दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र, सबसे ज्यादा आबादी वाला मुस्लिम देश.. इंडोनेशिया चुनाव क्यों है महत्वपूर्ण?
Indonesia Election Today: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र और दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले मुस्लिम देश इंडोनेशिया में आज मतदान हो रहे हैं और करीब 20 करोड़ लोग नई सरकार को चुनने के लिए मतदान केन्द्र पहुंचेंगे। इंडोनेशिया का इस बार का चुनाव हर किसी के अनुमान से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
ऐसा इसलिए, क्योंकि इंडोनेशिया को इस बार हर हाल में एक नया राष्ट्रपति मिलने वाला है। वर्तमान इंडोनेशियाई राष्ट्रपति, जोको विडोडो, जिन्हें जोकोवी के नाम से भी जाना जाता है, वो पहले ही अधिकतम दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, इसलिए इस साल का चुनाव एक दशक में नेतृत्व में पहला बदलाव होगा।

निराशाजनक मानवाधिकार रिकॉर्ड वाले पूर्व जनरल प्रबोवो सुबियांतो सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, दो अन्य उम्मीदवार, पूर्व गवर्नर अनीस बस्वेडन और गांजर प्रणोवो, चुनाव में प्रबोवो से पीछे चल रहे हैं।
जनरल प्रबोवो सुबियांतो अगर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बनते हैं, तो फिर इंडोनेशिया में मानवाधिकार रिकॉर्ड और भी ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है।
इंडोनेशिया में इलेक्शन कैसा होगा?
इंडोनेशिया आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा इस्लामिक देश है, जहां करीब 27 करोड़ लोग रहते हैं और करीब 20 करोड़ 40 लाख लोगों के पास मत डालने का अधिकार है। इंडोनेशिया में चुनाव के दिन सरकारी छुट्टी रहती है, इसलिए, इंडोनेशिया के आम चुनाव आयोग के अनुसार इस बार मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत से ज्यादा होने की संभावना है।
इंडोनेशिया में 18 राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं, जिनमें 575 संसदीय सीटें उपलब्ध हैं।
नए राष्ट्रपति को चुनने के साथ-साथ, इंडोनेशियाई लोग 14 फरवरी को राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर नए सांसदों के लिए भी मतदान करेंगे, जो दुनिया का सबसे बड़ा एक दिन में होने वाला चुनाव होगा।

विधायी चुनाव क्यों मायने रखते हैं?
इंडोनेशिया को कभी-कभी 'संसदीय विशेषताओं वाला राष्ट्रपति लोकतंत्र' कहा जाता है, जिसका अर्थ है, कि कार्यकारी और विधायी दोनों शाखाएं, कानून बनाने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं और किसी भी कानून को दोनों शाखाओं से अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
इंडोनेशिया में आम चुनाव राजनीतिक दलों की लड़ाई है और इसके बाद गहन खरीद-फरोख्त होती है, जो देश की प्रमुख कानून बनाने वाली संस्था, संसद के निचले सदन और राष्ट्रपति के साथ इसके संबंधों को निर्धारित करती है।
लिहाजा, इंडोनेशिया का चुनाव भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड बना डालता है। राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे के आधार पर, राजनीतिक गठबंधन बदल सकते हैं, लिहाजा राष्ट्रपति का चुनाव दूसरे राउंड में भी जा सकता है।

किस पार्टी को मिल सकता है जनाधार?
इंडोनेशियाई डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ स्ट्रगल (पीडीआई-पी) वर्तमान में संसद में 9 पार्टियों में से सबसे बड़ी पार्टी है। पूरे देश में लगभग पांचवें वोट के साथ एक बार फिर से सर्वेक्षण में उसका दबदबा रहने का अनुमान है। लेकिन 2019 में पिछले आम चुनाव के बाद से इसकी लोकप्रियता कम हो गई है और इसके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गंजर प्रणोवो सर्वेक्षणों में पीछे चल रहे हैं।
सर्वेक्षणों के मुताबिक, दूसरे नंबर पर ग्रेट इंडोनेशिया मूवमेंट पार्टी है, जिसके उम्मीदवार प्रबोवो सुबियांतो को लगभग 17 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद है और वो देश के अगले राष्ट्रपति बन सकते हैं।
वहीं, तीन पार्टियों ने एक साथ गठबंधन कर अनीस बसवेदन को अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया है।
कुल 18 पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं और निवर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो के बेटे की अध्यक्षता वाली एक नई पार्टी इंडोनेशिया सॉलिडेरिटी पार्टी (पीएसआई) के पहली बार संसद में पहुंचने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए पार्टियों को देश भर में कम से कम चार प्रतिशत वोटों की आवश्यकता होती है।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को नामांकित करने के लिए, किसी पार्टी या पार्टियों के गठबंधन को राष्ट्रीय संसद में कम से कम 20 प्रतिशत सीटों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता होती है।
क्या राष्ट्रपति को संसदीय समर्थन की गारंटी चाहिए होती है?
नया राष्ट्रपति कितना सफल हो सकता है, यह निर्धारित करने में संसद एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। एक बड़ा विपक्ष, कानून में अटकाकर राष्ट्रपति के फैसलों को मुश्किल बना सकता है। लिहाजा, राष्ट्रपति आंख मुंदकर फैसले नहीं ले सकते हैं।
निवर्तमान राष्ट्रपति विडोडो, संसद के प्रमुख दलों के साथ गठबंधन बनाने में सफल रहे, जिससे उन्हें अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली। लेकिन, सत्ता परिवर्तन से पहले ये गठबंधन अस्थिर हैं और उनके उत्तराधिकारी के लिए राह आसान नहीं होगी।
दुनिया के लिए इंडोनेशिया चुनाव के मायने
इंडोनेशिया एक उभरता हुआ राष्ट्र है।
पिछले साल, एक अमेरिकी समाचार प्रकाशन, फॉरेन पॉलिसी द्वारा इसे छह स्विंग राज्यों में से एक नामित किया गया था, जो विश्व राजनीति की दिशा निर्धारित करेगा। इसके अलावा, डिप्लोमैट ने बताया, कि 2027 तक इसकी अर्थव्यवस्था दुनिया में छठे स्थान पर होने की उम्मीद है।
प्रत्येक दावेदार ने दुनिया में अपने देश के स्थान के लिए एक अलग दृष्टिकोण सामने रखा है, जो असंख्य अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों - भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, और बहुत कुछ - और आर्थिक और सामाजिक कल्याण पर उनके प्रभाव को संबोधित और प्रबंधित करना चाहता है।
लिहाजा, अगर प्रबोवो सुबियांतो चुनाव जीतते हैं, तो देश में राष्ट्रवाद की भावना जोर पकड़ेगी। उन्होंने इंडोनेशिया की "अच्छे पड़ोसी" नीति को कूटनीतिक रूप से बनाए रखने का वादा किया है। लेकिन, वह अर्थशास्त्र के मामले में "नवउदारवादी दृष्टिकोण का पालन नहीं करते हैं" और उनका संरक्षणवादी उपायों का समर्थन करने का इतिहास रहा है।
प्रबोवो सुबियांतो ने संकेत दिया है, कि वो जियो-पॉलिटिक्स को इंडोनेशिया की घरेलू राजनीति से जोड़कर आगे ले जाएंगे। लिहाजा, इंडोनेशिया के चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं और देश नये राष्ट्रपति की लहर में अगले कुछ सालों तक फंसा रह सकता है।












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