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World News Hindi: धर्म का किया प्रचार तो 8 महिलाओं को 90 साल की जेल, खौफनाक फैसले से पूरी दुनिया सन्न

World News Hindi: ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ती सख्ती के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बहाई धर्म को मानने वाली आठ महिलाओं को जेल भेज दिया गया है। इन महिलाओं पर अपने धर्म का प्रचार करने और 'इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ प्रोपेगैंडा' फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सऊदी अरब के न्यूज आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' के अनुसार, शनिवार को इस्फहान में इन महिलाओं को गिरफ्तार कर सजा काटने के लिए स्थानीय जेल भेज दिया गया। यह कार्रवाई ईरान में बहाई समुदाय के खिलाफ चल रहे लंबे उत्पीड़न और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक नया और सख्त अध्याय है।

Bahai women imprisoned Iran
(AI Image)

Baha'i women imprisoned Iran: धर्म प्रचार का आरोप और गिरफ्तारी

ईरानी अधिकारियों ने आठ बहाई महिलाओं येगानेह रूहबख्श, अरेज़ू सोभानियान, शाना शौकीफार, नेदा इमादी, नेदा बदख्श, मोजगन शाहरेजाई, परस्तू हकीम और नेगिन खादेमी को हिरासत में लिया है। इनमें अरेजू सोभानियान और येगानेह रूहबख्श मां-बेटी हैं। इन पर 'दुश्मन समूहों के साथ सहयोग' और बहाई मान्यताओं को बढ़ावा देने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, इनके मामले को 'अति गोपनीय और सुरक्षा से जुड़ा' करार दिया गया है, जिसके चलते न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता का भारी अभाव देखने को मिला है।

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Religious minority rights Iran: 90 साल की जेल और भारी जुर्माना

इस्फहान कोर्ट ऑफ अपील्स ने इन महिलाओं समेत कुल दस बहाई महिलाओं के खिलाफ दी गई 90 साल की सामूहिक जेल की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही उन पर 900 मिलियन तोमन का भारी जुर्माना भी लगाया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अपील की यह सुनवाई बचाव पक्ष की गैरमौजूदगी में की गई। ईरान में बहाई धर्म को ईसाई या यहूदी धर्म की तरह आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है, जिस कारण इस समुदाय को लगातार कानूनी और सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

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बहाई-इजरायल कनेक्शन का सरकारी दावा

ईरानी सरकार और वहां का मीडिया लगातार बहाई समुदाय को निशाना बनाने के लिए उन्हें इजरायल से जोड़ने का प्रोपेगैंडा चलाता रहा है। हाल ही में एक सरकारी कमेंटेटर ने दावा किया कि 'बहाई और इजरायल एक ही हैं'। दरअसल, बहाई धर्म का धार्मिक केंद्र इजरायल के हाइफा में स्थित है, जिसे आधार बनाकर ईरानी अधिकारी इन लोगों पर जासूसी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन निराधार दावों का उपयोग गिरफ्तारियों और संपत्तियों की जब्ती को सही ठहराने के लिए किया जाता है।

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मानवाधिकारों का बढ़ता हनन

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ दर्ज किए गए कुल मामलों में से लगभग 75 प्रतिशत शिकार बहाई समुदाय के लोग रहे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही इस समुदाय को शिक्षा, रोजगार और धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित रखा गया है। हालिया गिरफ्तारियां और सरकारी टेलीविजन पर बढ़ती बहाई-विरोधी बयानबाजी दर्शाती है कि ईरान में धार्मिक सहिष्णुता खत्म हो रही है और दमनकारी नीतियों का दायरा बढ़ता जा रहा है

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