इजराइल-हिज्बुल्लाह में कभी भी हो सकती है जंग, अगर छिड़ी लड़ाई, तो क्या होगा अंजाम? क्या बच पाएगा लेबनान?
Israel-Hezbollah conflict: इजराइल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स में एक घातक रॉकेट हमले ने इस आशंका को और बढ़ा दिया है, कि इजराइल और ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिज्बुल्लाह के बीच एक भीषण युद्ध छिड़ सकता है।
हालांकि, इजराइल और हिज्बुल्लाह, दोनों ही इस बात के संकेत दे चुके हैं, कि वो किसी युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन दोनों ने ये भी कहा है, कि वो युद्ध के लिए तैयार हैं।

इजराइल ने रविवार को कहा है, कि वह हिज्बुल्लाह पर कड़ा प्रहार करेगा, और उसने हिज्बुल्लाह पर इजराइल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स में एक फुटबॉल मैदान पर रॉकेट हमले में 12 बच्चों और किशोरों को मारने का आरोप लगाया है। हालांकि, हिज्बुल्लाह ने मजदल शम्स पर हुए हमले की किसी भी जिम्मेदारी से इनकार किया है, लेकिन इजराइल या इजराइल के कब्जे वाले किसी भी क्षेत्र में 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर हमास के हमले के बाद ये सबसे घातक हमला है।
लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच दुश्मनी क्या है और अगर युद्ध छिड़ता है, तो इसके क्या अंजाम हो सकते हैं?

इजराइल और हिज्बुल्लाह में तनाव क्यों है?
हिज्बुल्लाह, इजराइल के पड़ोसी देश लेबनान में स्थिति एक आतंकवादी संगठन है और इसने 8 अक्टूबर को इजराइल के ऊपर गोलाबारी शुरू की थी। इससे ठीक एक दिन पहले ही हमास ने दक्षिणी इजराइल पर भयानक हमला किया था और 1200 से ज्यादा लोगों को मार डाला था, जिसने गाजा युद्ध को जन्म दिया था।
हमास के सहयोगी हिज्बुल्लाह का कहना, है कि उसके हमलों का मकसद गाजा में इजरायली बमबारी के तहत फिलिस्तीनियों का समर्थन करना है।
गाजा युद्ध ने पूरे क्षेत्र में ईरान समर्थित आतंकवादियों को इजराइल के खिलाफ कर दिया है। हिज्बुल्लाह को व्यापक रूप से ईरान समर्थित नेटवर्क का सबसे शक्तिशाली सदस्य माना जाता है, जिसे प्रतिरोध की धुरी के रूप में जाना जाता है। हिज्बुल्लाह ने बार-बार कहा है, कि जब तक गाजा में युद्धविराम लागू नहीं होता, तब तक वह इजराइल पर अपने हमलों को नहीं रोकेगा।
इजराइल और हिज्बुल्लाह ने कई युद्ध लड़े हैं और इनके बीच आखिरी युद्ध 2006 में लड़ा गया था।
इजराइल लंबे समय से हिज्बुल्लाह को अपनी सीमाओं पर सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है और इसके बढ़ते शस्त्रागार और सीरिया में इसके पैर जमाने से इजराइल काफी टेंशन में रहता है।
हिज्बुल्लाह की विचारधारा मुख्य रूप से इजराइल विरोधी है और इसकी स्थापना 1982 में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इजराइली सेना से लड़ने के लिए की थी, जिसने उस साल लेबनान पर आक्रमण किया था और कई वर्षों तक गुरिल्ला युद्ध लड़ा था, जिसकी वजह से इजराइल को 2000 में दक्षिणी लेबनान से हटना पड़ा था।
हिज्बुल्लाह, इजराइल को फिलीस्तीन की जमीन पर बना एक अवैध राज्य मानता है और इसका मकसद इजराइल को पूरी तरह से खत्म करना है।

हिज्बुल्लाह-इजराइल संघर्ष का असर क्या हुआ है?
मौजूदा संघर्ष ने दोनों पक्षों को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है। सीमा के दोनों ओर हजारों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हो गए हैं। इजराइली हवाई हमलों ने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के ऑपरेशन वाले क्षेत्रों पर बमबारी की है और सीरियाई सीमा के पास बेका घाटी पर हमला किया है। इजराइल ने कभी-कभी अन्य जगहों पर भी हमला किया है, जिसमें 2 जनवरी को बेरूत में हमास के एक वरिष्ठ कमांडर की हत्या शामिल है।
अलग अलग रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि इजराइली हमलों में अभी तक 350 से ज्यादा हिज्बुल्लाह के लड़ाके और 100 से ज्यादा लेबनानी नागरिक मारे गये हैं, जिनमें डॉक्टर, बच्चे और पत्रकार शामिल हैं।
इजराइली सेना ने शनिवार के हमले के बाद कहा है, कि अक्टूबर से हिज्बुल्लाह के हमलों में मारे गए नागरिकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जिसमें कम से कम 17 सैनिक शामिल हैं। हिज्बुल्लाह ने शनिवार के हमले के लिए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
वहीं, इजराइल में इतने सारे इजराइलियों का विस्थापन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अधिकारियों को उम्मीद थी, 1 सितंबर से इजराइली छात्र स्कूल जा पाएंगे, लेकिन गतिरोध जारी रहने की वजह से ऐसा होना असंभव लग रहा है।

इजराइल-हमास संघर्ष कितना खतरनाक हो सकता है?
अगर इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष छिड़ता है, तो ये विनाशकारी हो सकता है और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिसंबर में चेतावनी दी थी, कि अगर हिज्बुल्लाह ने पूरी तरह से युद्ध शुरू किया तो बेरूत को "गाजा" में बदल दिया जाएगा।
हिज्बुल्लाह ने पहले संकेत दिया था, कि वह संघर्ष को व्यापक नहीं बनाना चाहता है, लेकिन उसने यह भी कहा है, कि वह अपने ऊपर थोपे गए किसी भी युद्ध से लड़ने के लिए तैयार है और उसने चेतावनी दी है, कि उसने अब तक अपनी क्षमताओं का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल किया है।
संघर्ष भड़कने का नतीजा इजराइल में भारी संख्या में विस्थापन का होगा, यानि भारी संख्या में उन इजराइलियों को अपने घरों से सुरक्षित क्षेत्र में जाना होगा, जिनकी सीमा लेबनान से लगती है। लेकिन, इसमें कोई शक नहीं है, कि फिर इजराइल, लेबनान को भी मलबों में बदल देगा।
2006 में, इजराइली हमलों ने बेरूत के हिज्बुल्लाह-नियंत्रित दक्षिणी उपनगरों को पूरी तरह से समतल कर दिया था, बेरूत हवाई अड्डे को नष्ट कर दिया था और इस दौरान 10 लाख से ज्यादा लेबनानी को अपने घरों से भागना पड़ा था। इजराइल में, इसका असर यह हुआ, कि 300,000 लोग हिज्बुल्लाह के रॉकेटों से बचने के लिए अपने घरों से भाग गए और करीब 2,000 घर नष्ट हो गए।

हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमता कितनी है?
हिज्बुल्लाह के पास 2006 की तुलना में अब काफी ज्याद हथियारों का भंडार हो चुका है, जिनमें रॉकेट और मिसाइलों की भरमार है। हिज्बुल्लाह दावा करता है, कि उसके रॉकेट इजराइल के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकते हैं। इसने अक्टूबर से अपने हथियारों में लगातार डेवलपमेंट का प्रदर्शन किया है और इजराइली ड्रोन को मार गिराया है। इसके अलावा, इसने इजराइल में गाइडेड मिसाइल भी लॉन्च किए हैं।
इजराइल ने लेबनान पर कई बार हमला किया है और 1982 के आक्रमण में वे बेरूत तक पहुंच गए थे, जिसका मकसद लेबनान स्थित फिलिस्तीनी गुरिल्लाओं को कुचलना था।
क्या ये तनाव टल सकता है?
यह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा, कि गाजा में क्या होता है, जहां युद्ध विराम और इजराइली बंधकों की वापसी पर सहमति बनाने के अभी तक की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। वहां युद्ध विराम, दक्षिणी लेबनान में तनाव को तेजी से कम करने में मदद कर सकता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका, जो हिज्बुल्लाह को एक आतंकवादी समूह मानता है, वो संघर्ष को कम करने के मकसद से डिप्लोमेटिक कोशिशें कर रहा है। हिज्बुल्लाह ने लेबनान को लाभ पहुंचाने वाले समझौते के लिए खुला होने का संकेत दिया है, लेकिन उसने ये भी कहा है, कि जब तक इजराइल गाजा पर आक्रमण बंद नहीं कर देता, तब तक कोई चर्चा नहीं हो सकती।
ईरान के दरवाजे पर USA ने तैनात किया एयरक्राफ्ट कैरियर
दूसरी तरफ, इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने रणनीतिक रूप से फारस की खाड़ी में ईरान के दरवाजे के बाद एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है।
अमेरिका का थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG) वर्तमान में इस क्षेत्र में काम कर रहा है। विमानवाहक पोत थियोडोर रूजवेल्ट और तीन आर्ले बर्क-क्लास विध्वंसक जहाजों से युक्त CSG की फारस की खाड़ी में तैनाती की पुष्टि की गई है।
28 जुलाई को सैटेलाइट इमेज से पता चला है, कि कैरियर स्ट्राइक ग्रुप नाइन (CSG-9) और उसका प्रमुख जहाज, USS थियोडोर रूजवेल्ट (CVN 71), बहरीन के मनामा से 140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तैनात थे। थियोडोर रूजवेल्ट CSG इंडो-पैसिफिक से आगे बढ़ा और 12 जुलाई को ऑपरेशन के यूएस 5वें बेड़े के क्षेत्र में प्रवेश किया।
यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट (CVN 71), जिसका उपनाम "द बिग स्टिक" है, उसके पास एक निमित्ज़ क्लास का कैरियर, यूएसएस ड्वाइट डी. आइजनहावर (सीवीएन-69) है। कई ओपन-सोर्स खुफिया जानकारियों ने भी फारस की खाड़ी में संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जरूरत होती है, तो रूजवेल्ट पर कैरियर एयर विंग 11 के फाइटर जेट, जिनमें VFA-25 "फिस्ट ऑफ द फ्लीट" से F/A-18E "सुपर हॉर्नेट" मल्टीरोल स्ट्राइक विमान शामिल हैं, वो लेबनान, जॉर्डन, सीरिया और इराक में ऑपरेशन में सहायता कर सकते हैं।
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