Ali Khamenei के दफन होते ही बड़ी तैयारी में जुटा Iran, सैटेलाइट इमेज से खुली पोल, क्या करेंगे US-इजरायल?
Iran Nuclear Weapon: वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जून के आखिर मे हुआ सीजफायर अब दोनों तरफ से खत्म हो चुका है। जहां एक तरफ ट्रंप ने वापस ईरान पर हमले शुरू कर दिए हैं तो वहीं ईरान ने भी अरब देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दी हैं। कुल मिलाकर दोनों देश जून से पहले वाली स्थिति में पहुंच चुके हैं। अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक, न्यूक्लियर हथियार न बनाने के ईरानी वादे पर संशय बढ़ गया है।
यह स्थिति इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी और सीएनएन की एक ज्वॉइंट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद बनी है, जिसमें कुछ सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान अपने कुछ संदिग्ध ठिकानों पर फिर से गतिविधियां शुरू कर रहा है। इन इनपुट्स के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर समझौते को समाप्त बताते हुए ईरान पर नए हवाई हमलों की घोषणा कर दी है।

क्या चल रहा ईरान के पर्चिन बेस पर?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय जिस जगह पर सबसे ज्यादा शक है वह है ईरान का पर्चिन मिलिट्री बेस, जिसे न्यूक्लियर हथियारो से जुड़े सेंसटिव एक्सप्लोसिव का संभावित केंद्र माना जाता है। इस साल की शुरुआत में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों से ठीक पहले, तेहरान ने इसकी सुरक्षा के लिए एक कंक्रीट की दीवार बनाई थी, जो हमलों में तबाह हो गई थी।
हालिया तस्वीरो के एनालिसिस से ये पता चलता है कि ईरान इस नुकसान की मरम्मत करने की कोशिश कर रहा है। जून में जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, तब हमलों से बने गड्ढों को ढकने के लिए वहां कुछ टेम्परेरी कवर देखे गए थे। वहीं जुलाई की शुरुआत की तस्वीरों में इन कवर्स की जगह लोहे की जालियां लगी दिखीं, जिससे अब शक हो रहा है कि वहां कुछ तो पक रहा है।
पिकैक्स माउंटेन की सुरंगों का सच
पर्चिन के अलावा पिकैक्स माउंटेन की अंडरग्राउंड सुरंगो के आसपास भी हलचल देखी गई है। जून के समझौते के ठीक बाद आई तस्वीरों में इस पहाड़ी ठिकाने पर भारी वाहनों की आवाजाही रिकॉर्ड की गई है। अमेरिकी डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिप्लोमैटिक बातचीत के तुरंत बाद इस तरह की गतिविधिया वाशिंगटन को दिए गए भरोसे के उलट हो सकती हैं। इसी संदिग्ध हलचल की वजह से दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की स्थिति गहरी होती दिख रही है।
मिसाइल और न्यूक्लियर सेंटरों की वर्तमान स्थिति
राहत की बात यह है कि इस्फ़हान, फोर्डो और नतांज जैसे ईरान के मुख्य न्यूक्लियर रिएक्टर्स में फिलहाल किसी नए कंस्ट्रक्शन के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, मामले को करीब से देखने वाले लोगों का मानना है कि ईरान अपनी मिसाइल स्टोरेज यूनिट्स को ठीक करने में लगा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले भी तेहरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर चिंता जता चुके हैं। खुफिया रिपोर्टो के आधार पर यह कहा जा रहा है कि ईरान अपने एयर डिफेंस और मिसाइल लॉन्च पैड्स को दोबारा दुरुस्त करने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल अमेरिका ईरान की पल-पल की हरकत पर नजर रखे हुए है। अगर ईरान दोबारा न्यूक्लियर हथियार बनाता है तो अमेरिका और इजरायल इसका पता लगा सकते हैं। और यदि ऐसा हुआ तो ये युद्ध और ज्यादा भीषण हो सकता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications