बुलेट ट्रेन को 150 की रफ्तार पर चलता छोड़ ड्राइवर चला गया बाथरूम, जापान की इज्जत का दिया हवाला

शिंकनसेन बुलेट ट्रेन के ड्राइवर ने ट्रेन को चलता छोड़ दिया और खुद बाथरूम चला गया। रिपोर्ट के मुताबिक ड्राइवर ने ऐसा इसलिए किया, ताकि बुलेट ट्रेन एक मिनट भी लेट ना हो जाए।

टोक्यो, मई 22: जापान में ट्रेन के समय को लेकर एक अजीब सा जुनून लोगों के सिर पर सवार रहता है। जापान में ट्रेन का एक मिनट भी लेट होना ना वहां के लोगों को गवारा होता है और ना ही जापान रेल विभाग को। ट्रेन हर हाल में तय वक्त पर स्टेशन से खुले और तय वक्त पर ही अपने स्थान पर पहुंचे, इसको लेकर किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जाती है, भले ही इसके लिए कोई भी रिस्क क्यों ना लेना पड़े। ऐसा ही रिस्क जापान में बुलेट ट्रेन के ड्राइवर ने लिया और उसने बुलेट ट्रेन को 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलता छोड़कर बाथरूम चला गया। ये काफी खतरनाक था और बहुत बड़ा हादसा होने वाला था।

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    बुलेट ट्रेन को 150 की रफ्तार पर चलता छोड़ ड्राइवर चला गया बाथरूम, जापान की इज्जत का दिया हवाला
    150 किलोमीटर प्रति घंटे थी रफ्तार

    150 किलोमीटर प्रति घंटे थी रफ्तार

    शिंकनसेन बुलेट ट्रेन के ड्राइवर ने ट्रेन को चलता छोड़ दिया और खुद बाथरूम चला गया। रिपोर्ट के मुताबिक ड्राइवर ने ऐसा इसलिए किया, ताकि बुलेट ट्रेन एक मिनट भी लेट ना हो जाए और जापान की इज्जत पर बात ना आ जाए। 16 मई की ये घटना है जब शिंकनसेन बुलेट ट्रेन का ड्राइवर ट्रेन को चलता छोड़कर खुद बाथरूम चला गया। रिपोर्ट के मुताबिक बुलेट ट्रेन में उस वक्त 160 पैसेंजर सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 36 साल का ड्राइवर बुलेट ट्रेन हिकारी नंबर 633 चला रहा था और इसी दौरान उसे तेज बाथरूम लग गई थी और वो पेशाब करने के लिए बाथरूम चला गया। इस दौरान आरोपी ड्राइवर ने कंडक्टर को अपनी सीट पर बिठा दिया था और उसे ट्रेन को देखने के लिए कहा था। जबकि, कंडक्टर के पास बुलेट ट्रेन चलाने का लाइसेंस होता है और ना ही कंडक्टर को बुलेट ट्रेन चलानी आती है। कंडक्टर को अपनी सीट पर बिठाकर बुलेट ट्रेन का ड्राइवर करीब 3 मिनट तक अपनी सीट से गायब रहा।

    ट्रेन लेट ना हो जाए...

    ट्रेन लेट ना हो जाए...

    रिपोर्ट के मुताबिक बुलेट ट्रेन जापान के आत्मी रेलवे स्टेशन से मिशहिमा स्टेशन की तरफ जा रही थी और इस दौरान बुलेट ट्रेन की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ज्यादा थी और ट्रेन में 160 यात्री सवार थे। जिस कंडक्टर को ड्राइवर ने अपनी सीट पर बिठाया था, उसकी जिम्मेदारी पैसेंजर्स को लेकर होती है ना कि बुलेट ट्रेन चलाने की। जिसके बाद अब ट्रेन के ड्राइवर और कंडक्टर..दोनों की नौकरी खतरे में है। वहीं, ट्रेन के ड्राइवर ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी है। लेकिन, उसने ट्रेन को चलता छोड़कर बाथरूम जाने के पीछे जो दलील दी है, वो हैरान करने वाली है। ट्रेन के ड्राइवर ने कहा कि ट्रेन लेट ना हो जाए, इसीलिए वो ट्रेन को अनावश्यक रोके बगैर बाथरूम चला गया था। ड्राइवर ने बताया है कि उसके पेट के नीचले हिस्से में काफी दर्द होने लगा था और वो बाथरूम रोक नहीं पा रहा था और ट्रेन लेट नहीं हो जाए, इसीलिए उसने ट्रेन को रोका नहीं।

    जापान में समय को लेकर अजीब जुनून

    जापान में समय को लेकर अजीब जुनून

    बात अगर भारत की करें तो भारत में ट्रेन अगर सही समय पर स्टेशन पहुंच जाए तो लोग हैरान रह जाते हैं। वहीं जापान में ट्रेन कुछ सेकेंड्स देर हो जाए तो हंगामा मच जाता है। जापान में ट्रेन के समय को लेकर इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे पहले 2018 में भी एक वाकया ऐसा हुआ था जब एक ट्रेन ने 25 सेकेंड्स पहले स्टेशन छोड़ दिया था, जिसके बाद जापान में हंगामा मच गया था और बाद में जापान रेल को ऑफिसियल बयान जारी करते हुए माफी मांगनी पड़ी थी। 2017 में भी 20 सेकेंड्स पहले प्लेटफॉर्म छोड़ने के लिए जापानी रेल की काफी आलोचना हो चुकी है। जबकि दोनों ही बार स्टेशन पूरी तरह से खाली था और किसी भी नये यात्री को ट्रेन पर नहीं चढ़ना था।

    जापान में 'ट्रेन का समय' गर्व की बात

    जापान में 'ट्रेन का समय' गर्व की बात

    आखिर जापान में 20 सेकेंड्स पहले ट्रेन के खुलने या लेट पहुंचने पर जापानी रेलवे माफी क्यों मांगती है? जबकि दुनिया के किसी भी हिस्से में ट्रेन का कुछ देर लेट होना आम बात है। दरअसल, इसे जापान अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा से देखता है। जापान का कहना है कि देश का विकास अनुशासन और सुव्यवस्था से ही संभव है और हर काम अपने तय वक्त में होना चाहिए। जापानी ट्रेन संचालकों पर भी एक एक सेकेंड्स समय का पालन करने का प्रेशर रहता है। और यही वजह है कि जापान में औसत ट्रेन लेट 60 सेकेंड्स है और ये दूसरे देशों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। हालांकि, कई बार ये खतरे की भी बात होती है, जैसे इस बार खतरा मंडरा गया था और कुछ मिनट की देरी की वजह से ड्राइवर ने पूरी ट्रेन को खतरे में डाल दिया था। 2005 में ऐसे ही एक ट्रेन ड्राइवर ने ट्रेन को सही समय पर स्टेशन पहुंचाने के लिए ट्रेन की रफ्तार बढ़ा दी थी, जिससे ट्रेन का एक्सीडेंट हो गया था और 100 से ज्यादा लोग मारे गये थे।

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