'देश नहीं कुर्सी बचाने के लिए किया सौदा', इजरायल-हमास सीजफायर को लेकर नेतन्याहू पर किसने किया तीखा वार?
Israel Hamas Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के पहले चरण पर हुए समझौते की घोषणा के बाद, जहां एक ओर इजरायल की सड़कों पर खुशी के आंसू थे, वहीं देश के प्रमुख मीडिया गलियारों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सबसे बड़ा राजनीतिक हमला शुरू हो गया।
इजरायली मीडिया ने इस डील को नेतन्याहू के कमजोर होते राजनीतिक अस्तित्व को बचाने का एक हथकंडा बताया, न कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जीत। नेतन्याहू गुरुवार को इस युद्धविराम समझौते को मंजूरी देने के लिए सरकार की बैठक बुलाने वाले हैं, जिसके बाद IDF (इजरायल रक्षा बल) गाजा से वापसी की तैयारी करेगा।

इजरायल के लिबरल खेमे का तीखा वार
इजरायल के उदारवादी (Liberal) खेमे के एडिटर और एनालिस्ट ने नेतन्याहू की मंशा और युद्ध के अंतिम परिणाम पर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया ने साफ लिखा कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए 'रेड लाइन्स' (Red Lines) को पार कर सकते हैं:
- राजनीतिक अस्तित्व पर वार: मीडिया ने स्पष्ट कहा कि इजरायल के कमजोर पड़े लिबरल खेमे को अब यह मान लेना चाहिए कि 'नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए रेड लाइन्स को पार करेंगे।' यह कमेंट सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर लगाने का आरोप है।
- अस्तित्व पर खतरा: एक कमेंट ने तो राष्ट्रीय अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया, जिसमें कहा गया कि: 'अगर 1948 एक आज़ादी का युद्ध था, तो मौजूदा युद्ध वह हो सकता है जो इजरायल को खत्म कर दे।'
- चरमपंथी नियुक्तियां: नेतन्याहू के राजनीतिक निर्णयों पर आलोचना करते हुए एक आर्टिकल में कहा गया कि 'इजरायल ने हायर पोजीशन पर चरमपंथियों (Extremists) को देखा है। लेकिन नेतन्याहू द्वारा शिन बेट (Shin Bet) के लिए किए गए चयन जैसा कुछ नहीं।'
दोहरी खुशी और त्रासदी का भाव
राजनीतिक आलोचना के बावजूद, बंधकों की रिहाई की खबर ने पीड़ितों के परिवारों को फिर से मुस्कराने का मौका दिया।
मीडिया ने इन भावनाओं को भी प्रमुखता दी:
- परिवारों में खुशी: बंधकों के माता-पिता ने जश्न मनाते हुए कहा, 'हमारा परिवार अंततः पूरा हो जाएगा।'
- गाजा में राहत: वहीं, गाजा के फिलिस्तीनियों ने भी संघर्ष विराम समझौते का जश्न मनाया और कहा कि 'हम घर वापस जाएंगे, अपने जीवन को फिर से शुरू करेंगे।'
हालांकि, इजरायली मीडिया द्वारा की गई आलोचना ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्धविराम की खबर क्षणिक खुशी दे सकती है, लेकिन नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य और इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा अभी भी संदेह के घेरे में है।












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