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Iran-Israel War: Khamenei की मौत के बाद पाकिस्तान PM शरीफ की हवा टाइट, बयान जारी कर दिया ये डर सताने का संकेत!

Iran-US-Israel War Pakistan PM Shehbaz Sharif Tensions: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के बाद पाकिस्तान ने पहली बार खुलकर अपना रुख साफ किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार (1 मार्च 2026) को X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर ईरान के साथ पूरी एकजुटता जताई और अमेरिका-इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप लगाया।

लेकिन सवाल ये है - इतना सख्त बयान क्यों? क्या पाकिस्तान को अपने लीडरशिप पर हमले का डर सता रहा है? या फिर घरेलू दबाव और रणनीतिक मजबूरी? आइए पूरी कहानी समझते हैं - बयान क्या था, क्यों दिया गया और इसका मतलब क्या है....

Iran-US-Israel War Pakistan PM Shehbaz Sharif Tensions

Pakistan PM Shehbaz Sharif: PM शरीफ का पूरा बयान

'पाकिस्तान की सरकार और लोग दुख की इस घड़ी में ईरान के लोगों के साथ हैं और हिज़ एमिनेंस अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर अपनी गहरी संवेदनाएं जताते हैं। पाकिस्तान इंटरनेशनल कानून के नियमों के उल्लंघन पर भी चिंता जताता है। यह एक पुरानी परंपरा है कि देश/सरकार के प्रमुखों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। हम दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं। अल्लाह तआला ईरानी लोगों को इस कभी न भरने वाले नुकसान को सहने की सब्र और ताकत दे।'

यह बयान ठीक उसी दिन आया जब ईरान ने जवाबी हमले तेज किए (आईआरजीसी का दावा - यूएसएस अब्राहम लिंकन पर 4 बैलिस्टिक मिसाइलें) और पाकिस्तान में शिया प्रदर्शनकारियों ने कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला बोल दिया, घटना में 8 से ज्यादा मारे गए।

क्यों इतना सख्त रुख? तीन बड़े कारण

1. घरेलू दबाव और शिया वोट बैंक :

पाकिस्तान में शिया आबादी करीब 15-20% है। खामेनेई की मौत पर कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में प्रदर्शन भड़क गए। दूतावास पर हमला, टायर जलाए, 'अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे। अगर सरकार चुप रहती तो अंदरूनी अस्थिरता बढ़ जाती। PM शरीफ ने शिया भावनाओं को शांत करने के लिए यह बयान दिया।

2. ईरान के साथ गहरे रिश्ते - रणनीतिक मजबूरी :

पिछले 2 साल में पाकिस्तान-ईरान रिश्ते अपने चरम पर हैं - 25 से ज्यादा हाई-लेवल डेलिगेशन, 25 MoU, गैस पाइपलाइन पर चर्चा तेज। दोनों देशों में सीमा सुरक्षा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ सहयोग और CPEC का ईरान एक्सटेंशन। ईरान पाकिस्तान का महत्वपूर्ण पड़ोसी है। खामेनेई की हत्या को 'इस्लामी दुनिया पर हमला' मानकर पाकिस्तान चुप नहीं रह सकता था।

3. 'आज खामेनेई, कल कोई और?' - लीडरशिप सिक्योरिटी का डर

PM शरीफ ने साफ कहा - 'सरों को निशाना बनाना पुरानी परंपरा का उल्लंघन है'। पाकिस्तान को डर है कि अगर अमेरिका-इजरायल लीडर्स को मारने की नई मिसाल कायम कर दें तो कल भारत या कोई और पाकिस्तानी लीडरशिप को टारगेट कर सकता है। खासकर जब पाकिस्तान-अफगानिस्तान में 'खुला युद्ध' चल रहा है, टीटीपी हमले बढ़ रहे हैं और अर्थव्यवस्था पहले से ही खस्ताहाल (IMF पर निर्भर, विदेशी मुद्रा संकट)।

Pakistan-US-Iran Relations Analysis: पाकिस्तान-US-Iran संबंधों का ताजा विश्लेषण

  • ईरान से दोस्ती: हाल के सालों में रिश्ते सबसे अच्छे दौर में। 2025-26 में ईरानी राष्ट्रपति के दो दौरे, विदेश मंत्री स्तर पर लगातार बातचीत। पाकिस्तान ने ईरान-US न्यूक्लियर टॉक्स का समर्थन भी किया था।
  • अमेरिका से रिश्ते तनावपूर्ण लेकिन जरूरी: ट्रंप प्रशासन से IMF बेलआउट और सैन्य सहायता की उम्मीद। लेकिन अफगानिस्तान युद्ध और अब ईरान संकट में पाकिस्तान अमेरिका की नीतियों से खुश नहीं। बयान में ट्रंप-नेतन्याहू का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ है।
  • नतीजा: पाकिस्तान 'बैलेंसिंग एक्ट' कर रहा है - ईरान को खुश रखते हुए अमेरिका को ज्यादा नाराज नहीं करना चाहता। लेकिन कराची हिंसा से साबित हो गया कि सड़कें सरकार को मजबूर कर रही हैं।

क्या मतलब? पाकिस्तान की हालत क्यों खस्ता हो रही?

  • आर्थिक बोझ: अफगानिस्तान युद्ध + ईरान संकट से तेल कीमतें आसमान छू रही हैं। पाकिस्तान तेल आयात पर निर्भर।
  • सुरक्षा खतरा: अगर युद्ध फैला तो बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में अस्थिरता बढ़ेगी।
  • WWIII की आशंका: पाकिस्तान के बयान से साफ है कि मुस्लिम देश अब अमेरिका-इजरायल के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। रूस-चीन पहले ही निंदा कर चुके हैं।

डिप्लोमेसी या डर का खेल?

शहबाज शरीफ का बयान ईरान के साथ खड़े होने का दिखावा है, लेकिन ट्रंप-नेतन्याहू पर सीधा हमला नहीं। यह पाकिस्तान की 'सभी तरफ संतुलन' की पुरानी नीति है - घरेलू शिया वोटर खुश, अमेरिका से रिश्ते न बिगड़ें। लेकिन प्रदर्शन और मौतें दिखा रही हैं कि स्थिति हाथ से निकल सकती है। पाकिस्तान की हालत खस्ता इसलिए है क्योंकि वह दो मोर्चों पर फंसा है: ईरान का दुख और अमेरिका का दबाव।

अगर युद्ध फैला, तो पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित होगा - बॉर्डर, इकोनॉमी, सेक्टेरियन हिंसा। शांति के लिए UNSC में पाकिस्तान ने 'तत्काल डिप्लोमेसी' की मांग की है। लेकिन फिलहाल, डर साफ दिख रहा है।

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