ईरान में CCTV की मदद से महिलाओं पर रखा जाएगी नजर, बिना हिजाब के दिखीं तो आएगा वार्निंग मैसेज
1979 से पहले शाह पहलवी के शासनकाल में ईरानी महिलाएं को कपड़ों के मामले में काफी स्वतंत्रताएं मिली थीं। ईरान में 1979 की क्रांति के बाद महिलाओं की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया गया।

Image: Oneindia
ईरान की रूढ़िवादी सरकार हिजाब कानून के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज को दबाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रही है। सरकार ने बिना हिजाब के घूमने वाली महिलाओं का पता लगाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर कैमरे लगाना शुरू कर दिया है। ईरान पुलिस ने शनिवार को इसकी घोषणा की है।
ईरान के पुलिस प्रमुख ने कहा कि हिजाब से जुड़े नए नियमों को न मानने पर महिलाओं पर मुकदमा चलाया जाएगा। इसके लिए सड़कों पर स्मार्ट कैमरा महिलाओं की जासूसी करेंगे। इसकी मदद से सिर न ढंकने वाली महिलाओं को 'परिणाम भुगतने की चेतावनी' वाला टेक्स्ट मेसेज भेजा जाएगा।
पुलिस प्रमुख के मुताबिक सरकार के इस कदम से "हिजाब कानून के विरोध को रोकने में मदद मिलेगी"। देश की मिजान समाचार एजेंसी समाचार और अन्य राज्य मीडिया ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि इस तरह के प्रतिरोध से देश की आध्यात्मिक छवि धूमिल होती है और असुरक्षा फैलती है।
कुछ दिन पहले ही ईरान में महिलाओं के ड्रेस कोड को लेकर एक नया कानून बनाया था। इसके तहत अगर वो हिजाब नहीं पहनेंगी तो उन्हें 49 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। ईरान के सांसद हुसैनी जलाली ने इसकी पुष्टि की थी।
बीते साल महसा अमिनी की मौत के बाद से ही ईरान में हिजाब के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। मोरैलिटी पुलिस ने कुर्द महिला महसा को हिजाब न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके बाद से बड़ी संख्या में ईरानी महिलाओं ने बुर्का का विरोध करना शुरू कर दिया, जिसके बाद ईरान के सुरक्षा बलों ने हिंसक रूप से विद्रोह को दबा दिया।
ईरान में 1979 की क्रांति के बाद लगाए गए इस्लामी शरिया कानून के तहत, महिलाओं को अपने बालों को ढकने का कानून लागू किया गया है। उन्हें लंबे, ढीले-ढाले कपड़े पहनने के लिए मजबूर किया गया है। शरिया कानून के खिलाफ काम करने वाली महिलाओं को जुर्माना या गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है।












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