Iran Protest: 'मुल्ला ईरान छोड़ो..’ गिरती इकॉनोमी के बीच क्या ईरान छोड़कर भागेंगे खामेनेई? देखें Video
Iran Protest: बिगड़ती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं और सुरक्षा बलों के जवान भी। अधिकारियों ने इन मौतों की पुष्टि की है। यह आंदोलन साल 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। जैसे-जैसे आंदोलन अपने पांचवें दिन में पहुंचा, यह तेहरान से निकलकर देश के कई ग्रामीण और प्रांतीय इलाकों तक फैल गया।
तेहरान से गांवों तक फैला आंदोलन
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत रविवार को तेहरान के प्रमुख बाजारों से हुई थी। जिसमें 'मुल्ला ईरान छोड़ो' जैसे नारे जनता सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ लगा रही है। इसकी बड़ी वजह थी ईरानी मुद्रा रियाल का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच जाना। जैसे ही रियाल की कीमत गिरी, वैसे ही खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छूने लगे। इसके बाद मंगलवार तक यह गुस्सा शिराज, इस्फ़हान, करमनशाह और फ़सा जैसे शहरों में भी फैल गया।

'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारों से गूंजा ईरान
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी खुलकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। "तानाशाह मुर्दाबाद", "खामेनेई मुर्दाबाद" और "शर्म करो, शर्म करो" जैसे नारे लगाए जा रहे हैं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी झड़प भी देखने को मिली है। अगर ये प्रदर्शन और तेज होने के साथ ईरान के गांव-गांव तक पहुंचता है तो अली खामेनेई की गद्दी के लिए ये एक बड़ा खतरा होगा।
बाजार व्यापारियों ने संभाली आंदोलन की कमान
न्यूयॉर्क पोस्ट (NY Post) के अनुसार, विपक्षी संगठन एमईके (MEK) द्वारा जारी फुटेज में ईरान के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी भीड़ सड़कों पर उतरती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि इन प्रदर्शनों की अगुवाई तेहरान के बाजार व्यापारी कर रहे हैं। यही वजह है कि आंदोलन तेजी से पूरे देश में फैलता जा रहा है।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने मानी जनता की नाराजगी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए जनता के गुस्से को स्वीकार किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की "वैध मांगों" को सुनने का वादा किया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अस्थिरता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने हालात संभालने के लिए केंद्रीय बैंक प्रमुख को बदला और विश्वविद्यालयों के आसपास सुरक्षा भी बढ़ा दी।
2022 के बाद सबसे बड़ी अशांति
मौजूदा विरोध प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलन के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। महसा अमीनी को हिजाब न पहनने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था, जहां उनकी मौत हो गई थी। इस बार मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी, पानी की कमी और शासन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
दो दिनों में सात मौतें, हालात और बिगड़े
बुधवार और गुरुवार के बीच सिर्फ दो दिनों में सात लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों दोनों ने इसकी पुष्टि की है। इनमें प्रदर्शनकारी और ईरानी सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। राज्य मीडिया ने बताया कि वित्तीय संकट से उपजे विरोध को शांत करने की कोशिशों के दौरान कई जगह हिंसा हुई।
लोरस्तान बना हिंसा का केंद्र
लोरस्तान प्रांत का आज़ना शहर इस हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। ऑनलाइन वीडियो में सड़कों पर आग जलती हुई और गोलियों की आवाजें सुनाई देती हैं। अर्ध-सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी ने यहां तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है।
रियाल की हालत बदतर, $1 = 14 लाख रियाल
सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रियाल की कीमत इतनी गिर चुकी है कि अब 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 1.4 मिलियन रियाल के बराबर हो गया है। दुकानदार, छात्र और बाजार व्यापारी बढ़ते किराए और जरूरी सामान की कमी से परेशान हैं।
खामेनेई पर बढ़ता दबाव
सीएनएन के मुताबिक, 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई इस वक्त कई मोर्चों पर संकट से जूझ रहे हैं-आर्थिक पतन, पानी की कमी, नागरिक अवज्ञा और कमजोर सैन्य स्थिति। विश्लेषकों का मानना है कि वह बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं, क्योंकि हर विकल्प में बड़ा जोखिम है।
गिरफ्तारियां तेज, मीडिया पर सख्ती
तेहरान और अन्य शहरों में अब तक दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कौहदाश्त में ही 20 लोगों की गिरफ्तारी हुई। राज्य टीवी ने सात और गिरफ्तारियों और 100 तस्करी की पिस्तौल जब्त होने की जानकारी दी। मीडिया कवरेज सीमित है क्योंकि पत्रकारों को रिपोर्टिंग पर गिरफ्तार किया जा रहा है, जैसा कि 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुआ था।
आगे क्या होगा?
ईरान में हालात फिलहाल शांत होते नहीं दिख रहे। राजधानी तेहरान में प्रदर्शन थोड़े धीमे जरूर पड़े हैं, लेकिन ग्रामीण और प्रांतीय इलाकों में आंदोलन और तेज़ हो रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ईरान का धार्मिक शासन आने वाले दिनों में और कड़ा रुख अपना सकता है।
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