नेतन्याहू का जलवा बरकरार, यैर लैपिड में भी कम नहीं धार, इजरायल में अबकी बार, किसकी सरकार?

नेफ्ताली बेनेट के बाद अब यैर लैपिड इजरायल के अगले कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनेंगे। यैर लैपिड की येश एटिड पार्टी चुनावों में अभी तक सफल रही है और उनकी पार्टी को कुछ सीटें हमेशा से मिलती रही हैं।

तेल अवीव, जून 21: इजरायल के प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट को सोमवार की सुबह पहले से ही पता था कि वह आज की शाम तक ही इज़राइल के निवर्तमान और सबसे कम समय तक प्रधानमंत्री रहेंगे। उनके पूर्व वफादार नीर ओरबाख ने उनके सामने साफ कर दिया था, कि वह अगले सप्ताह केसेट (इजरायली संसद) को भंग करने में विपक्ष के साथ शामिल होंगे। बेनेट ने यैर लैपिड से मुलाकात की और फिर एक बिल लाकर संसद को भंग करने का फैसला किया। अब इजरायली संसद में सरकार भंग करने का बिल पेश किया जाएगा, जिसमें 25 अक्टूबर को देश में फिर से लोकसभा चुनाव करवाने की तारीख तय की जाएगी। तो फिर इजरायल में अगली सरकार किसकी होगी और क्या पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू धमाकेदार वापसी कर पाएंगे, आइये जानते हैं।

नेफ्ताली बेनेट ने क्यों किया चुनाव का ऐलान

नेफ्ताली बेनेट ने क्यों किया चुनाव का ऐलान

हालांकि, प्रधानमंत्री नेफ्ताली और उनके प्रमुख सहयोगी यैर लैपिड के पास अभी कुछ और वक्त था और वो चाहते तो कुछ और हफ्तों तक चुनाव को टाल सकते थे, लेकिन वे 'वेस्ट बैंक विनियम कानून' को पारित करने में सक्षम नहीं थे और इसकी वजह से इजरायल में अराजकता की स्थिति बन सकती थी और दोनों नेता ये नहीं चाहते थे, कि ऐसा लगे कि, पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन बेंजामिन नेतन्याहू और दलबदलुओं के एक ग्रुप द्वारा उन्हें अराजकता का माहौल का हवाला देकर जबरन चुनाव मे घसीटा जा रहा है।

कैसा रहा नेफ्ताली बेनेट का कार्यकाल?

कैसा रहा नेफ्ताली बेनेट का कार्यकाल?

नेफ्ताली बेनेट ने अपनी दक्षिणपंथी विचारधारा के मुताबिक ही शासन किया और सहयोगी वामपंथी पार्टी के आगे नहीं झुके और उन्होंने अपनी सरकार को गिर जाने दिया, लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया। सरकार गिर जाने के बाद भी नेफ्ताली बेनेट लीगेसी मोड में हैं और इजरायल में उन्हें उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिसने इज़राइल को एकजुट करने के लिए अपना सबकुछ दिया और नेफ्ताली बेनेट चाहते हैं कि, उन्हें वचनवद्ध व्यक्ति के रूप में याद किया जाए और वो लैपिड के साथ अपने समझौते पर कायम रहे, जिसके तहत गठबंधन सरकार में शासन का आधा वक्त यैर लैपिड को प्रधानमंत्री बनना था। एक साल के कार्यकाल को संभालने के बाद अब नेफ्ताली बेनेट के पास कोई पार्टी नहीं है और उनकी यामिना पार्टी पूरी तरह से टूट चुकी है। उनकी पार्टी के सात सदस्यों में तीन पहले ही गठबंधन छोड़ चुके है और उनके राजनीतिक साथी आयलेट शेक और यामिना के अन्य सांसद अपनी-अपनी योजना बना रहे हैं। लिहाजा, नेफ्ताली बेनेट फिलहाल खाली हाथ नजर आ रहे हैं।

यैर लैपिड बनेंगे कार्यवाहक प्रधानमंत्री

यैर लैपिड बनेंगे कार्यवाहक प्रधानमंत्री

नेफ्ताली बेनेट के बाद अब यैर लैपिड इजरायल के अगले कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनेंगे। यैर लैपिड की येश एटिड पार्टी चुनावों में अभी तक सफल रही है और उनकी पार्टी को कुछ सीटें हमेशा से मिलती रही हैं। लेकिन, उनकी पार्टी को कभी भी 15 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिला। बहुत से इजरायलियों ने लैपिड को एक विश्वसनीय नेता के रूप में भी नहीं देखा है। लिहाजा, अब उनके पास इजरायली लोगों की आंखों के सामने खुद को हीरो की तरह पेश करने के लिए चार महीने का वक्त होगा। अंतरिम प्रधानमंत्री का पद, जैसा कि 2019 और 2021 के बीच भी हो चुका है, अब यैर लैपिड को इजरायली संसद में पूर्ण बहुमत वाले प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। और कौन जानता है कि इजराएल का नया प्रधानमंत्री कौन होगा? क्या यैर लैपिड चुनाव में जनता का विश्वास हासिल कर पाएंगे, बड़ा सवाल है।

बेंजामिन नेतन्याहू... ‘आंख की किरकिरी’

बेंजामिन नेतन्याहू... ‘आंख की किरकिरी’

इजरायल में पिछले 3 सालों में चार चुनाव हो चुके हैं और किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है और अगर चुनाव बाद फिर से किसी को बहुमत नहीं मिला, तो नया गठबंधन बनाना एक कठिन संघर्ष होगा। इजरायल की राजनीति के मूल तथ्य नहीं बदले हैं। इजरायली राजनीति में छोटा ही सही, लेकिन अभी भी एक वर्ग है, जो नहीं चाहता कि बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में लौट आए और नेताओं का वो धड़ा पिछले एक साल से नेफ्ताली बेनेट की गठबंधन सरकार को समर्थन दे रहा था, लेकिन वो गठबंधन को नहीं बचा सके। दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू केवल चार दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के एक सुसंगत और वफादार गठबंधन के नेता हैं। अधिकांश चुनाव उन्हें सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत भले नहीं मिले हैं, लेकिन बहुमत के सबसे ज्यादा करीब वही रहे हैं। यदि मौजूदा गठबंधन की कोई भी पार्टी चुनावी दहलीज को पार करने में विफल रहती है, तो उनके वोट कम होते जाएंगे। इससे नेतन्याहू ब्लॉक को फायदा होगा, क्योंकि पिछले एक साल में बेंजामिन नेतन्याहू ने जोरदार कैंपेन चलाया है। लिहाजा, माना जा रहा है कि, नेतन्याहू और उनकी समर्थक पार्टियों की चुनावी बहुमत हासिल करने की संभावना ज्यादा है।

नेतन्याहू का सॉलिड चुनावी अभियान

नेतन्याहू का सॉलिड चुनावी अभियान

बेंजामिन नेतन्याहू होने के नाते, वह कुछ भी मौका नहीं छोड़ने वाले हैं और उन्होंने पहले से ही अपने अभियान की सावधानीपूर्वक योजना बनाई है। यह "आतंक-समर्थक" अरब पार्टियों के खिलाफ लगातार आक्रामक हैं और जनता के बीच पिछले एक साल से जा रहे हैं और वो इजरायली जनता को लगातार बता रहे हैं, कि 'अरब पार्टियों' के समर्थन से नेफ्ताली बेनेट ने सत्ता हासिल किया था, और वो राष्ट्रवादी विचारधारा के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। यहूदियों का राष्ट्रवाद दुनियाभर में प्रसिद्ध है। नेतन्याहू की पार्टी और सहयोगी पार्टियां अपने 'राष्ट्रीय' और 'यहूदी' विचारधारा के साथ चुनाव में उतरेगी और उन लोगों का मुकाबला करेंगी, जिन्होंने सरकार को भंग करने का फैसला यह कहकर कहा कि, 'इजरायल के यहूदी चरित्र को खतरा है।' लिहाजा, बेंजामिन नेतन्याहू का पलड़ा फिर से भारी है और यैर लैपिड ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो नेतन्याहू को चुनाव में टक्कर दे सकते हैं।

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