Iran Israel War: 'भारत युद्ध रुकवा सकता है', खामेनेई के दूत ने कही ऐसी बात, टेंशन में ट्रंप
Iran Israel conflict In Hindi: ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध को एक महीना बीत चुका है, लेकिन शांति की राह अब भी धुंधली है। भारत में ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने साफ किया है कि ईरान परमाणु हथियारों के सख्त खिलाफ है और युद्ध को तुरंत रोकने के पक्ष में है।
इलाही ने पाकिस्तान के मध्यस्थता वाले दावों को खारिज करते हुए भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखा है। उनका मानना है कि भारत की वैश्विक साख इस तनाव को खत्म करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

India role in Iran peace: शांति स्थापना में भारत का महत्व
अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने TOI से बात करते हुए कहा कि, भारत इस वैश्विक संकट को सुलझाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत के संबंध ईरान और पश्चिमी देशों, दोनों के साथ संतुलित हैं। इलाही ने संकेत दिया कि भारत की निष्पक्ष छवि और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय प्रभाव युद्ध विराम कराने में सक्षम है। अगर भारत मध्यस्थ के तौर पर आगे आता है, तो न केवल कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होंगी, बल्कि दुनिया एक बड़े मानवीय संकट से भी बच सकती है।
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ट्रंप प्रशासन की बढ़ती चिंताएं
ईरान के इस नए कूटनीतिक रुख ने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किल बढ़ा दी है। एक तरफ ईरान शांति की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह परमाणु हथियारों के दावों को खारिज कर रहा है। इससे अमेरिका के 'अधिकतम दबाव' वाली नीति पर सवाल उठ रहे हैं। अगर भारत जैसा बड़ा लोकतांत्रिक देश इस मामले में हस्तक्षेप करता है, तो अमेरिका के लिए युद्ध को जारी रखना या ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मुश्किल हो जाएगा।
परमाणु हथियारों पर ईरान का रुख
अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने जोर देकर कहा कि ईरान के सिद्धांतों में परमाणु बम के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने सुप्रीम लीडर के 'फतवे' का हवाला देते हुए इसे 'हराम' बताया। इलाही के अनुसार, ईरान परमाणु शक्ति बनने की कोशिश नहीं कर रहा है। यह बयान डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो लगातार ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बना रहा है। ईरान का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह रक्षा चाहता है, विनाश नहीं।
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पाकिस्तान के दावों की सच्चाई
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया था कि वे 15-सूत्रीय शांति योजना पर काम कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इलाही ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। ईरान के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता की बातें केवल प्रचार का हिस्सा हैं। ईरान ने साफ कर दिया कि वह अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसी ऐसे देश पर निर्भर नहीं है, जिसके दावों में जमीनी सच्चाई न हो।
युद्ध के पीछे का आर्थिक खेल
इलाही ने गंभीर आरोप लगाया कि जो देश (अमेरिका-इजराइल) इस युद्ध के पीछे हैं, वे इसे खत्म करना ही नहीं चाहते। उनके मुताबिक, इस लड़ाई के पीछे हथियारों की मोटी बिक्री और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें मुख्य कारण हैं। बड़े देशों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि युद्ध की वजह से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। यह युद्ध शांति के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक मुनाफे के लिए खींचा जा रहा है।












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