?

मतदान केंद्र रविवार सुबह 7 बजे (शनिवार को 22:00 GMT) खुलेंगे और मतदान रविवार को रात 8 बजे (11:00 GMT) खत्म होगा, जिसके परिणाम देर रात तक आएंगे और सुबह तक जारी रहेंगे। भारतीय समय के मुताबिक, मतदान अभी चल रहे हैं। टोक्यो में वासेदा इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी के रॉब फेही ने कहा, कि जापान के चुनावों में वोटों की गिनती आम तौर पर जल्दी की जाती है और परिणाम संभवतः रविवार रात को घोषित किए जाएंगे। कुछ ही सीटें ऐसी होंगी, जिसके नतीजे सोमवार तक आएंगे।

चुनाव क्यों मायने रखता है?

यदि एलडीपी सत्तारूढ़ गठबंधन में अपनी चुनावी स्थिति को बरकरार रखने में असमर्थ है, तो इशिबा के नेतृत्व पर सवाल उठेंगे, जिससे आर्थिक अनिश्चितता और चुनौतीपूर्ण विदेशी संबंधों के माहौल में जापान में जारी राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ जाएगा।

खासकर राजनीतिक विश्लेषक, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के साथ बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच जापान की रक्षात्मक क्षमताओं की ओर इशारा करते हैं।

चैथम हाउस के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम में एसोसिएट फेलो काजुटो सुजुकी ने कहा, "अगर LDP उतनी सीटे नहीं हारती है, जितना अनुमान लगाया गया है, तो प्रधानमंत्री इशिबा की स्थिति पार्टी और देश के अंदर मजबूत होगी और उन्हें मजबूत "प्रधानमंत्री के रूप में पहचाना जाएगा, जिसे जनता का समर्थन प्राप्त है", जिसके बड़े फैसलों को जनता का समर्थन हासिल होगा।"

सुजुकी ने इस महीने की शुरुआत में एक विश्लेषण में लिखा था, "यदि इशिबा सरकार का एक सुरक्षित आधार बना सकती है, तो जापानी राजनीति स्थिर हो जाएगी और जापान की विदेश और सुरक्षा नीतियां, जिन्हें शिंजो आबे और किशिदा प्रशासनों ने मजबूत किया था, उसे और मजबूत किया जा सकेगा।"

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