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परमाणु सणझौता टूटा तो यूरेनियम संवर्धन क्षमता बढ़ाएगा ईरान

By Bbc Hindi
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    ईरान-अमरीका
    BBC
    ईरान-अमरीका

    ईरान का कहना है कि उसने अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. ईरान ने इसके लिए साल 2015 में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ हुए परमाणु समझौते पर मंडरा रहे खतरे बादलों को एक बड़ी वजह बताया है.

    ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख ने संवाददाताओं से कहा कि वे 'नतांज़' क्षेत्र में आधुनिक सेंट्रीफ्यूज को विकसित करने वाले ढांचे पर काम कर रहे हैं.

    ईरान की परमाणु एजेंसी ने अपने इस कदम की जानकारी संयुक्त राष्ट्र को दे दी है. उसका ये भी कहना है कि वह समझौते के नियमों के तहत ही काम करेगा.

    अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अमरीका को ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग कर दिया था मगर यूरोपीय ताकतें इस परमाणु समझौते को बचाने की कोशिशें कर रही हैं.

    इस समझौते के तहत ईरान की परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी और इसके बदले तमाम बड़े देश ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हुए थे.

    तेज़ी से हो रहा काम

    ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख अली अकबर सालेही ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि नए सेंट्रीफ्यूज बनाने की तैयारियां चल रहीं हैं.

    उन्होंने कहा, "अगर हम सामान्य गति से कार्य करते तो इसमें छह से सात साल लग जाते, लेकिन अब आने वाले कुछ हफ़्तों या महीनों में यह तैयार हो जाएगा."

    इस काम से ईरान में अधिक यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड बनेगा, जो संवर्धन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है.

    सलेही ने बताया कि सुप्रीम लीडर अयातोल्ला खुमैनी ने इस संबंध में निर्देश दिए थे. उन्होंने अपने अधिकारियों को आदेश दिया था कि परमाणु समझौता समाप्त होने की आशंकाओं के बीच वे संवर्धन बढ़ाने की दिशा में काम शुरू कर दें. इस परमाणु समझौते को जेसीपीओए नाम से जाना जाता है.

    सलेही ने कहा, "कृपया ध्यान दें, अगर जेसीपीओए समाप्त होता है और अगर हम नए सेंट्रीफ्यूज इकट्ठा करने का फैसला करते हैं तो हमें नई पीढ़ी के सेंट्रीफ्यूज इकट्ठा करने होंगे. हालांकि, फ़िलहाल हम समझौते के नियमों के तहत ही काम कर रहे हैं."

    ईरान परमाणु समझौता
    AFP
    ईरान परमाणु समझौता

    क्या ईरान को इसकी इजाज़त है?

    ईरान के साथ साल 2015 में हुए परमाणु समझौते में अमरीका के अलावा यूरोप, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी शामिल थे. इस समझौते के तहत ईरान की यूरेनियम संवर्धन सीमा 3.67 प्रतिशत तक सीमित कर दी गई थी. इसके बदले में बाकी देशों ने ईरान पर लगे गंभीर प्रतिबंधों को हटाने की बात कही थी.

    इसी समझौते के तहत, ईरान सेंट्रीफ्यूज के कुछ हिस्सों का निर्माण कर सकता था लेकिन समझौते के शुरुआती दस सालों के भीतर उनका संचालन नहीं कर सकता था.

    अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी बात पर असहमति जताई, उनका कहना था कि इन नियमों के तहत ईरान की परमाणु शक्ति बनने की महत्वाकांक्षाओं को नहीं रोका जा सकता.

    दूसरी तरफ ईरान ज़ोर देकर कहता रहा है उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है.

    अमरीका ईरान
    Getty Images
    अमरीका ईरान

    क्या है नतांज़ फ़सिलिटी का मक़सद?

    ईरान में दो जगहों, नतांज़ और फोर्डो में यूरेनियम का संवर्धन किया जाता है. इसका उपयोग परमाणु हथियारों को विकसित करने के लिए किया जा सकता है.

    समझौते के तहत शोध और विकास के कार्यक्रम सिर्फ नतांज़ में अधिकतम आठ सालों तक किया जा सकेंगे. यह ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम संवर्धन वाला क्षेत्र है.

    यहां अंडरग्राउंड इमारतें हैं जिनमें 50 हज़ार सेंट्रीफ्यूज तक रखने की क्षमता है. इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए ईंधन पैदा करने के लिए किया जाता है.

    नाटांज़ क्षेत्र
    Getty Images
    नाटांज़ क्षेत्र

    तेहरान के साफ संकेत

    बीबीसी के कूटनीटिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मारकस ने अपने विश्लेषण में बताया है कि तेहरान साफ संकेत देना चाहता है कि अगर परमाणु समझौता टूटता है तो उस स्थिति में भी उसके पास दूसरे रास्ते बचे हुए हैं.

    ईरान ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि यूरोप के प्रमुख देश इस परमाणु समझौते को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

    अमरीका के इस समझौते से हटने के बाद कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने ईरान से दूरी बनानी शुरू कर दी है.

    अब ईरान के इस कदम से यूरोपीय देशों के बीच तनाव उभरेगा और इसके जरिए वे देश परमाणु समझौते को बरकरार रखने की कोशिशों में भी तेज़ी लाएंगे.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Iran will boost nuclear enrichment capacity

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