येरुशलम को कब्जाने की कोशिश में लगे इजरायल को फिलिस्तीन और मुस्लिम देश रोक पाएंगे?

येरूशलम एक धार्मिक शहर है जहां मुस्लिम समुदाय की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद है तो यहूदियों की सबसे पवित्र मंदिर भी मस्जिद के पास है। येरूशलम में बड़े चर्च भी हैं। हर समुदाय अपनी अपनी धार्मिक आस्था के साथ इस शहर से जुड़ा है

नई दिल्ली, मार्च 11: पिछले करीब 4 हफ्तों से धार्मिक शहर येरुशलम में लगातार सुलग रहा था। इजरायली पुलिस और फिलिस्तीन के प्रदर्शनकारियों के बीच छिटपुट झड़प लगातार चल रही थी। लेकिन, देखते ही देखते इसमें हमास के कट्टरपंथी कूद पड़े और छिटपुट हिंसा ने लड़ाई का रूप ले लिया। दोनों तरफ से रॉकेट दागे जा रहे हैं और जिसकी आशंका थी वही हो रहा है कि फिलिस्तीन की तरफ से ज्यादा लोग घायल हो रहे हैं वहीं, कट्टरपंथी संगठन हमास को काफी नुकसान पहुंचा है। ये लड़ाई अभी कहां जाकर थमने वाली है, इसके बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इजरायल अपनी आक्रामकता के लिए प्रसिद्ध है और फिलिस्तीन को कुछ मुस्लिम देशों का साथ मिल गया है। ऐसे में ये संघर्ष कहां जाकर खत्म होगा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन, अचानक ये संघर्ष क्यों भड़का है और येरूशलम में अचानक हिंसा क्यों भड़क गई है, आईये जानने की कोशिश करते हैं।

धार्मिक शहर में अशांति ही अशांति

धार्मिक शहर में अशांति ही अशांति

येरूशलम एक धार्मिक शहर है जहां मुस्लिम समुदाय की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद है तो यहूदियों की सबसे पवित्र मंदिर भी मस्जिद के पास ही है। वहीं, येरूशलम में बड़े चर्च भी हैं। हर समुदाय अपनी अपनी धार्मिक आस्था के साथ इस शहर से जुड़ा हुआ है। लेकिन, पिछले कई सालों से इस धार्मिक शहर ने शांति नहीं देखी है। पिछले 100 सालों से ज्यादा वक्त ले येरूशलम में यहूदी और अरबों के बीच लगातार संघर्ष चलता आ रहा है और इस शहर ने हिंसा की ऐसी ऐसी तस्वीरें देखी हैं, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस बार जो हिंसा भड़की है, उसको लेकर कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजरायल को आशंका थी कि उसके पवित्र मंदिर पर हमला हो सकता है, लिहाजा उसने मंदिर की सुरक्षा काफी ज्यादा बढ़ा दी, जिसका विरोध फिलिस्तीन के लोगों ने करना शुरू कर दिया। फिलिस्तीन के लोगों का कहना था कि रमजान के पाक महीने में इजरायल उन्हें पवित्र मस्जिद तक जाने से रोक सकता है, लिहाजा उन्होंने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और फिर देखते ही देखते ये प्रदर्शन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को फिलिस्तीन के प्रदर्शनकारियों ने हैंड ग्रैनेड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद इजरायल पुलिस ने भी हिंसक कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें बताया जा रहा है कि 700 से ज्यादा फिलिस्तीन के प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।

येरूशलम पर विवाद क्यों ?

येरूशलम पर विवाद क्यों ?

येरूशलम पर इजरायल और फिलिस्तीन दोनों अपना अपना दावा करते हैं और दोनों में से कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं, अमेरिका ने एक शांति पहल करते हुए येरूशलम को लेकर कहा कि वो इजरायल की संप्रभु राजधानी होगी और येरूशलम को विभाजित नहीं किया जा सकेगा। वहीं, इस समझौते के मुताबिक येरूशलम के पूर्वी हिस्से को फिलिस्तीन को राजधानी बनाने के लिए दे दिया गया, जिसका नाम बदलकर फिलिस्तीन 'अल कुद्स' कर सकता था जो येरूशलम का अरबी अनुवाद है। वहीं, इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद की शुरूआत करीब 100 साल पहले हो चुकी थी और 1948 में इजरायल ने अपने आप को स्वतंत्र देश घोषित कर लिया था और फिर इजरायल ने आसपास के अरब देशों जैसे इजिप्ट, जॉर्डन, इकाक और सीरिया पर हमला करना शुरू कर दिया और फिर इजरायल ने इन सभी देशों से अपने लिए जमीन छीन कर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। लेकिन, इसके बाद इजरायल और फिलिस्तीन के बीच काफी तेज संघर्ष शुरू हो गया था, जिसते परिणामस्वरूप 1967 में 6 दिनों तक इजरायल और फिलिस्तीन के बीच काफी भयानक युद्ध हुआ था। इस युद्ध को सिक्स डे वॉर का नाम दिया गया था, जिसमें इजरायली सेना ने फिलिस्तीन के गोलन हाइट्स, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशलम को अपने कब्जे में ले लिया था। और अभी इसी जीत का जश्न मनाने के लिए इजरायल के लोगों ने येरूशलम में रैली निकाली थी, जिसमें फिलिस्तीन के लोगों ने हमला कर दिया था।

कट्टरपंथी संगठन हमास का गठन

कट्टरपंथी संगठन हमास का गठन

साल 1987 में फिलिस्तीन के कुछ कट्टरपंथियों ने मिलकर हमास का गठन किया, जिसका उद्येश्य फिलिस्तीन के पूरे हिस्से पर मुस्लिम धर्म का विस्तार करना था। कट्टरपंथी संगठन हमास गाजा पट्टी पर अपना प्रभाव रखता है। गाजापट्टी इजरायल और मिस्र के बीच में स्थित है। 1967 में इजरायल ने गाजा पट्टी पर भी कब्जा कर लिया था लेकिन 2005 में इजरायल ने गाजा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटा दिया था। बाद में इस क्षेत्र पर हमास के विद्रोहियों ने अपना प्रभुत्व कामय कर लिया था। हमास लगातार इजरायल को निशाना बनाने की कोशिश करता रहता है और इजरायल जवाबी कार्रवाई करता रहता है।

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष

फिलिस्तीन चाहता है कि इजरायल 1967 से पहले अंतर्राष्ट्रीय समझौते के तहत अपनी सीमाओं के अंदर चला जाए और वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी पर पूरी तरह से फिलिस्तीन का नियंत्रण हो। जबकि इजरायल येरूशलम पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है। इजरायल चाहता है कि पूरी दुनिया के देश उसे एक स्वतंत्र और संप्रभू यहूदी राष्ट्र के तौर पर मान्यता दें। वहीं, अमेरिका ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच में शांतिपूर्ण समझौता करवाने की कोशिश की है लेकिन फिलिस्तीन अमेरिका को संदेह की नजरों से देखता है और इस्लामिक संगठनों ने कई मौकों पर अमेरिका की आलोचना भी की है। माना जाता है कि अमेरिका में यहूदियों की संख्या इजरायल से भी ज्यादा है और वो अमेरिका की राजनीति को प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही अमेरिका और इजरायल के बीच कई रक्षा समझौते भी हैं। वहीं, इजरायल ने अपनी टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा मजबूत कर रखी है कि उसे हराना किसी भी देश के लिए आसान नहीं है और यही वजह है कि अब धीरे धीरे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े मुस्लिम देशों ने इजरायल से दोस्ती कर ली है। बदले में इजरायल इन देशों को टेक्नोलॉजी की मदद करता है और फिलिस्तीन धीरे धीरे अकेला पड़ता जा रहा है।

इजरायल को रोक पाएंगे मुस्लिम देश?

इजरायल को रोक पाएंगे मुस्लिम देश?

येरूशलम में इस वक्त हो रही हिंसा के लिए मुस्लिम देशों ने इजरायल की सख्त आलोचना की है, जिसमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। ईरान, तुर्की के अलावा पाकिस्तान ने भी इजरायल की खूब आलोचना की है। ईरान ने तो यहां तक कहा कि इजरायल एक देश नहीं बल्कि मुस्लिम देशों के खिलाफ बना एक आतंकी देश है। लेकिन, सवाल उठता है कि क्या इजरायल के खिलाफ मुस्लिम देश युद्ध छेड़ पाएंगे? या अगर अभी इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध होता है तो मुस्लिम देश खुलकर फिलिस्तीन के साथ आ पाएंगे। जानकार मानते हैं कि अब इसकी गुंजाइश कम है। जानकारों का मानना है कि इजरायल खुद को इतना ज्यादा मजबूत कर चुका है कि कोई भी मुस्लिम देश सीधे तौर पर इजरायल से नहीं टकराना चाहेगा। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल से दोस्ती कर ली है, लिहाजा इन्होंने रस्मी तौर पर ही इजरायल की आलोचना की है। रही बात ईरान की, तो वो खुद इजरायल से पीड़ित है और इजरायल अकसर ईरान के ठिकानों को निशाने पर लेता रहता है। लिहाजा माना जा रहा है कि इजरायल को इस वक्त मुस्लिम देश रोकने की कोशिश भी नहीं करेंगे, लिहाजा कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस संघर्ष के बहाने इजरायल पूरी तरह से येरुशलम को अपने कब्जे में ले सकता है।

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