Chandrayaan-3 के थमते हैं कदम तो क्या करेगा ISRO? हर हाल में सफल लैंडिंग दावा, बनाया बड़ा प्लान
चंद्रयान 3 इसरो के एक महत्त्वपूर्ण मिशन पर है। इस बीच इसरो प्रमुख ने एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्षान बेहद अपडेटेड है। इसमें कई सारे फीचर्स हैं को एक अभेद्य सुरक्षा कवर प्रदन करते हैं।
ISRO Chief over Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर चंद्रमा पर भेजे गए तीसरे मिशन चंद्रयान-3 को लेकर बड़ी उम्मीदे हैं। मिशन की सफलता के साथ भारत एक बड़ी कामयाबी के दुनियाभर के देशों के लिए प्रेरणा बन जाएगा। इस बीच इसरो कहा कि मिशन के यान अगर कुछ खराबी भी आती है, तो भी चिंता की बात नहीं। मंगलवार को इसरो ने कहा कि लैंडर विक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर किसी परिस्थिति से निपटने में सक्षम हो।
मंगलवार को एक बयान ने इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा इसरो 'विक्रम' लैंडर की उचित लैंडिंग की योजना बना रहा है, भले ही इसके सेंसर और इंजन विफल हों। बता दें कि तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने में सक्षम होगा, भले ही इसके सभी सेंसर और दो इंजन काम न करें।

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा, "अगर सब कुछ विफल हो जाता है, अगर सभी सेंसर विफल हो जाते हैं, कुछ भी काम नहीं करता है, फिर भी भी चंद्रयान की चंद्रमा पर लैंडिंग होगी। इसे इसके लिए ही डिजाइन किया गया है। बस केवल प्रणोदन प्रणाली अच्छी तरह से काम करनी चाहिए।"
चंद्रयान मिशन स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में भारत के लिए गौरव का विषय है। पूर्व के दो मिशन की असफलता के बाद नए मिशन के यान को काफी अपडेट किया गया। अपडेटेड विक्रम लैंडिंग किसी भी स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
चंद्रयान-3 ने 14 जुलाई को लॉन्च होने के बाद से अब तक दो तिहाई दूरी तय कर ली है। अगले 17 दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए महत्वपूर्ण होंगे। दावा किया जा है कि विक्रम लैंडर 23 अगस्त की शाम 5.47 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग कर सकता है। लैंडर चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किमी की ऊंचाई से चंद्रमा पर उतरेगा।












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