Iran Vs America War: ईरान नहीं, इन 2 देशों ने मार गिराए अमेरिकी फाइटर जेट! अब क्या करेंगे ट्रंप?

Iran Vs America War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने तब नया मोड़ ले लिया जब खबर आई कि ईरान ने अमेरिका के आधुनिक F-15 जैसे लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। हर कोई हैरान है कि जिस तकनीक को अमेरिका अभेद्य मानता था, उसे ईरान ने कैसे भेद दिया? लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ ईरान का हाथ नहीं है।

असली खेल उन महाशक्तियों का है जो पर्दे के पीछे से ईरान को ऐसी 'अदृश्य' तकनीक सप्लाई कर रही हैं, जिसने अमेरिकी रडार सिस्टम को अंधा कर दिया है। यह हमला सीधे तौर पर ईरान की नहीं, बल्कि उस गुप्त तकनीक की जीत है जिसने मिडिल ईस्ट का समीकरण बदल दिया है।

Iran Vs America War

Iran shoots down F-15: रूस का घातक रडार सिस्टम

विशेषज्ञों का सबसे बड़ा शक रूस पर है। यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की दखलंदाजी का बदला लेने के लिए रूस ने ईरान को अपनी सबसे आधुनिक 'पैसिव डिटेक्शन' तकनीक दी हो सकती है। रूस के पास ऐसे सेंसर हैं जो बिना कोई सिग्नल छोड़े विमान की गर्मी को पकड़ लेते हैं। अगर यह तकनीक रूस ने ईरान को दी है, तो इसका मतलब है कि रूसी इंजीनियरों ने खुद जमीन पर बैठकर इन विमानों को ट्रैक करने में ईरान की मदद की है।

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US fighter jet crash Tehran: चीन की साइलेंट सर्विलांस तकनीक

चीन पिछले कई सालों से ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है जो अमेरिकी 'स्टील्थ' यानी रडार से बचने वाली तकनीक को नाकाम कर सके। चीन और ईरान के बीच हुए अरबों डॉलर के समझौतों में सैन्य मदद भी शामिल है। मुमकिन है कि चीन ने अपने एडवांस इंफ्रारेड सेंसर और सैटेलाइट डेटा ईरान के साथ साझा किया हो। चीन के लिए ईरान एक प्रयोगशाला की तरह है, जहां वह अमेरिकी विमानों के खिलाफ अपनी तकनीक का परीक्षण कर रहा है।

पैसिव इंफ्रारेड (PIR) का मायाजाल

आसान शब्दों में कहें तो पारंपरिक रडार टॉर्च की रोशनी की तरह होते हैं, जिन्हें विमान आसानी से पकड़ लेते हैं। लेकिन ईरान ने जिस PIR तकनीक का इस्तेमाल किया है, वह 'थर्मल कैमरे' की तरह है। यह केवल विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को देखता है। चूंकि इससे कोई सिग्नल नहीं निकलता, इसलिए अमेरिकी विमानों के वॉर्निंग सिस्टम को पता ही नहीं चला कि उन पर निशाना साधा जा चुका है। यह तकनीक पूरी तरह साइलेंट और घातक है।

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क्या यह ग्लोबल हथियारों का ट्रायल है?

आज के दौर में कोई भी युद्ध सिर्फ दो देशों के बीच नहीं होता। ईरान के आसमान में जो विमान गिरे हैं, वे असल में अमेरिका बनाम रूस-चीन की तकनीकी जंग का नतीजा हैं। अगर ईरान के पास यह तकनीक खुद की होती, तो वह सालों पहले इसका इस्तेमाल करता। अचानक आई यह सटीकता संकेत देती है कि किसी बड़ी महाशक्ति ने अपने सबसे आधुनिक हथियार ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम में फिट कर दिए हैं, ताकि अमेरिकी वर्चस्व को तोड़ा जा सके।

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