कंगाल पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट में घसीटेगा ईरान, 18 अरब डॉलर का ठोकेगा मुकदमा, कांपे शहबाज

पाकिस्तान ने सऊदी अरब और अमेरिका के प्रेशर में आकर हमेशा से ईरान को धोखा दिया है और इस बार फिर से पाकिस्तान डरा हुआ है। जबकि, अधिकारियों का कहना है, कि ईरान के पास कोई और विकल्प नहीं बचा है।

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Pakistan News: कंगाली के दलदल में फंसे पाकिस्तान को ईरान बहुत बड़ा झटका देने वाला है और ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट में घसीटने की धमकी दी है। पाकिस्तानी अखबर ट्रिब्यून एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कहा है, कि वो पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट में मुकदमा दायर करेगा। अगर, ईरान ऐसा करता है, तो फिर पहले से ही आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाएगी, क्योंकि उसकी स्थिति अरबों डॉलर का जुर्माना भरने की नहीं है। ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना (आईपी) को लेकर ईरान नाराज है और उसने धमकी दी है, कि वो पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट में मुकदमा करेगा।

पाकिस्तान से क्यों गुस्साया है ईरान?

पाकिस्तान से क्यों गुस्साया है ईरान?

ईरान की धमकी के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ डर गये हैं और उन्होंने कहा है, कि "दोनों देशों के बीच कानूनी लड़ाई से बचने के लिए राजनयिक चैनलों का उपयोग करने का इरादा रखना चाहिए।" हालांकि, ईरान ने इस ऑफर को ठुकरा दिया है। सूत्रों के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अधिकारियों ने बताया है, कि ये स्थिति के काफी ज्यादा संवेदनशील है, लिहाजा शहबाज शरीफ डिप्लोमेटिक बातचीत का ऑफर दे रहे हैं। वहीं, घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने कहा, कि ईरान का दावा है, कि उसने अपने क्षेत्र में ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना (आईपी) के पहले हिस्से का काम कर लिया है, जिसमें उसने 2 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं, लेकिन दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने निर्माण पर काम करना भी शुरू नहीं किया है। ईरान और पाकिस्तान के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें साफ साफ लिखा गया है, कि अगर कोई पक्ष प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद पीछे हटता है, या फिर काम बंद कर देता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा होगा और 18 अरब डॉलर का हर्जाना भरना पड़ेगा और इसीलिए पाकिस्तान डरा हुआ है।

पाइपलाइन प्रोजेक्ट से क्यों पीछे हटा पाकिस्तान?

पाइपलाइन प्रोजेक्ट से क्यों पीछे हटा पाकिस्तान?

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के दबाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सरकार ने एलएनजी ग्वादर पाइपलाइन को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला किया था। उस समय, पाकिस्तान का मानना था, कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और ईरान के बीच स्थिति स्थिर हो जाती है, तो वह ईरान-पाकिस्तान को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर की पाइपलाइन का निर्माण करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पाकिस्तान, जिसकी विदेश नीति अलग अलग देशों पर टिकी है, उसकी स्थिति ना को सऊदी अरब को नाराज करने की है और ना ही ईरान की, लिहाजा अब शहबाज सरकार के हाथ-पांव फूले हुए हैं। ट्रिब्यून के मुताबिक, साल 2017 में सऊदी अरब और कतर के बीच डिप्लोमेटिक तनाव हो गया, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन और कतर के साथ एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट, दोनों को रोकने के लिए दबाव बनाया गया। हालांकि, पाकिस्तान ने केवल एलएनजी ग्वादर सौदे को ही टाला, जिसे आईपी गैस पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा माना जाता था और पाकिस्तान ने कतर के साथ एलएनजी सौदे को जारी रखा।

ईरान के पास और कोई विकल्प नहीं?

ईरान के पास और कोई विकल्प नहीं?

वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है, कि ईरान के पास अब अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला दायर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अधिकारियों ने कहा, कि "अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला दर्ज नहीं करता है, तो उसे पाकिस्तान के खिलाफ इस दावे को वापस लेना होगा, कि परियोजना पूरी नहीं होने की स्थिति में, कोई पक्ष कानूनी कार्रवाई कर सकता है"। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा, कि "अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय अदालत में नहीं जाता है, तो इसके लिए ईरान को आईपी गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर अपने 18 अरब डॉलर के दावे को सरेंडर करना होगा।" लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि भला ईरान ऐसा क्यों करेगा? हालांकि ईरान ने पाकिस्तान को मुकदमा दर्ज करने के अपने फैसले की जानकारी अभी तक नहीं दी है, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है, कि वह आईपी गैस पाइपलाइन परियोजना पर अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर सकता है।

पाकिस्तान को भरना होगा 18 अरब डॉलर

पाकिस्तान को भरना होगा 18 अरब डॉलर

पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव ने हाल ही में लोक लेखा समिति (पीएसी) को सूचित किया है, कि आईपी परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू करने में फेल रहने की वजह से पाकिस्तान को 18 अरब डॉलर के दावों का खतरा है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री शहबाज कानूनी लड़ाई से बचने का रास्ता खोजने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। शहबाज का मानना है, कि ईरान भी मुस्लिम देश है और पाकिस्तान भी मुस्लिम देश है और शहबाज शरीफ मुस्लिम कार्ड खेलकर 18 अरब डॉलर के दावे से बचना चाह रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान ने अतीत में कई बार ईरान के खिलाफ अमेरिका और सऊदी का साथ दिया है, लिहाजा ईरान की नाराजगी हमेशा से पाकिस्तान को लेकर रही है। अफगानिस्तान को लेकर ईरान ने सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लिहाजा उम्मीद काफी कम है, कि ईरान पाकिस्तान को लेकर इंटरनेशनल कोर्ट नहीं जाएगा।

13 सालों से कोई बड़ा समझौता नहीं

13 सालों से कोई बड़ा समझौता नहीं

पाकिस्तान ने हमेशा से इस्लामिक कार्ड खेलकर ईरान से व्यापार करने की कोशिश की है, जिसमें वो नाकाम रहा है। पाकिस्तान पहले ईरानी तेल का आयात करता था, हालांकि, 2010 में ईरान ने पाकिस्तान को तेल देना बंद कर दिया था, क्योंकि पाकिस्तान की रिफाइनरियां, पैसों का भुगतान नहीं कर पा रही थीं। ऊपर से तो ये मामला पैसों का लग रहा था, लेकिन असल में पैसों का नहीं, बल्कि अमेरिकी प्रेशर का मामला था और पाकिस्तान ने अमेरिका को खुश करने के लिए ईरान को धोखा दे दिया था, लिहाजा माना जा रहा है, कि ईरान पाकिस्तान के दोगलापन को माफ नहीं करेगा।

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