ईरानः विदेश मंत्री का टेप लीक होने पर मचा हड़कंप
ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ का एक ऑडियो टेप लीक होने पर हड़कंप मच गया है. इसमें उन्होंने देश और दुनिया के कई मसलों पर अपनी राय रखी है. इस टेप से आने वाले वक़्त की राजनीति और कूटनीति के प्रभावित होने का अनुमान है.
इस ऑडियो टेप में वे कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि देश की विदेश नीति पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का दबदबा है और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने ही रूस के इशारे पर ईरान को सीरिया के गृह युद्ध में उतारा है.
ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान की चारों ओर चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर कई लोग उनके बयान पर हैरानी और दुख दोनों जता रहे हैं.
जवाद ज़रीफ़ की इन बातों से लोग इसलिए भी हैरान हैं क्योंकि उन्हें एक अनुभवी राजनयिक माना जाता है. इसके अलावा उन्हें नापतोल कर बोलने वाला इंसान माना जाता है. साथ ही ईरान के लिहाज़ से उन्हें उदारवादी नेता भी माना जाता है.
राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले लीक हुआ यह टेप
अभी यह साफ़ नहीं है कि यह टेप किसने लीक किया, पर यह ऐसे वक़्त सामने आया है जब ईरान में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं. इसके चलते देश में सत्ता संघर्ष नए मुक़ाम तक जा पहुंचा है.
ज़रीफ़ का कहना है कि वे राष्ट्रपति हसन रूहानी की जगह लेने की होड़ में नहीं हैं. हालांकि ईरान का कट्टरपंथी तबक़ा उन पर भरोसा नहीं करता.
यह भी साफ़ है कि इस टेप से कट्टरपंथियों और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई के साथ देश के शीर्ष राजनयिकों को बहुत कठिनाई पेश आएगी.
असल में ईरान में अभी आयतोल्लाह अली खामेनेई का सभी सरकारी मसलों पर निर्णायक प्रभाव है और वही ईरान के सबसे शक्तिशाली सुरक्षा बल इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को नियंत्रित करते हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=DEp5wEyMBBA
घोटाला?
एक अख़बार पहले ही इस टेप लीक प्रकरण को एक घोटाला बता चुका है.
बीबीसी और अन्य विदेशी मीडिया संस्थानों तक जो तीन घंटे का टेप पहुंचा है, ऐसा लगता है उसे दो माह पहले लिए गए सात घंटे के एक वीडियो से लिया गया है.
इस वीडियो को राष्ट्रपति रूहानी के अपने पद पर दो कार्यकाल पूरा करने पर बनाया गया था.
इस टेप में, ईरानी विदेश मंत्री ज़रीफ़ दो बार यह कहते हुए सुने गए कि उनका मानना है कि उनकी बातों को को कई सालों तक नहीं सुना जाएगा.
वे बार-बार शिकायत करते हैं कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स देश की कूटनीति तय करती है और देश की विदेश नीति उसकी युद्ध ज़रूरतों के लिहाज से बनायी जाती है.
ईरान की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हालांकि टेप में विदेश मंत्री की आवाज़ न होने की बात नहीं कही है.
बल्कि यह कहा है कि ऑडियो टेप में ज़रीफ़ के बयानों को उसके संदर्भों से इतर करके प्रकाशित किया गया है. उसने यह भी कहा कि यदि ज़रूरत पड़ी तो इस पूरे इंटरव्यू को जारी किया जाएगा. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस टेप की रिकॉर्डिंग विदेश मंत्रालय के पास नहीं है और न ही इसे सुरक्षित रखना विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी है.
https://www.youtube.com/watch?v=n-sxkQZYqnA
पूर्व जनरल सुलेमानी अपनी चलाते थेः ज़रीफ़
इस टेप में वह ख़ास तौर पर रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी का जिक्र करते हुए कहते हैं कि वे अक्सर उनके पास अपनी ज़रूरतें लेकर आते थे. मालमू हो कि जनरल सुलेमानी जनवरी 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए थे.
वे याद करते हुए बताते हैं कि कैसे सुलेमानी चाहते थे कि वे रूसी विदेश मंत्री के साथ बैठकों में ख़ास रुख़ लें. ज़रीफ़ ने कहा कि जनरल सुलेमानी ईरान को सीरिया में युद्ध में बखूबी ले गए क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते थे कि सीरिया की सरकार के समर्थन में होने वाले रूसी हवाई अभियान के पूरक के तौर पर ईरानी बल जमीन पर रहें.
वे यह शिकायत भी करते हैं कि सुलेमानी ने ईरान के सरकारी विमान कंपनी 'ईरान एयर' के विमानों का उपयोग सीरिया के लिए सैन्य उड़ानों के रूप में किया. ऐसा करना जोखिम भरा तो था ही, यह ईरान की प्रतिष्ठा के लिए भी काफी ख़तरनाक था. ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान की पुष्टि पहले की उन रिपोर्टों से होती है जिसमें आरोप लगाया गया था कि ईरान ने सिविल विमानों का उपयोग बंदूक चलाने और जवानों को लाने-ले जाने के लिए किया था.
रूस ने ईरान को परमाणु समझौता करने से रोका
विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने इस टेप में यह भी कहा कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 2015 में ईरान को छह विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौते पर सहमत होने से रोकने के लिए जो किया जा सकता है, वह सब किया. इन छह विश्व शक्तियों में रूस भी शामिल था.
https://twitter.com/mikepompeo/status/1386524744640606208
उनकी ये बातें हैरान करने वाली हैं क्योंकि आमतौर पर समझा जाता है कि लावरोव के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और रूस ईरान का क़रीबी सहयोगी है. यह टेप लीक ऐसे वक़्त में भी हुआ है जब ईरान परमाणु समझौते को फिर से बहाल करने के लिए अमेरिका के साथ वियना में अप्रत्यक्ष बातचीत में व्यस्त है.
इससे पहले 2018 में अमेरिका के तब के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर फिर से प्रतिबंध लाद दिए थे जिसके बाद ईरान ने भी अपने वादों को तोड़ना शुरू कर दिया था.
ईरान के विदेश मंत्री ने इस टेप में यह भी कहा कि रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कभी भी परमाणु समझौता नहीं चाहता था. इसलिए उसने इसे रोकने की हर संभव कोशिश की. ज़रीफ़ ने यह शिकायत भी की है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने उन्हें कई मौकों पर दरकिनार कर दिया.
इराक के सैन्य बेस पर हमले पर क्या बोले ज़रीफ़
उन्होंने कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद आठ जनवरी, 2020 को जवाबी कार्रवाई के तहत इराकी सैन्य बेस पर मौज़ूद अमेरिकी सेना पर हमले के प्रकरण को याद किया. उन्होंने बताया कि वे इस हमले के दो घंटे बाद तक इस हमले के बारे में नहीं जानते थे.
उन्होंने उस मामले को भी याद किया जब एक यूक्रेनी यात्री विमान को तेहरान से उड़ान भरने के बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की एयर डिफेंस यूनिट ने गलती से गोली मार दी थी.
इस हमले में सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी. विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने कहा कि इसके बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडरों ने उन पर दबाव डाला कि ईरान अपनी गलती स्वीकार न करे.
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