अमेरिका के दो दुश्मनों के बीच होने वाला है खतरनाक समझौता, इजरायल के लिए खड़ी हो सकती है परेशानी

चीन के नये लड़ाकू विमान J-16 और J-10 को ईरान खरीदना चाहता है, लेकिन चीन अपने अरब भागीदारों को शायद ही नाराज करना चाहेगा।

नई दिल्ली, सितंबर 07: अमेरिका के दो दुश्मनों के बीच खतरनाक समझौता होने जा रहा है और अगर ये डील पक्की हो जाती है, तो ये दोनों देश चीन के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय शांति को ध्वस्त कर सकते हैं। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपनी पुरानी वायु सेना के आधुनिकीकरण के लिए रूस से Su-35 लड़ाकू जेट खरीदने की योजना की पुष्टि कर दी है। रूस और ईरान के बीच फाइटर जेट को लेकर ये समझौता 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अलग-थलग तेहरान की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा खरीद में से एक होगी।

रूस से फाइटर जेट खरीदेगा ईरान

रूस से फाइटर जेट खरीदेगा ईरान

ईरानी वायु सेना के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल हामिद वहीदी ने घोषणा की है, कि Su-35 लड़ाकू विमान खरीदना वायु सेना के एजेंडे में शामिल है, हालांकि अंतिम निर्णय सेना और सेना के जनरल स्टाफ मुख्यालय के पास है। तेहरान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में इसकी सूचना दी है। ईरान ने 64 नए विमानों की आवश्यकता की घोषणा की है, जिनमें से 24 मिस्र से आने वाले थे, लेकिन ईरान इंटरनेशनल के अनुसार अमेरिकी दबाव के कारण ये सौदा फाइनल नहीं हो सका। ईरान ने अपनी पुरानी वायु सेना के आधुनिकीकरण के लिए रूस से Su-35 लड़ाकू जेट खरीदने की योजना की पुष्टि की है। नियोजित खरीद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अलग-थलग तेहरान की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा खरीद में से एक होगी।

रूस-ईरान में सैन्य संबंध

रूस-ईरान में सैन्य संबंध

आपको बता दें कि, ईरान की तरफ से रूसी फाइटर जेट एसयू-35 खरीदने की घोषणा उस वक्त की गई है, जब पिछले हफ्ते रिपोर्ट आई थी, कि यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए रूस ने भारी संख्या में लड़ाकू ड्रोन ईरान से खरीदे हैं, क्योंकि यूक्रेन युद्ध में रूस के पास ड्रोन की कमी हो गई थी। इसके साथ ही रूस ने अमेरिका के एक और दुश्मन उत्तर कोरिया से हजारों की संख्या में रॉकेट्स और लाखों की संख्या में तोप के गोले भी खरीदे हैं। वहीं, रूस ने उत्तर कोरिया को रिश्ता मजबूत करने का ऑफर भी दिया था, जिसे किम जोंग उन ने स्वीकार भी कर लिया है। एशिया टाइम्स ने रिपोर्ट किया है, कि हालांकि रूस के पास कई ड्रोन परियोजनाएं हैं, लेकिन इसके अपरिपक्व ड्रोन उद्योग, उन्नत प्रौद्योगिकियों की सीमित उपलब्धता की वजह से वो ड्रोन निर्माण को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। वहीं, अमेरिका और सहयोगी देशों की प्रतिबंध की वजह से भी रूसी ड्रोन निर्माण को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एसयू-35 की संभावित बिक्री से दोनों देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी और भी ज्यादा गहरी हो सकती है और चीन के साथ भी ईरान के काफी मजबूत संबंध हैं, लिहाजा वैश्विक राजनीति में एक नये गुट का उदय हो रहा है।

कितना खतरनाक है Su-35?

कितना खतरनाक है Su-35?

रूस के राज्य के स्वामित्व वाले एयरोस्पेस कंसोर्टियम यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के अनुसार, Su-35, Su-27 एयर सुपीरियरिटी फाइटर का पूरी तरह से आधुनिक संस्करण है। यह Su-35 को 4++ पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रूप में वर्गीकृत करता है जो चौथी पीढ़ी के एयरफ्रेम पर 5वीं पीढ़ी की तकनीकों को जोड़ती है। यूएसी के मुताबिक, एसयू -35 एयर फाइटर है, जिसे beyond-visual-range (बीवीआर) और within-visual-range (डब्ल्यूवीआर) हवाई युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें जमीन और नौसैनिक लक्ष्यों के खिलाफ लंबी दूरी की हवा से सतह पर हमला करने की क्षमता भी है। एसयू 35 बनाने वाली हथियार कंपनी यूएसी का दावा है कि, एसयू-35 एक मॉडर्न फाइटर जेट है, जो कई अत्याधुनिका लड़ाई टेक्नोलॉजी से लैस है। इस फाइटर जेट की कीमत करीब 7 अरब भारतीय रुपये के आसपास है।

ईरान के लिए कितना फायदेमंद?

ईरान के लिए कितना फायदेमंद?

यदि ईरान और रूस के बीच एसयू-35 फाइटर जेट को लेकर डील फाइनल हो जाती है, जो अभी भी प्रक्रियाधीन है, तो फिर ये डील ईरानी वायुसेना की क्षमता को काफी हद तक बढ़ा देगा। ईरान अभी भी 1979 से पहले के विमानों पर निर्भर है, जिसे उसे चीन और रूस से मिले थे और उसके बाद से ईरानी वायुसेना का आधुनिकीकरण नहीं हो सका है और ईरानी वायुसेना अभी भी पुराने रूसी और चीनी विमानों पर ही निर्भर है। इस बीच, ईरान के स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम के मिश्रित परिणाम मिले हैं। ईरान का इसका सबसे सक्षम लड़ाकू F-14 टॉमकैट विमान है, जिसे उसने पहली बार 1976 में ईरान के ऊपर मंडराने वाले सोवियत मिग-25R फॉक्सबैट टोही उड़ानों को रोकने के लिए हासिल किया था। F-14 की बेहतर उड़ान विशेषताओं, शक्तिशाली AWG-9 रडार और AIM-54 फीनिक्स BVR मिसाइलों ने इसे उस समय F-15 ईगल की तुलना में अधिक लंबी दूरी और बेहतर गतिशीलता प्रदान की थी।

ईरान को नये विमानों की जरूरत

ईरान को नये विमानों की जरूरत

ईरान ने 1979 की ईरानी क्रांति से पहले 79 F-14s विमानों का अधिग्रहण किया था और 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान विमान ने अपनी योग्यता साबित की थी। हालांकि, ईरान-इराक युद्ध और प्रतिबंधों ने ईरान के F-14 बेड़े पर एक टोल लिया है। रक्षा विश्लेषक डेविड एक्स ने द नेशनल इंटरेस्ट में बताया है कि, ईरान के पास अभी भी 40 या उससे ज्यादा F-14 टॉमकैट्स फाइटर जेट हैं, जो अभी भी मध्य पूर्व में सबसे अच्छे लड़ाकू विमानों में से हैं। उन्होंने यह भी कहा की कि, अमेरिकी स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और तकनीकी सहायता के अभाव में, ईरान ने फिर भी अपने F-14 बेड़े को नए रडार, रेडियो और नेविगेशन सिस्टम के साथ एडवांस किया है, जबकि रूसी निर्मित R73 BVR मिसाइलों, यूएस-निर्मित हॉक सतह को उन विमानों में जोड़ा है।

वायुसेना को मजबूत करना चाहता है ईरान

वायुसेना को मजबूत करना चाहता है ईरान

अपने पुराने फाइटर जेट्स को विकसित करने के बाद भी ईरान को इन विमानों को बदलने की जरूरत है, क्योंकि ये विमान अब कम से कम 40 साल पुराने हो चुके हैं, लिहाजा टेक्नोलॉजिकल दिक्कतों की वजह से ये विमान अकसर हादसे का शिकार होते रहते हैं। ईरान ने पिछली बार आधुनिक लड़ाकू विमान का अधिग्रहण 1990 के दशक में किया था, जब उसे रूस से मिग-29ए फुलक्रम लड़ाकू विमान प्राप्त हुए थे। इससे पहले, ईरान ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान चीनी एफ -7 और सोवियत मिग -21 की प्रतियां हासिल की थीं। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान, ईरान ने इराक के मिग-29 और फ्रांसीसी निर्मित मिराज F1s को जब्त कर लिया था, जब उनके पायलटों ने गठबंधन बलों द्वारा कब्जा करने या मारे जाने से बचने के लिए शरण मांगी थी। हालांकि, ईरानी वायुसेना के पायलच चीनी लड़ाकू विमानों को लेकर काफी असंतुष्ट हैं और साल 1997 और 1998 में ईरानी रक्षा अधिकारियों ने पड़ताल करने के बाद चीनी लड़ाकू विमान एफ-8 को खारिज कर दिया था।

चीन के नये विमानों पर नजर

चीन के नये विमानों पर नजर

हालांकि, चीन के नये लड़ाकू विमान J-16 और J-10 को ईरान खरीदना चाहता है, लेकिन चीन अपने अरब भागीदारों को शायद ही नाराज करना चाहेगा। चीन ने पिछले दिनों सऊदी अरब से संबंधों का काफी विस्तार दिया है और बहुत जल्द चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सऊदी अरब का दौरा करने वाले हैं, लिहाजा ईरान को फाइटर जेट्स बेचकर चीन अपने अरब भागीदारों को नाराज नहीं करना चाहेगा। वर्षों से, ईरान ने अपने खुद के लड़ाकू जेट बनाने की कोशिश की है, जिसमें उसे मिली जुली सफलता हाथ लगी है। 1997 में ईरान ने अपने घरेलू अजरक्ष लड़ाकू का अनावरण किया था, जिसे रक्षा वेबसाइट ग्लोबल सिक्योरिटी नोट्स ईरान के यूएस-निर्मित F-5 लाइट फाइटर्स, ईरानी रिवर्स-इंजीनियर भागों और रूसी एवियोनिक्स के भागों को एक साथ जोड़कर बनाया गया था। लेकिन, अब ईरान की कोशिश रूस के साथ रक्षा संबंधों को विस्तार देते हुए एसयू-35 खरीदने की है, ताकि वो अपने सबसे बड़े दुश्मन इजरायल को काबू में रख सके।

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