ISRO का दमदार फ्यूचर प्लान, फ्रांस के साथ ऐतिहासिक स्पेस मिशन की शुरूआत, 2025 में शुक्र मिशन
इसरो और फ्रांस ने साथ मिलकर तीसरे संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर काम शुरू कर दिया है। इसरो ने इसके साथ ही फ्यूचर मिशन का भी खुलासा किया है।
बेंगलुरू/पेरिस: अपनी काबिलियत और मेहनत की बदौलत इसरो ने विश्व की अग्रणी स्सेप एजेंसी बनने का गौरव हासिल किया है। और आज स्थिति ये है कि विश्व के टॉप स्पेस एजेंसी इसरो के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। इसरो पहले से ही नासा के साथ काम कर रहा है लेकिन फ्रांस के साथ इसरो ने ऐतिहासिक स्पेस मिशन की शुरूआत कर दी है। इसरो का ये मिशन पूरे भारतवासी के दिल में गर्व भर देगा। भारत और फ्रांस साथ मिलकर तीसरे संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर काम कर रहे हैं।

फ्रांस के साथ ऐतिहासिक मिशन
इसरो ने फ्रांस के साथ मिलकर ऐतिहासिक स्पेस मिशन की शुरूआत कर दी है। इसरो डायरेक्टर के सिवन के मुताबिक इसरो ने फ्रांस के साथ मिलकर तीसरे संयक्त सैटेलाइट मिशन पर काम शुरू कर दिया है। इसरो चेयरमैन के सिवन ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग मानव मिशन, अंतरिक्ष उड़ान समेत कई क्षेत्रों में प्रवेश कर रहा है। के सिवन ने कहा है कि भारत सरकार ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई सुधार लाकर नये नये अवसर पैदा किए हैं और कई फ्रांसीसी कंपनियां भारत सरकार द्वारा बनाए गये अवसरों का फायदा उठाना चाहती हैं।

फ्रांस भारत का मजबूत साझेदार
पिछले कुछ सालों से भारत लगातार विदेशी सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में स्थापित करता आ रहा है। और इसी साल भारत ने ब्राजील के एक सैटेलाइट को अंतरिक्ष में तक भेजा है। इसरो के डायरेक्टर के सिवन ने राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार के राष्ट्रीय परिषद और विज्ञान प्रसार के वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत सरकार ने जो नये अवसर बनाए हैं, उसका फायदा कई विदेशी कंपनियां उठाना चाहती हैं और उससे भारत को आने वाले वक्त में काफी फायदा होने वाला है। खासकर फ्रांस अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा साझेदार है और दोनों देश मिलकर अंतरिक्ष मंए कई कार्यक्रम चला रहे हैं।

फ्रांस के साथ दो संयुक्त मिशन
भारत और फ्रांस डिप्लोमेटिक तौर पर काफी करीबी देश हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस और भारत काफी अच्छे दोस्त हैं। इस दोस्ती का असर स्पेस मिशन में भी देखा जाता है। इसरो के मुताबिक इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस ने इससे पहले दो संयुक्त मिशन एक साथ किए हैं। पहले संयुक्त मिशन के तहत 'मेघा ट्रॉप्किस' को 2011 में तो दूसरे मिशन के तहत दोनों देशों की स्पेस एजेंसी ने साथ मिलकर 'सरल अल्तिका' मिशन को साल 2013 में अंजाम पहुंचाया था। इसरो और फ्रांस की स्पेस एजेंसी सीएनईएस फिलहाल एकसाथ मिलकर तीसरे संयुक्त मिशन पर काम कर रही है। इस वक्त इसरो और सीएनईएस एक साथ थर्मल इन्फ्रारेड इमेजक हाइ रिजोल्यूशन नैचरल रिसोर्स असेसमेंट के लिए थर्मल इंफ्रारेड इंमेजिंग सैटेलाइट पर साथ काम कर रहे हैं।

2025 में इसरो-फ्रांस का शुक्र मिशन
भारत और फ्रांस का स्पेस मिशन कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि भारत की इसरो और फ्रांस की सीएनईएस एकसाथ मिलकर 2025 में शुक्र मिशन को अंजाम देने वाली है। फ्रांस की तरफ से कहा गया है कि इसरो शुक्र ग्रह से संबंधित अपने मिशन को अंजाम देगा जिसमें फ्रांस भी शामिल होगा। फ्रांस की सीएनईएस ने पिछले साल अपने बयान में कहा था कि अंतरिक्ष में खोज के लिए भारत द्वारा शुक्र संबंधित मिशन चलाया जाएगा, जिसमें फ्रांस भी शामिल होगा। भारत के शुक्र मिशन पर पूरी दुनिया की नजर है। इसके अलावा भी भारत इस साल गगनयान अंतरिक्ष में भेजने वाला है।

अंतरिक्ष मिशन में भारत टॉप-5
के सिवन के नेतृत्व में भारत का स्पेस मिशन और इसरो विकसित देशों की कतार में खड़ा हो गया है। अमेरिका, रूस, चीन जैसे देशों की पंक्ति में भारत है और अंतरिक्ष में भारत के लिए नये नये अवसरों की तलाश कर रहा है, जिसका फायदा भविष्य में भारत को मिलेगा। इसरो की नई लड़ाई दुनिया में बेस्ट बनने की है। इसरो मंगलयान मिशन कामयाबी के साथ अंजाम दे चुका है और अब भारत लुनार मिशन यानि चंद्रयान-2 और गगनयान पर काम कर रहा है। इसरो अभी तक 111 स्पेसक्राफ्ट मिशन, 79 लॉन्च मिशन को कामयाबी के साथ अंजाम दे चुका है और आने वाले वक्त में कई ऐसे मिशन पर काम कर रहा है, जिसपर दुनिया के किसी भी देश में काम नहीं चल रहा है।

इसरो का मिशन मंगलयान-2
भारत अपना सबसे महत्वपूर्ण मिशन मंगलयान-2 यानि ऑर्बिटर मिशन-2 इस साल अंत में या नये साल की शुरूआत में लॉन्च करने वाला है। ये मिशन भारत की प्रतिष्ठा के साथ जुड़ा हुआ है। इस मिशन के मुताबिक मंगल ग्रह पर भारत एक और आर्बिटर मिशन भेजेगा। भारत पहले ही एक ऑर्बिटर मंगल ग्रह की कक्षा में कामयाबी के साथ भेज चुका है। भारत का वो पहला मिशन मंगलयान था। यह किसी दूसरे ग्रह पर पहुंचने वाला भारत का पहला स्पेश मिशन था जिसके बारे में इसरो चेयरमैन के सिवन ने कहा था कि भारत का मंगल ग्रह अभियान चंद्रयान-3 के बाद शुरू होगा।

इसरो का मिशन गगनयान
गगनयान मिशन इसरो और भारत दोनों के लिए बेहद गर्व करने वाला मिशन है। इस मिशन के तहत इसरो अंतरिक्ष में तीन वैज्ञानिकों को भेजने वाला है। अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिकों की ट्रेनिंग जारी है। गगनयान मिशन की शुरूआत इसरो ने 2006 में ही शुरू की थी और 2008 में इसरो ने डिजाइन को फाइनल किया था। इस मिशन के तहत 3 टन के कैप्यूल में अंतरिक्ष में तीन वैज्ञानिक भेजे जाएंगे जो अलग अलग ऑर्बिट में जानकारियां हासिल करेंगे। अंतरिक्ष में ये मिशन सात दिनों तक चलेगा और भारत के इस मिशन पर पूरी दुनिया की नजर है। इसके साथ ही भारत शुक्रयान मिशन पर भी काम कर रहा है। लिहाजा, इसरो पर गर्व करिए और इसरो चेयरमैन के सिवन को सलाम करिए...जिन्होंने अपनी मेहनत और नेतृत्व से इसरो को विश्व में अग्रणी बना दिया है।












Click it and Unblock the Notifications