इस्कॉन बांग्लादेश ने चिन्मय कृष्ण दास से किया किनारा, कहा-हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं
बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ देशद्रोह का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसके बाद इस पूरे मसले को लेकर हंगामा हो रहा है। इस बीच बांग्लादेश इस्कॉन ने अपने आपको इस पूरे विवाद से अलग कर लिया है। इस्कॉन बांग्लादेश ने कहा कि चिन्मय दास अब उनके संगठन से नहीं जुड़े हैं। वह इस्कॉन की प्रथाओं और मूल्यों को नहीं दर्शाते हैं।
इस्कॉन बांग्लादेश के महासचिव चारु चंद्र दास ब्रह्मचारी ने घोषणा की कि चिन्मय कृष्ण दास को अनुशासनहीनता के चलते उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही लीलाराज गौर दास और गौरांग दास को भी उनके पद से हटा दिया गया है।

चारू चंद्र ने कहा कि कुछ महीनों पहले प्रवर्तक श्रीकृष्ण मंदिर के मुखिया लीलाराज गौड़ दास, गौरांग दास, चिन्मय कृष्ण दास जोकि श्री श्री पुंडरीक मंदिर के मुखिया थे, उन्हें संगठन के सभी पदों से हटा दिया गया था।
अनुशासनहीनता के चलते उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई थी। हमने स्पष्ट तौर पर कहा था कि उनके गतिविधियों का इस्कॉन से कोई लेना देना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि एडवोकेट सैफुल इस्लाम अलिफ की मौत से इस्कॉन का कोई संबंध नहीं है।
चिन्मय कृष्ण दास को इस महीने की शुरुआत में गिरफ़्तार कर लिया गया था। उन पर अक्टूबर में एक रैली के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा लगाने का आरोप लगाया है। जो बांग्लादेश ध्वज नियम 1972 के विरुद्ध था। यह गिरफ़्तारी मोहम्मद फिरोज खान द्वारा दर्ज कराए गए एक मामले के बाद हुई, जिससे इस्कॉन और उसके सहयोगियों की जांच और तेज़ हो गई।
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी पर भारत की प्रतिक्रिया बहुत ही त्वरित और स्पष्ट थी। भारत ने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी और उन्हें ज़मानत न दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर हमलों के व्यापक मुद्दे पर प्रकाश डाला गया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया और एक शांतिपूर्ण धार्मिक नेता के साथ व्यवहार और अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ हिंसा की निंदा की।












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