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परमाणु समझौते पर ईरान ने पश्चिमी देशों के सामने रखी शर्त, दिया 60 दिन का वक्त

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी
AFP
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी

ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल पश्चिमी देशों ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह परमाणु समझौते के नियमों को तोड़ेगा तो उसे इसके बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने कहा है कि जब तक ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं पर टिका रहेगा तब तक वे भी इस परमाणु समझौते का समर्थन करते रहेंगे.

दरअसल अमरीका ने पिछले साल खुद को इस समझौते से अलग करते हुए ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव चल रहा है.

साल 2015 में हुए इस समझौते का उद्देश्य ईरान की परमाणु महत्वकांक्षाओं पर अंकुश लगाना था और इसके बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों में उसे ढील दी गई थी.

ईरान ने अब इस समझौते से खुद को आंशिक तौर पर अलग कर दिया है यानी समझौते की कुछ शर्तों को वो नहीं मानेगा.

ईरान पर नए प्रतिबंध लगाकर ट्रंप प्रशासन ने उसकी अर्थव्यवस्था को ख़ासा नुकसान पहुंचाया है. ईरान की मुद्रा अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई और महंगाई की दर करीब चौगुनी हो गई है.

ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा कि उनकी तरफ से उठाए गए ताज़ा कदम समझौते के तहत ही हैं.

ईरान ने यूरोपीय देशों को 60 दिन का वक़्त दिया है और कहा है कि वो अमरीका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान को बचाने के लिए कदम उठाएं.

इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा न करने की सूरत में वह यूरेनियम का उत्पादन एक बार फिर शुरू कर देगा.

वहीं दूसरी तरफ लंदन में मौजूद अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमरीका ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए अपने पश्चिमी साथियों के साथ खड़ा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते पर अमरीका के कुछ अलग विचार हैं.

ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़
Reuters
ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़

कौन से देश समझौते में शामिल?

चीन और रूस के अलावा ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी अभी भी ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल हैं. अमरीका पिछले साल खुद को इस समझौते से अलग कर चुका है.

ब्रिटेन के विदेश सचिव जेरेमी हंट ने ईरान के ताज़ा कदम को "अस्वीकार" करते हुए ईरान से अपील की है कि वह आगे और ऐसे कदम ना उठाए. साथ ही उन्होंने ईरान को "समझौते के नियमों का पालन करने की सलाह" भी दी.

जेरेमी ने कहा कि ईरान को इस समझौते को तोड़ने से पहले इसके भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.

जेरेमी हंट (बाएं) और माइक पोम्पियो
Reuters
जेरेमी हंट (बाएं) और माइक पोम्पियो

जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास ने इस समझौते को यूरोप की सुरक्षा के लिए अहम बताया और कहा कि वे अभी भी समझौते के साथ हैं.

फ़्रांस के रक्षा मंत्री फ़्लोरेंस पार्ले ने मीडिया से कहा कि यूरोपीय ताकतें इस समझौते को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो ईरान को इसके बुरे परिणाम और अधिक प्रतिबंध भुगतने पड़ सकते हैं.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने समझौते में शामिल सभी पक्षों से उनकी प्रतिबद्धताओं पर टिके रहने की अपील की, साथ ही कहा कि पश्चिमी देश "मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहते" हैं.

चीन ने कहा कि वह ईरान पर लगाए गए अमरीका के प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता है.

इन सबके बीच अमरीकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने इस मसले पर ज़्यादातर चुप्पी साधनी ही बेहतर समझी और बस इतना कहा कि वे ईरान के अगले कदम का इंतज़ार करेंगे.

हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विशेष सहायक टिम मौरिसन ने कहा कि ईरान का यह कदम यूरोप को ब्लैकमेल करने के लिए है. उन्होंने यूरोपीय देशों से 'इंसटेक्स' (इंस्ट्रूमेंट इन सपोर्ट ऑफ़ ट्रेड एक्सचेंज) से पीछे ना हटने की अपील की है.

ये भी पढ़ेंःअब उत्तर कोरिया नहीं जाएंगे अमरीकी विदेश मंत्री

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ईरान परमाणु समझौता
AFP
ईरान परमाणु समझौता

इंसटेक्स क्या है?

यह पेमेंट करने का एक नया तरीका है, जिसे ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने इस साल जनवरी में तैयार किया ताकि वो ईरान पर लगे प्रतिबंधों में किसी तरह की छेड़छाड़ किए बिना उसके साथ व्यापार जारी रख सकें.

इस तरह के व्यापार में प्रमुख तौर पर ईरानी लोगों की ज़रूरतों का सामान शामिल है जैसे खाद्य पदार्थ, दवाइयां और अन्य सामान जिन पर प्रतिबंध नहीं लगा है.

ईरान के लिए विदेशी लेनदेन का सबसे प्रमुख उत्पाद तेल है, लेकिन इंसटेक्स में तेल शामिल नहीं होता.

ईरान चाहता है कि यूरोपीय देश इसे भी इसमें शामिल करें. लेकिन ऐसा करने से व्यापारी अमरीका के प्रतिबंधों की ज़द में आ सकते हैं.

ईरान परमाणु समझौता
EPA
ईरान परमाणु समझौता

ईरान ने क्या कदम उठाया?

ईरान ने परमाणु समझौते के दो हिस्सों से खुद को अलग किया है, जिन्हें ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन (जेसीपीओए) कहा जाता है. इसके तहत सरप्लस यूरेनियम और हेवी वॉटर की बिक्री शामिल होती है.

इस समझौते के तहत परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले सरप्लस यूरेनियम को ईरान अपने पास नहीं रख सकता और उसे विदेश में बेचता है.

ईरान का कहना है कि अगर समझौते में शामिल देश अमरीका के लगाए प्रतिबंधों का साथ नहीं देते हैं और ईरान की आर्थिक हालत पर विचार करते हैं तो वह 60 दिन के बाद दोबारा यूरेनियम की बिक्री शुरू कर देगा.

ईरान ने ये भी चेतावनी दी है कि वो तय सीमा से अधिक मात्रा में अधिक एनरिच्ड यूरोनियम बनाना शुरु कर देगा और साथ ही अरक हेवी वॉटर रीएक्टर पर काम करना शुरु करेगा.

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