रेगिस्तान में मशरूम चुन रहे 31 लोगों को इस्लामिक स्टेट ने उतारा मौत के घाट, सीरिया में ISIS का खूनी खेल

सीरिया के शहरों से इस्लामिक स्टेट के वर्चस्व को खत्म किया जा सका है, लेकिन रेगिस्तानी इलाकों से अकसर वो छिपकर आंम नागरिकों और सीरिया की सेना को निशाना बनाते हैं।

Islamic State

Islamic State attack on Syria truffle hunters: सीरिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने एक बार फिर से खूनी खेल खेला है और रेगिस्तान में मशरूम चुनने वाले 31 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने रविवार को इस हिंसक वारदात को अंजाम दिया है।

एक निगरानीकर्ता ने कहा है, कि सीरिया में संदिग्ध इस्लामिक स्टेट समूह के लड़ाकों ने रविवार को कम से कम 31 लोगों को मशरूम के लिए मार डाला है। सीरिया, जो कई सालों से युद्धग्रस्त रहा है, वहां इस्लामिक स्टेट का ये सबसे ताजा हमला है।

ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी एक अलग घटना में इस्लामिक स्टेट के जिहादियों द्वारा चार चरवाहों की हत्या और दो अन्य के अपहरण की सूचना दी है।

ऑब्जर्वेटरी ने एक नया आंकड़ा देते हुए कहा है, कि "12 सरकार समर्थक लड़ाकों सहित कुल 31 लोग हमा के पूर्व (मध्य शहर) के रेगिस्तान में ट्रफल्स इकट्ठा करते समय मारे गए हैं।"

इस्लामिक स्टेट का आतंक

इससे पहले इसने कम से कम 26 लोगों की मौत की सूचना दी गई थी, जिसकी आधिकारिक सीरियाई समाचार एजेंसी सना द्वारा पुष्टि की गई थी। वहीं, अब 31 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है।

सीरिया में पिछले 12 सालों से युद्ध चल रहा है और देश की आर्थिक स्थिति डूब चुकी है। लिहाजा, लोग रेगिस्तान में ट्रफल्स (जमीन के नीचे उगने वाला मशरूम की तरह की सब्जी) की खोज करते हैं। सीरिया में ट्रफल्स काफी ऊंची कीमत पर बिकती है।

अधिकारी अक्सर उच्च जोखिम वाले अभ्यास के खिलाफ चेतावनी देते हैं। लेकिन हर साल फरवरी और अप्रैल के बीच, सैकड़ों गरीब सीरियाई विशाल सीरियाई रेगिस्तान, या बादिया में ट्रफल्स की तलाश करते हैं - जिहादियों के लिए एक ज्ञात ठिकाना जो बारूदी सुरंगों से अटा पड़ा है।

ट्रफल्स, सीरिया के सुनसान रेगिस्तानी इलाके में पाए जाते हैं और लोग बालू के अंदर से इसे निकालते हैं। ये आलू की तरह दिखता है।

सीरिया के अधिकारी अकसर ट्रफल्स को रेगिस्तान से निकालने को लेकर चेतावनी देते रहते हैं, क्योंकि इन इलाकों में ISIS का वर्चस्व है। लेकिन हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच, सैकड़ों गरीब सीरियाई विशाल सीरियाई रेगिस्तान, या बादिया में ट्रफ़ल्स की तलाश करते हैं।

इस क्षेत्र में जगह जगह पर ISIS के आतंकी बारूदी सुरंग भी बनाकर रखे हुए हैं और वो अकसर गरीब लोगों को मौत की घाट उतार देते हैं।

ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक, फरवरी से अब तक 230 से ज्यादा लोग, जिनमें ज्यादातर नागरिक हैं, वो ISIS के हमलों में या बारूदी सुरंग के विस्फोट में मारे गये हैं।

पिछले महीने ISIS आतंकियों ने ट्रफल्स की तलाश में रेगिस्तान में गये 15 लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।

जोखिम भरा काम, गरीबों को मिलता है कम दाम

सीरिया पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है, कि फरवरी में मोटरसाइकिल पर सवार आईएस लड़ाकों ने ट्रफल की तलाश करने वाले लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं थीं और कम से कम 68 लोगों को मार डाला था।

सीरियाई रेगिस्तान दुनिया में कुछ बेहतरीन गुणवत्ता वाले ट्रफल्स के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

सीरियाई ट्रफल्स की कीमत करीब 2000 रुपये किलो तक होती है, लेकिन इसे चुनने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले गरीब सीरियाई लोगों को काफी कम पैसा मिलता है। ज्यादातर पैसा बिचौलिए खा जाते हैं।

ऑब्जर्वेटरी ने कहा, कि रविवार को भी आईएस के जिहादियों ने स्वचालित राइफलों और मोटरबाइकों पर सवार होकर दीर एजोर के पूर्वी क्षेत्र में चरवाहों के एक समूह पर हमला किया था। युद्ध पर नजर रखने वालों ने कहा, कि भागने से पहले लड़ाकों ने भेड़ों को चुरा लिया और दो चरवाहों का भी अपहरण कर लिया।

सीरिया में अभी भी सक्रिय ISIS

मार्च 2019 में, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित एक सैन्य अभियान के बाद आईएस ने सीरिया में अपना आखिरी क्षेत्र खो दिया है, लेकिन इस्लामिक जिहादियों ने रेगिस्तानी इलाकों में अपना गढ़ बना लिया है।

रेगिस्तानी क्षेत्रों से ये छिपकर आम लोगों और सीरियाई सैनिकों पर हमला करते हैं।

उन्होंने ऐसे ठिकाने का इस्तेमाल नागरिकों, कुर्द के नेतृत्व वाली सेना, सीरियाई सरकारी सैनिकों और ईरानी समर्थक लड़ाकों पर घात लगाकर हमला करने के लिए किया है। यहां से पड़ोसी देश इराक में हमले भी किए गये हैं।

आपको बता दें, कि सीरिया में साल 2011 में सरकार के खिलाफ भीषण प्रदर्शन शुरू हुआ था, जिसे सरकार ने बेरहमी से दमन किया। जिसकी वजह से सीरिया में कम से कम 5 लाख लोग मारे गये और लाखों लोग विस्थापित हुए।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है, सीरिया में सेना और ISIS ने अलग अलग जगहों पर विस्फोटक बिछा रखे हैं, जिनकी चपेट में आकर ज्यादातर आम लोग ही मारे जाते हैं।

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    संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 के बाद से, बारूदी सुरंगों और अन्य विस्फोटों में सीरिया में हर दिन औसतन पांच लोग मारे गए या घायल हुए हैं।

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