Iran Vs America: जंग के बीच भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी, नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने के निर्देश
Indian Embassy Iran Advisory: पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच 100 दिनों से चल रहे संघर्ष में नए हमलों और जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र को फिर से युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। इसी बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने नागरिकों के लिए हाई-प्रायोरिटी एडवाइजरी जारी किया है।
दूतावास ने ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद भारतीयों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है। बढ़ते सैन्य तनाव, मिसाइल हमलों और कूटनीतिक प्रयासों पर मंडराते खतरे ने नई चिंता पैदा कर दी है।

Tehran India embassy travel Warning: भारतीय दूतावास ने क्या एडवाइजरी जारी की?
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि क्षेत्र की ताजा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक ईरान की यात्रा बिल्कुल न करें। जो भारतीय फिलहाल ईरान में मौजूद हैं, उन्हें उपलब्ध परिवहन साधनों से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी गई है। दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं और सुरक्षा जोखिम पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो गया है।
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इजराइल-ईरान के बीच तनाव फिर क्यों बढ़ा?
रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं। इजराइल ने कुछ रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद दोनों तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज हो गया। इस संघर्ष को 100 दिन पूरे हो चुके हैं और अब तक बनी हुई नाजुक शांति व्यवस्था भी खतरे में पड़ गई है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप क्यों चाहते हैं कि युद्ध न बढ़े?
Donald Trump लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित परमाणु समझौता अब भी संभव है और नए हमले इस प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र को लगातार जवाबी हमलों के चक्र में फंसने से बचाना जरूरी है। उन्होंने इजराइल और ईरान दोनों से बातचीत की राह पर लौटने की अपील की है ताकि बड़े क्षेत्रीय युद्ध को रोका जा सके।
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पूरे क्षेत्र और दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है?
तनाव बढ़ने का असर सिर्फ इजराइल और ईरान तक सीमित नहीं है। ईरान समर्थित हूती समूह ने लाल सागर में इजराइली शिपिंग पर रोक लगाने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो पश्चिम एशिया में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ जाएगी, जिसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।












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