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इजरायल के पास है ऐसा कौन सा हथियार, जिससे वो हवा में एकसाथ तबाह कर रहा हमास की 400-400 मिसाइलें

येरूशलम, 12 मई: पिछले 8-9 दशक से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद जारी है। हाल ही में धार्मिक स्थल पर कब्जे को लेकर दोनों देशों के इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। जिसके बाद कट्टरपंथी संगठन हमास भी मैदान में उतरा और इजरायल पर हमले शुरू कर दिए। इस पर इजरायली सेना और उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद ने भी मोर्चा संभाल लिया। इस बार दोनों देशों के हवाई हमलों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे। साथ ही लोग इजरायल के डिफेंस सिस्टम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। (वीडियो- नीचे)

38 घंटे में दागे 1050 रॉकेट

38 घंटे में दागे 1050 रॉकेट

दरअसल हमास के आतंकी रॉकेट से इजरायल के अलग-अलग इलाकों को निशाना बना रहे हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स ने बुधवार को बताया कि पिछले 38 घंटे में 1050 से ज्यादा रॉकेट सेंट्रल और दक्षिण इजरायल की ओर दागे गए। इस हमले की आशंका को देखते हुए इजरायल ने पहले ही तनावपूर्ण इलाके में आयरन डोम मिसाइल सिस्टम तैनात किया था। जिस वजह से उसको ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ रहा है।

क्या है सिस्टम की खासियत?

क्या है सिस्टम की खासियत?

आयरन डोम मिसाइल सिस्टम को दुनिया का सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है। ये दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही ट्रैक कर उसे उड़ा देता है। मान लीजिए कि दुश्मन ने एक साथ 100 रॉकेट दागे, तो ये सिस्टम हवा में ही उनकी पहचान कर 95 से 100 प्रतिशत मिसाइलों को जमीन पर आने से पहले ही मार गिराएगा। इसकी खास बात ये है कि इस मोबाइल लॉन्चर को ट्रक के सहारे कहीं भी पहुंचाया जा सकता है।

गर्मी से करती है पहचान

गर्मी से करती है पहचान

इजरायली डिफेंस फोर्स के मुताबिक इसमें डिटेक्शन-ट्रैकिंग रडार, वेपन कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल फायरिंग यूनिट का बेहतरीन तालमेल है, जिस वजह से ये 4 से 70 किलोमीटर की दूरी तक के टारगेट को आसानी से पहचान लेती है। इसके बाद मिसाइल लॉन्च होकर दुश्मन के मिसाइल की गर्मी और इलेक्ट्रिक सेंसर की पहचान करती है। फिर हवा में ही टकराकर उसे नष्ट कर देती है। ऐसे में जमीन पर सिर्फ मलबा ही गिरता है, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं होता।

एक बार में सैकड़ों मिसाइल तबाह

एक बार में सैकड़ों मिसाइल तबाह

वहीं इसके चार से पांच लॉन्चर में एक बार में करीब 20 मिसाइलें लगती हैं। जिस वजह से ये तैनाती स्थल से 150 वर्ग किलोमीटर के इलाके की सुरक्षा आसानी से कर लेता है। 2009 में इस हथियार का ट्रायल इजरायल ने पूरा कर लिया था, फिर 2011 में इसे गाजा की सीमा पर तैनात कर दिया गया। मौजूदा वक्त में हमास एक साथ 300-400 रॉकेट दाग रहा है, जिसे ये सिस्टम आसानी से मार गिराता है। यही वजह है कि इस लड़ाई में इजरायल को नुकसान कम हो रहा और वो दुश्मन पर हावी है।

भारत को मिलने की उम्मीद?

भारत को मिलने की उम्मीद?

आयरन डोम को इजरायली कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस ने तैयार किया है। खास बता तो ये है कि इसी कंपनी के साथ मिलकर भारत की हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने बराक-8 मिसाइलों का निर्माण किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आयरन डोम में दिलचस्पी दिखाई है। ऐसे में हो सकता है कि भविष्य में ये हाईटेक सिस्टम हमारी सेनाओं के पास भी हो।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

कैसे शुरू हुआ विवाद?

दरअसल इजरायल को आशंका थी कि उसके पवित्र मंदिर पर हमला हो सकता है, लिहाजा उसने मंदिर की सुरक्षा काफी ज्यादा बढ़ा दी। जिसका विरोध फिलिस्तीन के लोगों ने करना शुरू कर दिया। फिलिस्तीन के लोगों का कहना था कि रमजान के पाक महीने में इजरायल उन्हें पवित्र मस्जिद तक जाने से रोकने के लिए ऐसा कर रहा है। लिहाजा उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। शुरू में तो हिंसा की छिटपुट खबरें आई थीं, लेकिन बाद में हमास के कट्टरपंथी में इसमें कूद पड़े। इस लड़ाई का अंत कब होगा इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों ही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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