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Khamenei Health Update: सीजफायर या धोखा? मोजतबा खामेनेई कोमा में, फिर पर्दे के पीछे किसने पक्की की ईरान की डील

Mojtaba Khamenei Health Update: पश्चिम एशिया से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान हुआ है, तो दूसरी तरफ ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को लेकर एक डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि मुजतबा होश में नहीं हैं और कोम के एक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मुजतबा फैसले लेने की हालत में नहीं हैं, तो ईरान की तरफ से इस युद्धविराम पर मुहर किसने लगाई? क्या यह शांति की कोशिश है या कोई बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय धोखा?

Mojtaba Khamenei Health Update

Iran-US Ceasefire 2026: मुजतबा खामेनेई की हालत पर बड़ा सस्पेंस

'द टाइम्स' की रिपोर्ट ने ईरान के भीतर मचे हड़कंप को बेपर्दा कर दिया है। बताया जा रहा है कि मुजतबा खामेनेई उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की जान गई थी। फिलहाल वे बेहोश हैं और किसी भी तरह का फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं। जब देश का सबसे बड़ा नेता अस्पताल के बेड पर पड़ा हो, तो सरकार और सेना को कौन निर्देश दे रहा है? यह सस्पेंस अब ईरान की सत्ता पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।

Iran-US Ceasefire Mystery: पाकिस्तान की भूमिका और सीजफायर की डील

इस तनाव के बीच पाकिस्तान ने शांति दूत बनकर सबको हैरान कर दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से ही अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम पर राजी हुए हैं। डोनल्ड ट्रंप ने इस समझौते का स्वागत किया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही है। लेकिन बड़ा पेच यहीं फंसा है, जब ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा का कोई अता-पता नहीं है, तो पाकिस्तान ने ईरान की तरफ से बात किससे की? क्या सेना ने कमान संभाल ली है?

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Mojtaba Khamenei in coma: 'द टाइम्स' की रिपोर्ट और खुफिया मेमो का खुलासा

अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के पास मुजतबा की सटीक लोकेशन होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वे तेहरान से दूर पवित्र शहर कोम में भर्ती हैं। खुफिया मेमो कहता है कि मुजतबा शासन चलाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम लीडर बनने के बाद से वे एक बार भी जनता के सामने नहीं आए हैं, बस उनके नाम के पत्र टीवी पर पढ़े गए। क्या वे पत्र वाकई उन्होंने लिखे थे या यह महज दिखावा है?

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सीजफायर के पीछे छुपा हुआ असली एजेंडा

जानकारों का मानना है कि यह दो हफ्ते का सीजफायर एक बड़ा धोखा हो सकता है। हो सकता है कि ईरान के भीतर सत्ता की लड़ाई चल रही हो और इस समय का इस्तेमाल नया नेता चुनने या सेना को मजबूत करने के लिए किया जा रहा हो। अगर मुजतबा सच में कोमा में हैं, तो यह सीजफायर किसी भी वक्त टूट सकता है। क्या अमेरिका और इजरायल किसी बड़ी कार्रवाई से पहले सिर्फ वक्त का इंतजार कर रहे हैं या ईरान खुद को बिखरने से बचा रहा है?

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