इस्लाम कबूल कराकर गला काट देते हैं आईएसआईएस आतंकी

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इराक। इराक में आईएसआईएस सिर्फ शिया मुस्लिमों के ऊपर ही कहर नहीं बरपा रहे, बल्कि ईसाइयों के प्रति उनका रवैया और भी क्रूरता से भरा है।

कुछ ही महीनों में आईएसआईएस आतंकियों ने इराक और सीरिया के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है। उत्तरी इराक में इस्लामी चरमपंथियों के काराकोश शहर पर कब्जे की खबर है। यह इस इलाके में सबसे बड़ा ईसाई शहर है। काराकोश मोसुल से 30 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में है और यहां लगभग 50,000 ईसाई रहते हैं। लिहाजा, ईसाइयों के साथ आतंकी बर्बरता पूर्ण व्यवहार करने से बाज नहीं आ रहे।

आईएसआईएस कर रहे हैं जनसंहार

खबर यहां तक है कि आतंकी पहले ईसाइयों को अपना धर्म परिवर्तन करने के लिए बाध्य कर रहे हैं और फिर सिर काटकर उनकी हत्या कर दी जा रही है। इतना ही नहीं, आंतकियों ने सारे कटे हुए सिरों को एक पोल में भी लटका रखा है। आतंकियों के इस जनसंहार की कड़ी निंदा की जा रही है। चरमपंथी घर घर जाकर ईसाइयों को ढ़ूंढ़ रहे हैं। जिससे की उन्हें छिपे हुए ईसाइयों की भी खबर मिल जाए। वहीं, ये चर्चों को भी तोड़ रहे हैं और उनकी धार्मिक किताबों को भी जला दिया जा रहा है।

कई ईसाई इस खौफ से शहर छोड़ कर भागने को मजबूर हैं। कुछ ही दिनों पहले फ्रांस ने इराकी ईसाइयों को पनाह देने की बात कही है। जिससे घर छोड़कर गए ईसाई फ्रांस में शरण ले सकते हैं।

ईसाइयों की मदद के लिए कोई नहीं

वहीं, सभी ईसाई इराक समेत अन्य देशों और मीडिया से इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि इस खबर को उतनी तवज्जो नहीं दी जा रही, जितनी इसे मिलनी चाहिए। नतीजतन कोई ईसाइयों की मदद के लिए सामने नहीं आ रहा। इसी बात पर इराक में रह रहे एक अधिकारी ने कहा कि यहां एक दिन में दो हजार से ज्यादा ईसाइयों को मार दिया जा रहा है, लेकिन कोई यहां खबर तक लेने को नहीं है। जबकि गाजा और इजरायल की खबर को पूरी दुनिया में मुख्य मुद्दा बना दिया गया है।

इस्लाम कबूल करा, सिर कलम करते हैं

आईएसआईएस द्वारा वायरल किए गए एक वीडियो में भी यह वाकया दिखाया गया है। वीडियो में एक ईसाई को जबरदस्ती घुटनों के बल बैठाया जाता है। उसे घेर कर चारों ओर आईएसआईएस के आतंकी खड़े हैं और वे बंदूक की नोक पर उससे इस्लाम धर्म कबूल करवाते हैं। वहीं उसके साथ ही गला काटकर उसकी हत्या कर देते हैं। इस क्षेत्र में आतंकी अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर भी हमला कर रहे हैं।

इराक में दुनिया के सबसे पुराने ईसाई समुदाय रहते हैं। 2003 में इराक पर अमरिकी के बाद से यहां सांप्रदासिक हिंसा में बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से ईसाइयों की संख्या कम हुई है।

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