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इजराइल ने व्यापार के लिए नये ट्रेड रूट का किया ऐलान, भारत के इस बंदरगाह से भेजेगा सामान, जानिए कैसे करेगा काम?

Israel Mundra Port: लाल सागर में हूती विद्रोही लगातार व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं और इस बीच इजराइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने इजराइल के व्यापार के लिए नये व्यापारिक मार्ग की घोषणा की है और इसके लिए उन्होंने भारत के मुंद्रा बंदरगाह को वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग के लिए चुना है।

यानि, अब गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से इजराइल अपना कारोबार करेगा। आइये जानते हैं, कि यह व्यापारिक मार्ग कैसे काम करेगा, इससे क्या-क्या फायदे होंगे और इसके क्या नुकसान होने वाले हैं?

israel Mundra port

लाल सागर को क्यों छोड़ रहा इजराइल?

यमन के हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान का समर्थन हासिल है, वो लगातार हमास के साथ एकजुटता दिखाते हुए लाल सागर में इजराइल और उससे संबंधित जहाजों पर हमले कर रहे हैं। इससे वैश्विक व्यापार को काफी नुकसान पहुंचा है। वैश्विक व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा लाल सागर होते हुए गुजरता है, लिहाजा ये काफी ज्यादा अहम व्यापारिक मार्ग रहा है।

लाल सागर, स्वेज नहर के माध्यम से हिंद महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। लिहाजा, हूती विद्रोहियों के हमले से बचने के लिए अब जहाज अफ्रीका के दक्षिण में जा रहे हैं और केप ऑफ गुड होप को पार कर रहे हैं। लेकिन, इस नये रास्ते में ना सिर्फ काफी ज्यादा समय लगता है, बल्कि काफी पैसे भी खर्च होते हैं, जिससे सामानों की कीमत में भारी इजाफा हो रहा है।

पिछले हफ्ते साइन किए गये नये समझौतों के मुताबिक, अब जहाज कंपनियां को ये अधिकार हासिल हुआ है, कि वो लाल सागर के व्यापारिक मार्ग को चुनने से इनकार कर सकते हैं, जो इजराइल के लिए बड़ा झटका है।

israel Mundra port

समुद्र का नया व्यापारिक मार्ग क्या होगा?

नये व्यापारिक समझौतों के बाद अब इजराइल, लाल सागर को दरकिनार कर व्यापार करने के नये तरीकों की तलाश कर रहा है। 13 फरवरी को इजराइल की परिवहन मंत्री रेगेव ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह मुंद्रा बंदरगाह पर खड़ी नजर आ रही हैं और नए ट्रेड रूट के बारे में बता रही हैं।

गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह का रास्ता, संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह होते हुए दुबई के जेबेल अली बंदरगाह, और फिर सऊदी अरब और जॉर्डन के माध्यम से जमीन के रास्ते से गुजरते हुए इजराइल तक जाता है। यानि, इस रास्ते का इस्तेमाल करने पर इजराइल को जमीनी रास्ते का इस्तेमाल करना होगा और सामान सऊदी अरब से ट्रकों में ले जाना होगा।

इजरायली और अरब मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, इन ट्रकों को दो शिपिंग कंपनियों, इजरायल की ट्रकनेट और यूएई की प्योरट्रांस द्वारा संचालित किया जाएगा।

इजराइल की मंत्री ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें वो कह रही हैं, कि "अब हम मुंद्रा के बंदरगाह पर हैं, जो उत्तर में भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है, जहां से माल निकलता है... इन सभी कंटेनरों को संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात किया जाता है, और संयुक्त अरब अमीरात से जमीन के रास्ते इजराइल को निर्यात किया जाता है।"

उन्होंने आगे कहा, कि "युद्ध ने हमारे सामने चुनौतियां खड़ी कर दीं हैं, सबसे बड़ी चुनौती यह थी, कि हम इजराइल में सामान कैसे लाएं? क्योंकि इजराइल एक तटीय राज्य है और अधिकांश सामान समुद्र के रास्ते आते हैं... और अब सामान, मुंद्रा पोर्ट से समुद्र के रास्ते बंदरगाहों तक जाएगा, और फिर इसे सऊदी अरब और जॉर्डन से होते हुए इजराइल तक ट्रकों या ट्रेनों में लाद कर ले जाया जाएगा।"

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है, कि इसी तरह के ट्रेड रूट का इस्तेमाल 'इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर' (IMEC) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है, लेकिन इसका अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है और गाजा युद्ध की वजह से फिलहाल इस रूट पर बात रूकी हुई है।

israel Mundra port

नए रूट के फायदे और नुकसान क्या हैं?

गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के बारे में विचार अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले कुछ समय से इस पर काम चल रहा था। लंदन स्थित अरब समाचार आउटलेट अल-अरबी अल-जदीद ने आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ नेहाद इस्माइल के हवाले से कहा है, कि भूमि गलियारा पहली बार अब्राहम समझौते के समय प्रस्तावित किया गया था (इसराइल और कुछ अरब राज्यों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के मकसद से साल 2020 में अब्राहम समझौता किया गया था)

भूमि मार्ग से इजराइल के लिए यात्रा के समय और लागत में काफी कमी आएगी, और परिवहन शुल्क को लेकर सऊदी अरब और जॉर्डन के लिए राजस्व उत्पन्न होगा।

लेकिन, सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि ट्रक एक जहाज की तुलना में काफी कम माल ले जा सकते हैं, और उस सीमा तक, व्यापार सीमित होगा। साथ ही, मध्य पूर्व में तेजी से उतार-चढ़ाव वाली स्थिति में, यह मार्ग इजराइल पर दोनों देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने पर निर्भर करता है।

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