Iran Vs America: ट्रंप का 'तेल लूटने' का मास्टरप्लान लीक! अमेरिकी सांसद ने सरेआम खोला युद्ध का काला राज
Iran Vs America: पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर इजराइल और अमेरिका, ईरान पर होने वाले हमलों को परमाणु कार्यक्रम रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा का हवाला देकर जायज ठहरा रहे हैं, वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक विस्फोटक बयान देकर पूरी कहानी बदल दी है। ग्राहम ने फॉक्स न्यूज पर खुलेआम स्वीकार किया कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का असली मकसद वहां के विशाल तेल भंडारों पर कब्जा करना है।
यह कबूलनामा उन दावों की पोल खोलता है जिनमें मानवाधिकारों और सुरक्षा की बात की जाती थी। ईरान-इजराइल युद्ध की इस तपिश के बीच, संसाधन हथियाने की यह स्वीकारोक्ति वैश्विक राजनीति में एक नया भूचाल ले आई है।

Lindsey Graham Iran oil statement: ट्रंप के नापाक चाल का हुआ खुलासा
लिंडसे ग्राहम का यह बयान ईरान के उन पुराने आरोपों को सच साबित करता दिख रहा है कि अमेरिका की दिलचस्पी लोकतंत्र या सुरक्षा में नहीं, बल्कि संसाधनों में है। फॉक्स न्यूज पर उन्होंने खुलकर कहा कि वेनेजुएला और ईरान के पास दुनिया का 31% तेल भंडार है। इस पर नियंत्रण पाकर अमेरिका न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना चाहता है, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाना चाहता है। यह कबूलनामा अमेरिकी विदेश नीति के 'छिपे हुए एजेंडे' को उजागर करता है।
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US Iran Conflict Hindi: चीन को कमजोर करने की चाल
ग्राहम ने रणनीतिक रूप से चीन का जिक्र करते हुए कहा कि बीजिंग अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक ईरान और वेनेजुएला पर निर्भर है। अगर इन संसाधनों पर अमेरिका का कब्जा या प्रभाव हो जाता है, तो चीन की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। यह सीधे तौर पर एक 'इकोनॉमिक वॉर' की स्थिति है। अमेरिका का मानना है कि तेल की चाबी अपने हाथ में रखकर वह वैश्विक राजनीति में चीन की बढ़ती चुनौती को प्रभावी ढंग से कुचल सकता है।
Donald Trump Iran Policy: सैन्य हमलों के पीछे का तर्क
पिछले साल जून और अब इस साल फरवरी से ईरान पर जो बमबारी हो रही है, उसे आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियारों को रोकने की कोशिश बताया गया था। लेकिन ग्राहम के बयान के बाद अब इन हमलों को 'संसाधन युद्ध'(Resource War) के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य ताकत का इस्तेमाल केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है। इससे ईरान में सत्ता परिवर्तन की अमेरिकी कोशिशों के पीछे के असली इरादे भी साफ हो गए हैं।
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ट्रंप प्रशासन की साख पर सवाल
ग्राहम को डोनाल्ड ट्रंप का बेहद करीबी माना जाता है, इसलिए उनके इस बयान को ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का असली चेहरा माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ट्रंप प्रशासन के झूठ का पर्दाफाश कह रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि मानवाधिकारों और परमाणु खतरे की आड़ में अमेरिका दरअसल दूसरे देशों की संपदा लूटना चाहता है। ग्राहम की इस बेबाकी ने वॉशिंगटन के कूटनीतिक गलियारों में असहज स्थिति पैदा कर दी है।
ग्राहम का विवादों से पुराना नाता
लिंडसे ग्राहम अपनी कट्टरपंथी नीतियों और विवादित बयानों के लिए मशहूर हैं। वे रूस और चीन के कड़े विरोधी रहे हैं और भारत के खिलाफ भी 500% टैरिफ लगाने जैसी धमकियां दे चुके हैं। दो दशकों से रिपब्लिकन राजनीति का बड़ा चेहरा रहे ग्राहम अक्सर ऐसी बातें कह जाते हैं जो कूटनीतिक रूप से संवेदनशील होती हैं। उनका यह ताजा बयान न केवल मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाएगा, बल्कि अमेरिका की वैश्विक छवि को भी प्रभावित कर सकता है।












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