Iran Vs America War: ईरानी अटैक का डर या आर्थिक संकट? युद्ध के बीच ट्रंप को धोखा देने की तैयारी में दोस्त देश
Iran Vs America War Impact: इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी का अचानक सऊदी अरब पहुंचना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी हलचल है। यह दौरा सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक युद्ध नीति और ईरान-अमेरिका जंग के बीच अपने देश को बचाने की एक सोची-समझी रणनीति है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने यूरोप के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे मेलोनी जैसे उनके करीबी दोस्त भी अब असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेलोनी अब ट्रंप के भरोसे रहने के बजाय खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक 'बैकअप प्लान' तैयार कर रही हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा संकट और ट्रंप द्वारा नाटो देशों पर युद्ध में शामिल होने के दबाव ने मेलोनी को यह कदम उठाने पर मजबूर किया है। क्या ट्रंप के अपने ही साथी अब उनके खिलाफ कोई गुप्त गठबंधन बना रहे हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

Trump vs Europe: ट्रंप का दबाव और मेलोनी की मजबूरी
डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि इटली और अन्य नाटो देश ईरान के खिलाफ युद्ध में अपनी नौसेना भेजें। मेलोनी, जो हमेशा ट्रंप की समर्थक रही हैं, अब फंस गई हैं। अगर वह ट्रंप की बात मानती हैं, तो इटली सीधे युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा। मेलोनी का सऊदी दौरा यह दिखाता है कि वह अब अमेरिका के भरोसे रहने के बजाय खुद अपनी सुरक्षा और समझौतों के लिए हाथ-पैर मार रही हैं।
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Strait of Hormuz Crisis: ऊर्जा संकट और हॉर्मुज की नाकाबंदी
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता रोक दिया है, जिससे पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो गई है। इटली की पूरी अर्थव्यवस्था इसी रास्ते से आने वाले ईंधन पर टिकी है। मेलोनी का मकसद सऊदी अरब के साथ मिलकर ऊर्जा सप्लाई का कोई सुरक्षित रास्ता निकालना है। उन्हें डर है कि ट्रंप की युद्ध नीति के कारण अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो इटली पूरी तरह कंगाल हो जाएगा।
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खाड़ी देशों की बर्बादी और यूरोप का डर
ईरान के हमलों ने सऊदी अरब के बड़े तेल ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है। मेलोनी यह जानती हैं कि अगर खाड़ी देश बर्बाद हुए, तो यूरोप को शरणार्थियों और आर्थिक मंदी का दोहरा झटका लगेगा। इसीलिए वह सीधे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलने पहुंचीं, ताकि खाड़ी देशों को भरोसा दिया जा सके कि संकट की घड़ी में यूरोप उनके साथ है, भले ही अमेरिका की नीतियां कुछ भी हों।
क्या ट्रंप के खिलाफ बन रहा है कोई नया गुट?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह यात्रा ट्रंप के खिलाफ किसी 'दुश्मन गठबंधन' की शुरुआत नहीं, बल्कि एक 'बचाव गठबंधन' की कोशिश है। मेलोनी जैसे नेता अब यह समझ रहे हैं कि ट्रंप के फैसले केवल अमेरिका के हित में हो सकते हैं, यूरोप के लिए नहीं। इसलिए, वे खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र सुरक्षा और व्यापार गलियारा बनाना चाहते हैं, ताकि ट्रंप के फैसलों का बुरा असर उनकी जनता पर न पड़े।












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