ईरान के स्कूलों में अंग्रेजी और अरबी भाषाओं पर लगा प्रतिबंध, जानिए क्यों लेना पड़ा सरकार को ये फैसला?
ईरान में तत्काल प्रभाव से विदेशी भाषाओं पर बैन लगा दिया गया है। ईरान की राज्य मीडिया के मुताबिक देश में किंडरगार्टन और प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी और अरबी सहित सभी विदेशी भाषाओं के शिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया है।
ईरानी शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी मसूद तेहरानी-फरजाद ने कहा कि स्कूलों छोटी कक्षाओं में विदेशी भाषाओं को पढ़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे की ईरानी पहचान बन रही होती है।

तेहरानी-फ़रजाद ने साफ किया, "विदेशी भाषाओं के शिक्षण पर प्रतिबंध न केवल अंग्रेजी, बल्कि अरबी सहित अन्य भाषाओं पर भी लागू होता है।"
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पहले भी विदेशी भाषाओं खासकर अंग्रेजी की पढ़ाई को लेकर चिंता जता चुके हैं।
खामेनेई, जिनके पास राज्य के सभी मामलों में अंतिम अधिकार है, ने 2016 में "नर्सरी स्कूलों में फैल रही अंग्रेजी भाषा की शिक्षा" पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि इससे विदेशी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
ईरान में अंग्रेजी भाषा की योग्यता को एक महत्वपूर्ण कौशल के रूप में देखा जाता है और इसका व्यापक रूप से अध्ययन किया जाता है।
खामेनेई कई बार कह चुके हैं कि कम उम्र से बच्चों को अंग्रेजी सिखाने से "पश्चिमी सांस्कृतिक घुसपैठ" हो सकती है। उनका कहना है कि विज्ञान की भाषा जरूरी नहीं कि अंग्रेजी हो। वे कह चुके हैं कि बच्चों को अन्य भाषाएं जैसे स्पेनिश, फ्रेंच या पूर्वी भाषाएं भी सिखाई जानी चाहिए।
आपको बता दें कि इस्लामिक रिपब्लिक ने 2018 में ही प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि यह माध्यमिक स्कूल से पढ़ाई जाती है।
ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति हसन रूहानी उनसे असहमत दिखे थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी जानने से युवाओं को नौकरी बाजार में शामिल होने में मदद मिलेगी। लेकिन उनके पास प्रतिबंध को रोकने की शक्ति बहुत कम थी।
फारसी ईरान की एकमात्र आधिकारिक भाषा है। फारसी भाषा को अरबी से काफी प्रभावित माना जाता है। इसमें फ्रेंच और अंग्रेजी से भी कई शब्द उधार लिए गए हैं।
जून 2022 में, ईरान के शिक्षा मंत्रालय ने अंग्रेजी भाषा के एकाधिकार को खत्म करने के लिए देश भर के स्कूलों में "ट्रायल टू टीच फ्रेंच" शुरू करने की अपनी योजना बनाई थी।
सितंबर में देश ने ईरानी या दोहरे राष्ट्रीय छात्रों के अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया, यह कहते हुए कि बच्चों पर देश के स्कूल पाठ्यक्रम का पालन करने का दायित्व है।
इस निर्णय के कारण तेहरान में फ्रांसीसी और जर्मन संस्थानों सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में छात्रों की संख्या में अचानक गिरावट आ गई।
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