Israel Iran War: अपने ही नागरिकों पर कहर बरसा रहा ईरान, जासूसी के आरोप में एक ही दिन में 3 लोगों को दी फांसी
Israel Iran War: इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर फेल होता नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही युद्धविराम का ऐलान कर दिया हो, लेकिन ईरान और इजरायल दोनों ने मंगलवार को भी मिसाइलें दागी हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान ने सीजफायर तोड़ते हुए इजरायल पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इजरायली हमले में ईरान के न्यूक्लियर प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है और कई टॉप कमांडर और वैज्ञानिक मारे गए हैं।
ईरान युद्ध लड़ने के साथ ही देश में ताबड़तोड़ अभियान चलाकर इजरायल और अमेरिका के लिए जासूसी के आरोप में अपने ही कई नागरिकों को जेल में डाल रहा है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को 3 लोगों को ईरान के लिए जासूसी के आरोप में फांसी की सजा दी गई है।

Israel Iran War: जासूसी के आरोप में ईरान ने 3 को दी फांसी
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक इजराइल ने ईरान के कम से कम 14 वैज्ञानिकों की मौत का दावा किया है। इसमें वैज्ञानिकों के साथ-साथ न्यूक्लियर इंजीनियर भी शामिल हैं। ईरान को शक है कि देश के अंदर छुपे कुछ लोगों ने मोसाद के लिए जासूसी करने का काम किया है। इसके बाद न्यूज एजेंसी मिजान के मुताबिक ईरान ने मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में तीन और लोगों को मौत की सजा दी है। ईरान ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट कहती है कि बीते दो महीनों में ईरान ने करीब 300 लोगों को फांसी दी है। इस हिसाब से औसतन रोज 5 लोगों को ईरान जासूसी के आरोप में फांसी दे रहा है।
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बीते दो महीनों में तेज हुई धर-पकड़
एसोसिएट प्रेस के मुताबिक, बीते दो महीनों में ईरान ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अभियान चलाया है और 300 से ज्यादा लोगों को जासूसी के आरोप में पकड़ा है। आईआरजीसी को शक है कि ईरान में रहकर मोसाद के एजेंट खुफिया ढंग से काम कर रहे हैं। सोमवार को ईरान ने मोहम्मदअमीन शायस्तेह नाम के राजनीतिक कैदी को भी मौत की सजा दी है। उन पर भी मोसाद के लिए जासूसी करने का आरोप था और वह साल 2023 से ही ईरान की जेल में बंद थे। ह्यूमन राइट्स संगठनों का आरोप है कि जेल में मोहम्मदअमीन शायस्तेह को प्रताड़ना देकर जासूसी के आरोप कबूल कराए गए हैं।
ईरान में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और राजनैतिक कैदियों को प्रताड़ित करने का आरोप पिछले कई दशक से लग रहा है। विश्व मानवाधिकार संगठन के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि साल 2024 में ईरान में 900 से ज़्यादा लोगों को फांसी दी गई थी। फांसी की सजा पाने वालों पर देशद्रोह, धार्मिक प्रथाओं के उल्लंघन, दुश्मन मुल्क के लिए जासूसी समेत कई आरोप ईरानी सरकार की ओर से लगाए गए थे।
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