'भारत पश्चिम विरोधी नहीं, दुनिया को दोबारा वैश्वीकरण की सख्त जरूरत', थिंक टैंक के कार्यक्रम में बोले जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री अमेरिका के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने वाशिंगटन डीसी में थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जिसका विषय 'न्यू पैसिफिक ऑर्डर में भारत की भूमिका' (India's Role in a New Pacific Order) था। इसस दौरान उन्होंने पश्चिमी देशों को लेकर अहम बातें कहीं।
जयशंकर के मुताबिक दुनिया को किसी प्रकार के दोबारा वैश्वीकरण की सख्त जरूरत है। भारत किसी भी तरह से पश्चिम विरोध नहीं है। वैश्वीकरण अपने आप में निर्विवाद है, क्योंकि इसने बहुत गहरी जड़ें जमा ली हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इसके जबरदस्त फायदे हैं। इसमें किसी को संदेह नहीं है, लेकिन वैश्वीकरण का ये विशेष मॉडल पिछले 25 वर्षों में विकसित हुआ है। जाहिर है इसमें बहुत सारे जोखिम निहित हैं और आज उन जोखिमों से बचकर कैसे सुरक्षित दुनिया बनाई जाए, ये चुनौती का हिस्सा है।
इंडो-पैसिफिक पर विदेश मंत्री ने कहा कि हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र का अलगाव वास्तव में द्वितीय विश्व युद्ध का परिणाम था। इसमें हिंद और प्रशांत महासागर से पहले एक वैश्विक रणनीति पर ध्यान दिया गया।
वहीं एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने साफ कहा कि भारत पश्चिम देशों के खिलाफ नहीं है। हालांकि उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि दुनिया की सबसे ज्यादा आबाधी वाला देश और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप मॉस्को के साथ पश्चिम के संबंध लगभग टूट गए हैं। यूरोपीय शक्ति रहा रूस आज एशिया की ओर देख रहा है। साथ ही एशियाई देशों के साथ अपने संबंध बना रहा।
रूस और चीन की नजदीकियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि रूस ने हमेशा खुद को यूरोपीय के रूप में देखा है, इसलिए यूक्रेन में जो हो रहा, उसके परिणामस्वरूप आप वास्तव में रूस का पुनर्निमाण देख रहे हैं। जयशंकर ने ये भी भविष्यवाणी की कि रूस गैर-पश्चिमी दुनिया पर ध्यान केंद्रित करेगा। वो एशिया और अन्य क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देगा।












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