Iran Supreme Leader Death: ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के पीछे सऊदी अरब? क्राउन प्रिंस ने लिया बदला
Iran Supreme Leader Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत की पुष्टि ईरान की सरकारी मीडिया ने कर दी है। अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया कि हमले से कुछ समय पहले खामेनेई अपने दो वरिष्ठ सलाहकारों अली लारिजानी और अली शमखानी के साथ एक सुरक्षित स्थान पर बैठक कर रहे थे। उसी दौरान हमला हुआ था और शुरुआती हमले में ही सुप्रीम लीडर की मौत हो गई।
इजरायली सेना (Israel Defense Forces) ने दावा किया है कि अली शमखानी भी शनिवार सुबह हुए हमलों में मारा गया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम से बच नहीं पाए। खामेनेई की मौत के पीछे सऊदी अरब का हाथ होने का भी दावा किया जा रहा है।

Iran Supreme Leader Death: सऊदी अरब ने दिया अमेरिका का साथ
- सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई तेहरान में एक अहम बैठक करने वाले थे, जिसकी जानकारी इजरायली खुफिया एजेंसियों को पहले से थी। हालांकि बैठक की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की गई है।
- माना जा रहा है कि तेहरान के एक हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड को निशाना बनाया गया। अमेरिका के प्रमुख अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि खामेनेई की हत्या की सुनियोजित योजना बनी थी। इसमें सऊदी अरब भी भूमिका भी है।
Crown Prince ने खामेनेई से लिया पुराना बदला
अमेरिकी अखबार The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के अलावा सऊदी अरब ने भी अमेरिका पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाया था। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सार्वजनिक तौर पर कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है। सूत्रों के मुताबिक, निजी बातचीत में ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी। क्राउन प्रिंस खास तौर पर खामेनेई के शासन का अंत चाहते थे।
इस दुश्मनी की वजह काफी पुरानी है। सऊदी अरब जहां पुरानी कट्टर छवि से बाहर निकलकर खुद को आधुनिक सांचे में ढालने और वैश्विक निवेश केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर ईरान खामेनेई के शासनकाल में अपने पुराने ढर्रे पर ही था।
मिडिल ईस्ट में अब बनेगा नया सत्ता और क्षेत्रीय समीकरण?
खामेनेई सऊदी अरब और क्राउन प्रिंस पर कई बार अमेरिका परस्त होने का आरोप लगाते रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही खामेनेई के शासन से ईरान को मुक्त कराने का ऐलान किया था। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वर्चस्व को स्थापित करने का सपना सिर्फ इजरायल के भरोसे नहीं हो सकता है। सऊदी अरब का सहयोग अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर अहम है। दूसरी ओर क्राउन प्रिंस को भी अपने देश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने के लिए पश्चिमी देशों का सहयोग चाहिए। इन सारी परिस्थितियों और समीकरणों ने मिलकर खामेनेई के शासन का अंत कर दिया।
सऊदी नेतृत्व ईरान को अपना प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है। सुन्नी बहुल सऊदी अरब और शिया नेतृत्व वाला ईरान लंबे समय से भू-राजनीतिक टकराव में रहे हैं। खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बदलने की आशंका है। आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर सबकी नजर रहेगी।
Saudi Arab की भूमिका का रिपोर्ट्स में दावा
हमले से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) ने अपनी आकलन रिपोर्ट में आशंका जताई थी कि खामेनेई के बाद ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड के कट्टरपंथी अधिकारी सत्ता संभाल सकते हैं। ऐसे में ईरान की राजनीतिक दिशा और भी सख्त हो सकती है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि क्राउन प्रिंस के भाई खालिद बिन सलमान ने वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात के दौरान हमले के समर्थन की बात रखी थी। हालांकि, सऊदी अरब ने साफ किया कि वह अपने एयरस्पेस या क्षेत्र का इस्तेमाल हमलों के लिए नहीं होने देगा।












Click it and Unblock the Notifications