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चीन और पाकिस्तान.. मोदी सरकार 3.0 में दुश्मन देशों के लिए क्या होगा प्लान? विदेश मंत्री जयशंकर ने किया खुलासा

S jaishankar on China-Pakistan: डॉ. एस जयशंकर ने आज विदेश मंत्रालय का कार्यभार फिर से संभाल लिया है और वो लगातार दूसरी बार भारत के विदेश मंत्री बने हैं, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।

अपने पहले कार्यकाल में शानदार प्रदर्शन करने वाले एस. जयशंकर पर फिर से भरोसा जताया गया है और मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में नए मंत्रिमंडल में उनका नाम फिर से शामिल किया गया है। आज कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने पड़ोसी देशों- चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर चिंता जताई है।

S jaishankar on China-Pakistan

एस. जयशंकर ने कहा है, कि देशों के साथ रिश्ते अलग-अलग होते हैं और समस्याएं भी अलग-अलग होती हैं।

चीन और पाकिस्तान को लेकर कैसी रहेगी नीति?

लगातार दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक संकेत दिए हैं, कि आने वाले वक्त में चीन और पाकिस्तान, जो भारत के 'दुश्मन देश' हैं, उनको लेकर कैसी नीति होने वाली है। उन्होंने चीन को लेकर कहा, कि "दोनों देशों को सीमा मुद्दे का समाधान खोजने की जरूरत है, जबकि पाकिस्तान के लिए, भारत को वर्षों पुराने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे का समाधान चाहिए।"

जयशंकर ने अगले पांच वर्षों में चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों के बारे में पूछे जाने पर कहा, कि "किसी भी देश में और विशेष रूप से लोकतंत्र में, सरकार का लगातार तीन बार चुना जाना बहुत बड़ी बात है। इसलिए दुनिया को निश्चित रूप से लगेगा, कि आज भारत में बहुत ज्यादा राजनीतिक स्थिरता है।"

उन्होंने कहा, कि "जहां तक ​​पाकिस्तान और चीन का सवाल है, उन देशों के साथ हमारे संबंध अलग हैं और वहां की समस्याएं भी अलग हैं। चीन के मामले में हमारा ध्यान सीमा मुद्दों का समाधान खोजने पर होगा और पाकिस्तान के साथ हम वर्षों पुराने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे का समाधान खोजना चाहेंगे...।"

S jaishankar on China-Pakistan

विदेश सचिव रह चुके हैं जयशंकर

आपको बता दें, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में विदेश सचिव रहे एस. जयशंकर ने 2019 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री का पदभार संभाला था। अपने पहले कार्यकाल के दौरान जयशंकर की सटीक कूटनीति के लिए विश्व स्तर पर प्रशंसा की गई थी।

उन्होंने उस समय रूसी तेल आयात करने के लिए वैश्विक मंच पर भारत का बचाव किया था, जब पश्चिम और यूरोप ने यूक्रेन युद्ध के लिए क्रेमलिन को दंडित करने के लिए प्रतिबंध लगाए थे। जयशंकर ने कई ऐसे ऑपरेशन भी शुरू किए, जिनमें हजारों भारतीयों को युद्ध क्षेत्रों से वापस लाया गया। इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध और गाजा युद्ध को लेकर भी एस. जयशंकर ने जिस तरह से भारत की नीति को आगे बढ़ाया है, उसकी प्रशंसा की गई है।

जयशंकर.. शांत स्वभाव, आक्रामक नजरिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में भारत के विदेश सचिव रहे जयशंकर ने 2019 में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। जयशंकर ने (2015-18) भारत के विदेश सचिव, संयुक्त राज्य अमेरिका (2013-15), चीन (2009-2013) और चेक गणराज्य (2000-2004) में राजदूत के रूप में कार्य किया है। वे सिंगापुर (2007-2009) में भारत के उच्चायुक्त भी रहे हैं। जयशंकर ने मॉस्को, कोलंबो, बुडापेस्ट और टोक्यो के दूतावासों के साथ-साथ विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय में अन्य राजनयिक पदों पर भी काम किया है।

उनके पहले कार्यकाल के दौरान, जयशंकर की सटीक कूटनीति के लिए विश्व स्तर पर प्रशंसा की गई थी। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का कभी आक्रामकता के साथ, तो कभी माहिर कूटनीतिज्ञ की तरह बचाव किया।

वो पश्चिम को ये बात समझाने में कामयाब रहे, कि आखिर भारत, रूस से क्यों कच्चा तेल खरीद रहा है और पश्चिम को क्यों उसे लेकर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने रूसी गैस आयात करने को लेकर यूरोपीय आलोचना का बेहतरीन अंदाज में मुकाबला किया यूरोप को दिए गए उनके सख्त संदेश ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। वास्तव में, उनका भाषण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकसर वायरल होते रहते हैं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अपनी एक पब्लिक रैली में उनका भाषण चलाया था और पाकिस्तान को विदेश नीति का पाठ, जयशंकर से पढ़ने के लिए कहा था।

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