ISI का वो चीफ, जिसने कहा था, अमेरिका को अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में हराएंगे...मिशन पूरा

हामिद गुल....जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया थे, उन्हें भारत का कट्टर दुश्मन माना जाता था, उन्हें भारत में आतंकियों को भेजने का प्रमुख माना जाता है।

काबुल/इस्लामाबाद, अगस्त 17: अफगानिस्तान में अमेरिका हार चुका है। तालिबान जीत चुका है और काबुल में 20 सालों के बाद एक बार फिर से तालिबान का झंडा फहरा रहा है। अमेरिका आधिकारिक तौर पर अब कबूल कर चुका है कि वो अफगानिस्तान में नाकाम रहा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं अफगानिस्तान में अमेरिका की हार की पटकथा आज नहीं, बल्कि कई साल पहले लिखी गई थी और उस पटकथा को लिखने वाला कोई और नहीं, बल्कि 'फादर ऑफ तालिबान' था, जो भारत का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता था। उस शख्स ने आज से कई सालों पहले अमेरिका को ऐसी चाल में फंसाया, जिसका अंजाम शिकस्त था और आज पाकिस्तान का सपना अमेरिका को हराने का पूरा हो गया। आईये जानते हैं उस शख्स के बारे में, जिसने अमेरिका को अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में बुरी तरह पराजित कर दिया।

3 दशक पहले रूस पराजित

3 दशक पहले रूस पराजित

अफगानिस्तान की धरती शक्तिशाली देशों के लिए अखाड़े की तरह बन गया था, जहां विश्व की महाशक्तियां अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का प्ले-ग्राउंड मानने लगी थी। करीब 30 साल पहले जब सोवियत संघ रूस अफगानिस्तान से हारकर जा रहा था, उससे पहले सोवियत संघ ने कहा था कि वो अफगानिस्तान फतह करके रहेगा। लेकिन, अंत में रूस भी अमेरिका की ही तरह अपने हथियार छोड़कर चला गया। रूस की हार के पीछे जो संगठन था, उसका नाम था तालिबान। तालिबान को अमेरिका ने बनाया था, पाकिस्तान की मदद से। तालिबान को अमेरिका का संपूर्ण समर्थन हासिल था। सिर्फ अमेरिका ही क्यों, ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देश भी तालिबान को समर्थन दे रहे थे। जिम्मेदारी पाकिस्तान पर थी तालिबा को मजबूत बनाने की और ये जिम्मेदारी निभा रहा था उस वक्त का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का चीफ....हामिद गुल, यानि गॉडफादर ऑफ तालिबान।

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    तालिबान का निर्माण

    तालिबान का निर्माण

    हामिद गुल....जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया थे, उन्हें भारत का कट्टर दुश्मन माना जाता था और उन्होंने रिटायर्ड होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू के दौरान दावा किया था, कि उन्होंने अमेरिका को अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में हराने का प्लान बनाया था और अब जब अमेरिका हार चुका है, तब हामिद गुल का वीडियो एक बार फिर से वायरल हो रहा है। अमेरिका का बस एक मकसद था, किसी भी तरह से सोवियत संघ रूस को अफगानिस्तान से बाहर करना। और इसके लिए उसने तालिबान के निर्माण की जिम्मेदारी पाकिस्तान को दी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मजहबी नेताओं और मौलानाओं को अफगानिस्तान में भेजना शुरू कर दिया। पाकिस्तान की आर्मी ने मुजाहिदीन को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। अमेरिका का पूर्ण समर्थन मुजाहिदीनों को प्राप्त था, लिहाजा हथियारों की कोई कमी नहीं थी। और इन्हीं मुजाहिदीनों में एक शख्स था मुल्ला उमर, जो अफगानिस्तान के पश्तून आदिवासी समुदाय का रहने वाला था और उसी ने तालिबान की स्थापना की।

    अफगानिस्तान में तालिबान का राज

    अफगानिस्तान में तालिबान का राज

    तालिबान को पाकिस्तान की तरफ से भरपूर मदद मिलने लगी और तालिबान ने तेजी से अफगानिस्तान में अपना विकास करना शुरू कर दिया। गरीबी और बेरोजगारी के शिकार अफगानिस्तान के नौजवान भारी संख्या में तालिबान में शामिल होने लगे। अमेरिका की तरफ से बार बार भड़काया जाता था कि रूस अफगानिस्तान में इस्लाम को खत्म करना चाहता है, लिहाजा जिन हाथों में कोई काम नहीं था, उन हाथों ने हथियार थाम लिए। देखते ही देखते तालिबान एक खतरनाक मुजाहिदीन संगठन बन गया, जिसका एक ही मकसद था, अफगानिस्तान में मुस्लिम अमीरात शासन की स्थापना करना। तालिबान ने अफगानिस्तान के प्रांतों को जीतना शुरू किया और सिर्फ 4 सालों में ही तालिबान का शासन काबुल पर स्थापित हो गया। 1996 में अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार काबिज हो गई, जिसे अमेरिका का समर्थन हासिल था।

    तालिबान को हामिद गुल का समर्थन

    तालिबान को हामिद गुल का समर्थन

    पाकिस्तान को अमेरिका से तालिबान को ट्रेनिंग देने के लिए पैसे मिल रहे और उन पैसों से आईएसआई चीफ हामिद गुल अफगानिस्तान में बंदूक और कट्टरपंथ की खेती करने के साथ-साथ कश्मीर को भी अशांत करने में लग गये। हामिद गुल 1987 से 1989 तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ थे और हाफिज सईद और अब्दुल करीम टुंडा जैसे आतंकियों को भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, हामिद गुल को अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसी सीआईए के साथ काम करने का अनुभव था, लिहाजा वो काफी खतरनाक तरीके से मजहबी जहर गरीब युवाओं के दिमाग में भर रहे थे। हामिद गुल भारत के लिए कितना खतरनाक था, इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि एक बार उन्होंने यहां तक कहा था कि दिल्ली और मुंबई को हिरोशिमा और नाकासाकी बना दिया जाएगा।

    अमेरिका को हराने का ऐलान

    2014 में पाकिस्तान के टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान हामिद गुल ने ऐलान किया था कि अफगानिस्तान में अमेरिका को अमेरिका की मदद से पाकिस्तान हराएगा और आज पाकिस्तानी कह रहे हैं कि उनका सपना पूरा हो गया है। पाकिस्तान में आज हामिद गुल का वीडियो काफी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है कि लोग जश्न मना रहे हैं। कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिका को धूल चटा दी है। तालिबान को बनाना अमेरिका की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक गलती है, जिसकी भरपाई अफगानिस्तान की लाखों लोगों को अपनी जान देकर करनी पड़ी है। 20 सालों तक अमेरिका तालिबान को हराने के लिए अफगानिस्तान में लड़ता रहा, लेकिन अंत में अमेरिकी सेना को बोरिया-बिस्तर बांधकर अफगानिस्तान से भागना पड़ा।

    आईएसआई ने बनायी थी रणनीति

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    डिफेंस एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि तालिबान पूरी तरह से आईएसआई और पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहा है और तालिबान वही कर रहा है, जो उसे पाकिस्तान की तरफ से कहा जाता है। कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स यहां तक कहते हैं कि अफगानिस्तान असल में अब तालिबान के कब्जे में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे में चला गया है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि तालिबान को हर एक कदम की जानकारी पाकिस्तान की तरफ से तैयार करके दी जाती थी और इस बात को अफगानिस्तान सरकार बार बार उठा रही थी, लेकिन अफगानिस्तान सरकार की बातों पर ध्यान नहीं दिया। पिछले महीने, जब अफगानिस्तान की स्थिति काफी ज्यादा खराब हो गई थी, तब भी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर इमरान खान को अफगानिस्तान में अशांति के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

    डबल गेम खेलता आया है पाकिस्तान

    डबल गेम खेलता आया है पाकिस्तान

    दरअसल, पाकिस्तान हमेशा से अमेरिका से पैसे एंठने के लिए अफगानिस्तान को जंग का मैदान बनाए रखना चाहता था। इससे पाकिस्तान को दूसरा फायदा ये होता था कि वो भारत में आतंकवादियों को आसानी से भेज पाता था। पाकिस्तान के ऊपर पहले अमेरिका ने काफी विश्वास किया था और अरबों डॉलर की मदद थी, लेकिन धीरे-धीरे अमेरिका को पाकिस्तान के डबल गेम के बारे में पता चलता गया और फिर अब स्थिति ये हो गई है कि राष्ट्रपति बनने के बाद अभी तक जो बाइडेन ने इमरान खान को फोन तक नहीं किया है। दूसरी तरफ पाकिस्तान अब पूरी तरह से चीन के खेमे में जा चुका है और माना जा रहा है कि बहुत जल्द चीन, पाकिस्तान और रूस तालिबान को मान्यता देने जा रहे हैं। आईएसआई चीफ रहे हामिद गुल के बेटे ने भी पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि तालिबान की मदद से अफगानिस्तान की सरकार को तबाह कर दिया जाएगा और वो बात सही साबित हुई है। लेकिन, पाकिस्तान के इस गेम में लाखों अफगानी नागरिक बेमौत मारे गये हैं और एक बार फिर से भारत में आतंकियों के आने का खतरा बन गया है।

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