हिज्बुल्लाह ने खाई है ईरान के प्रति निष्ठा की शपथ, क्या है घोषणापत्र, विचारधारा, कहां से मिलते हैं हथियार?
Hassan Nasrallah Killed: इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह के बेरूत हमले में मारे जाने की पुष्टि की है। हालांकि, अभी तक हिज्बुल्लाह ने अभी तक अपने चीफ के मारे जाने पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन इजराइल ने कहा है, कि उसने हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर पर एक एक लाख टन के 80 बम गिराए हैं।
नसरल्लाह का मारा जाना ईरान के लिए बहुत बड़ा झटका है और जैसे-जैसे इजराइल, लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमला करता जा रहा है, मध्य पूर्व में तनाव और भी बढ़ता जा रहा है। वैसे तो मध्य पूर्व में सभी ईरान समर्थित समूह कई समूह हैं, जैसे फिलिस्तीनी हमास, लेबनानी हिज्बुल्लाह और यमनी हूती विद्रोही, लेकिन हिज्बुल्लाह जितना ईरान का करीबी और कोई नहीं है।

हमास, हूती विद्रोही और मध्य पूर्व के अन्य समूहों को ईरान "प्रतिरोध की धुरी" बताकर समर्थन देता है, लेकिन हिज्बुल्लाह जितना खतरनाक कोई नहीं है। हिज्बुल्लाह में ईरान की केंद्रीयता को इस तथ्य से समझा जा सकता है, कि उस समय सीरिया में ईरानी राजदूत अली अकबर मोहतशमी 1982 में हिज्बुल्लाह के सह-संस्थापकों में से एक थे। हमास या हूती विद्रोहियों के विपरीत, हिज्बुल्लाह की विचारधारा ईरानी है।
आइये जानते हैं, कि हिज्बुल्लाह को कहां से फंड मिलते हैं और उसके पास हथियार कहां से आते हैं?
ईरान का वैचारिक तलवार है हिज्बुल्लाह
मध्य पूर्व में ईरान समर्थित प्रमुख समूहों में से, हिज्बुल्लाह दुनिया में सही मायने में ईरान का एकमात्र प्रतिनिधि है - और ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है, क्योंकि ईरान का एक शीर्ष अधिकारी हिजबुल्लाह का सह-संस्थापक है।
हमास और हूतियों जैसे अन्य ईरान समर्थित समूहों की अपनी विचारधाराएं हैं, लेकिन हिज्बुल्लाह औपचारिक रूप से ईरान की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध है। इसने ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति निष्ठा की शपथ ली है, जिनमें पहले रूहोल्लाह खोमेनी थे और फिर अली खामेनेई हैं।
हिज्बुल्लाह के 1985 के घोषणापत्र में कहा गया है, कि "हम 'उम्मा' के बेटे हैं - ईश्वर की पार्टी (हिज़्ब अल्लाह) जिसके अगुआ को अल्लाह ने ईरान में विजयी बनाया।"
'उम्माह' शब्द का इस्तेमाल दुनिया के मुस्लिम समुदाय के लिए किया जाता है। इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे वैश्विक इस्लामवादी समूह और ईरान जैसे शासन, हमेशा 'एक देश' के विचार में विश्वास नहीं करते हैं, बल्कि दुनिया भर में एक बड़े इस्लामी समुदाय में विश्वास करते हैं जिसे 'उम्माह' कहा जाता है।

हिज्बुल्लाह के शपथपत्र में क्या है?
हिज्बुल्लाह के शपथपत्र में लिखा है, कि "हिज्बुल्लाह भी "एक नेता, बुद्धिमान और न्यायप्रिय, हमारे शिक्षक और फकीह (न्यायवादी) के प्रति प्रतिबद्ध है, जो सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करता है: [अयातुल्ला] रूहोल्लाह मुसावी खोमैनी"।
2012 में एक इंटरव्यू में, हिज्बुल्लाह के दूसरे-इन-कमांड नईम कासिम ने कहा था, कि "विलायत-ए-फ़कीह, ईरान में सत्ता पर कब्e करने के लिए खोमैनी द्वारा प्रचलित एक इस्लामवादी विचारधारा, "हिज्बुल्लाह की स्थापना का कारण" थी।
ईरान की तरह ही, हिज्बुल्लाह संयुक्त राज्य अमेरिका को मुख्य दुश्मन मानता है। ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका को 'सबसे बड़ा शैतान' मानता है और इजराइल को मध्य पूर्व में अपना साम्राज्यवादी चौकी मानता है और इजराइल का विनाश करना उसका अंतिम लक्ष्य है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (IRGC) में मध्य पूर्व के विद्वान मुदस्सिर कमर का कहना है, कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की स्थापना के समय से ही यह समूह वैचारिक, नैतिक, वित्तीय और सशस्त्र प्रशिक्षण में केंद्रीय भूमिका में रहा है
IRGC ईरान का अत्यंत प्रभावशाली खुफिया और सशस्त्र बल है, जो नियमित सेना से अलग कार्य करता है और सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है।
हिज्बुल्लाह को कहां से मिलते हैं फंड
हिज्बुल्लाह को ईरान से फंड मिलते हैं और हिज्बुल्लाह ने कमाई के लिए कई और रास्ते भी खोज लिए हैं। 2018 में अमेरिकी सरकार ने कहा था, कि ईरान ने हिज्बुल्लाह को सालाना 700 मिलियन डॉलर का फंड दिया है। इसके अलावा, 2006-09 के दौरान, जब हिज्बुल्लाह ने इजराइल के साथ युद्ध भी लड़ा था, एक अलग अनुमान के अनुसार ईरान ने 1 बिलियन डॉलर का फंड दिया था।
हिज्बुल्लाह अन्य जगहों से भी फंड प्राप्त करता है। 2009 में, रैंड कॉर्पोरेशन ने बताया था, कि हिज्बुल्लाह को लैटिन अमेरिका में अपनी गतिविधियों से 20 मिलियन डॉलर तक मिले थे।
अमेरिकी सरकार के मुताबिक, हिज्बुल्लाह अंतरराष्ट्रीय ड्रग व्यापार में भी शामिल है और इस अवैध व्यापार से पैसा कमाता है। हिज्बुल्लाह का संबंध दक्षिण अमेरिकी ड्रग कार्टेल से है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप को कोकीन जैसी ड्रग्स मुहैया कराते हैं। हिज्बुल्लाह सीरिया, ईरान और रूस के बीच तेल व्यापार का भी हिस्सा है, जो इन राजस्वों का एक प्रमुख स्रोत है। ईरान, क्षेत्र के अन्य समूहों के साथ, इस व्यापार से भी पैसा कमाता है।

ईरान, रूस और उत्तर कोरिया से मिलते हैं हथियार
हिज्बुल्लाह को अक्सर दुनिया का सबसे शक्तिशाली गैर-सरकारी संगठन कहा जाता है।
अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) के एक सार्वजनिक आकलन के अनुसार, हिज्बुल्लाह के पास 150,000 मिसाइलें और रॉकेट और करीब 45,000 लड़ाके हैं, जिनमें से 20,000 पूर्णकालिक कर्मचारी हैं। हालांकि, हिज्बुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह ने दावा किया था, कि समूह के पास 100,000 तक लड़ाके हैं।
हालांकि, हिज्बुल्लाह को ज्यादातर हथियार ईरान से मिलते हैं, लेकिन ऐसे संकेत भी हैं कि रूस ने भी हिज़्बुल्लाह को हथियार मुहैया कराए हैं। समूह के पास सबसे खतरनाक हथियार प्रणालियों में से कुछ रूसी हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, हिज्बुल्लाह के पास रूसी गाइडेड एंटी-टैंक मिसाइल कोर्नेट, रूसी एंटी-शिप मिसाइल याखोंट और रूसी कत्युशा रॉकेट हैं। ईरानी हथियारों के लिए, समाचार एजेंसी ने बताया है, कि हिज़्बुल्लाह राद, फ़ज्र, ज़िलज़ाल और फ़लक 2 रॉकेट और निर्देशित मिसाइल अल-मास का उपयोग करता है।
2021 में, इजराइली थिंक टैंक अल्मा ने बताया था, कि उत्तर कोरिया ने 2006 के इज़राइल-हिज्बुल्लाह युद्ध के बाद हथियारों को छिपाने के लिए सुरंगों का एक नेटवर्क बनाने में भी हिज्बुल्लाह की मदद की।
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 के दशक में, उत्तर कोरिया ने ईरान के माध्यम से हिज्बुल्लाह को हथियार और पुर्जे भी दिए और फिर उन्हें सीरिया में इकट्ठा करके अंत में लेबनान में हिज्बुल्लाह को भेज दिया था।
रूस, अरब जगत से कूटनीतिक समर्थन
रूस और अरब जगत ने कई बार हिज्बुल्लाह को मौन स्वीकृति दी है। रूस ने कह रखा है, कि वह हिज्बुल्लाह या हमास को आतंकवादी संगठन नहीं मानता। लेकिन इस साल की शुरुआत में, अरब लीग ने इजरायल-हमास युद्ध के दौरान हिज्बुल्लाह को आतंकवादी घोषित कर दिया था।
हालांकि अरब लीग ने संकट के समय में हिज्बुल्लाह से संपर्क शुरू करने के लिए इस 'आतंकवादी संगठन' को हटाने का फैसला किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि अरब देश भी हिज्बुल्लाह से परेशान हैं और वो चूंकी इजराइल के साथ नये सिरे से संबंध बना रहे हैं, इसलिए वो हिज्बुल्लाह को खत्म भी देखना चाहते हैं।












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