इजरायल में बनेगी वामपंथी सरकार? 'महागठबंधन' से हारे बेंजामिन नेतन्याहू, क्या बदल जाएगी इजरायली राजनीति?

रविवार को नफ्ताली बेनेट ने घोषणा की है कि वो विपक्षी पार्टी येश अतिद के मुखिया मिलकर एक संयुक्त सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं।

तेलअवीव, मई 31: इजरायल के राष्ट्रवादी नेता नफ्ताली बेनेट ने फैसला किया है कि वो इजरायल की विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर एक नई सरकार का निर्माण करेंगे, जिसका मतलब ये हुआ कि इजरायल में सबसे ज्यादा दिनों तक प्रधानमंत्री रहने वाले बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी अल्पमत में आ जाएगी और उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी। बेंजामिन नेतन्याहू पिछले 12 सालों से इजरायल के प्रधानमंत्री हैं और नफ्ताली बेनेट इजरायल की अपेक्षाकृत छोटी पार्टी यामीना पार्टी के मुखिया हैं।

12 सालों बाद नेतन्याहू जाएंगे?

12 सालों बाद नेतन्याहू जाएंगे?

रविवार को नफ्ताली बेनेट ने घोषणा की है कि वो विपक्षी पार्टी येश अतिद के मुखिया मिलकर एक संयुक्त सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं। येश अतिद इजरायल की सेन्ट्रिक पार्टी मानी जाती है, जबकि नफ्ताली बेनेट को हार्डलाइनर राष्ट्र्पति नेता माना जाता है और अगर गठबंधन पर फाइनल मुहर लग जाता है तो 12 सालों बात बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता 12 सालों बाद खत्म हो जाएगी। नफ्ताली बेनेट ने रविवार को इजरायली लोगों के सामने घोषणा करते हुए कहा कि वो देश में लगातार पांचवीं बार चुनाव रोकने के लिए नई सरकार बनाने के लिए समझौता कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने 'रेस्क्यू द कंट्री फ्रॉम स्पिन' टर्म दिया है। नफ्ताली बेनेट ने कहा कि 'लगातार चार बार चुनाव और फिर 2 महीने तक भी स्थायी सरकार का नाम होना, साफ साफ बताता है कि अब इजरायल में दक्षिणपंथी सरकार का होना और रहना संभव नहीं है, जिसका नेतृत्व बेंजामिन नेतन्याहू कर रहे थे। अब या तो इजरायल में पांचवी बार चुनाव कराना होगा या फिर संयुक्त सरकार बनानी होगी'

यामीना पार्टी है किंगमेकर

यामीना पार्टी है किंगमेकर

यामीना पार्टी के मुखिया नफ्ताली बेनेट को सख्त दक्षिणपंथी नेता माना जाता है लेकिन विपक्षी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद अब इजरायल में अटकलें लगाई जा रही हैं कि वहां पर वामपंथी नेताओं का बोलबाला होगा और सरकार पर वामपंथी नेताओं का दबदबा होगा। कई एक्सपर्ट ये भी मानते हैं कि इजरायल में एक तरह से लेफ्ट की ही सरकार होगी। हालांकि, नफ्ताली बेनेट लेफ्ट के दबदबे की बात से इनकार करते हैं। उन्होंने वामपंथी सरकार होने की बात को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सामूहिक नेतृत्व की सरकार में हर किसी की बात को सुना जाएगा। उन्होंने कहा कि 'मुझे प्रधानमंत्री बनाने के लिए लेफ्ट के नेता काफी मुश्किल भरे समझौते कर रहे हैं।' आगे नफ्ताली बेनेट ने कहा कि 'नई सरकार ना को पलायन करेगी, ना समझौता करेगी, ना अपना क्षेत्र किसी को सौंपेगी और ना ही मिलिट्री ऑपरेशन करने से ही डरेगी'। नफ्ताली बेनेट लेफ्ट के दबदबे की बात से भले ही इनकार कर रहे हों, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नफ्ताली बेनेट को अगर गठबंधन सरकार को कामय रखना है तो फिर उन्हें दक्षिणपंथी विचारधारा को भूल जाना होगा।

नेतन्याहू की है सबसे बड़ी पार्टी

नेतन्याहू की है सबसे बड़ी पार्टी

इस साल इजरायल में हुए चुनाव में बेंजामिन नेतान्याहू की लिकुड पार्टी इजरायल की सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन बहुमत नेतन्याहू की पार्टी को नहीं मिला। जिसके बाद इजरायल के राष्ट्रपति ने इजरायल की दूसरी बड़ी पार्टी येश अतिद के नेता यैर लैपिड को सरकार बनाने के लिए आमंत्रण दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक 10 मई को ही लैपिड और बेनेट मिलकर सरकार बनाने का ऐलान करने वाले थे लेकिन अचानकर हमास ने इजरायल के ऊपर हमला शुरू कर दिया और फिर सरकार बनाने का विचार टाल दिया गया और अब जबकि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति है तो फिर नई सरकार बनाने का ऐलान किया जा सकता है। आपको बता दें कि नफ्ताली बेनेट पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्यहू के ही सहयोगी थी लेकिन बाद में दोनों की राहें अलग अलग हो गईं। वहीं, नेतन्याहू ने इजरायल के संभावित गठबंधन पर कहा है कि 'बेनेट और लैपिड मिलकर अगर सरकार बनाते हैं तो उनकी विचारधारा इजरायल को कमजोर करने वाली है और इजरायल में अभी भी दक्षिणपंथी सरकार का बनना संभव है।'

इजरायल की आगे की राजनीति?

इजरायल की आगे की राजनीति?

इजरायल में अगर गठबंधन की सरकार बनती है तो सभी विपक्षी पार्टियों के साथ आने के बाद भी विपक्ष को इस्लामिक यूनाइटेड अरब का समर्थन चाहिए। और जाहिर सी बात है कि अरब समर्थित पार्टी से समर्थन लेने के बाद इजरायल की नई सरकार विरोधियों पर उस तरह से आक्रामक नहीं हो पाएगी। वहीं, विपक्षी पार्टियों के गठबंधन में इजरायल की सभी पार्टियां शामिल हैं और लेफ्ट नेताओं का दबदबा होगा, लिहाजा सरकार में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नफ्ताली बेनेट का दबदबा कम हो जाएगा। वहीं इजरायली पत्रकारों का मानना है कि नई सरकार बनने के बाद अगर फिर से इजरायल को लड़ाई में जाना पड़ता है या अगर हमास या फिलिस्तीन के खिलाफ किसी ऑपरेशन को चलाना पड़ता हो तो उसमें अलग अलग विचारधारा के बीच खिंचाव शुरू हो जाएगा और विचारधारा के आधार पर इजरायल अपनी आक्रामकता को ही खत्म कर लेगा। नफ्ताली बेनेट को अब औपचारिक तौर पर बाकी दलों के साथ मिलकर नई सरकार बनाने को लिए समर्थन की चिट्ठी राष्ट्रपति को सौंपनी है।

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