चीन-पाकिस्तान और अमेरिका-रूस.. सिंगापुर से मोदी सरकार के 'चाणक्य' ने दुनिया को क्या 4 संदेश दिए?
Jaishankar's Singapore Visit: सिंगापुर में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत के दौरान, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक कूटनीति, भारत-सिंगापुर संबंध और लुक ईस्ट नीति को लेकर दुनिया को भारत का संदेश दिया है। जयशंकर की चर्चा के दौरान जहां चीन पर तंज कसा है, वहीं अमेरिका और रूस के साथ भी भारत के संबंधों पर खुलकर बात की है।
भारतीय समुदाय से बात करते हुए मोदी सरकार के 'चाणक्य' एस. जयशंकर ने भारत और सिंगापुर के बीच की रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी बात की है। आइये जानते हैं, भारतीय विदेश मंत्री के संबोधन की चार बड़ी बातें।

1. चीन और पाकिस्तान पर तंज
इस सवाल का जवाब देते हुए, कि भारतीय अधिकारी अन्य देशों के राजनयिकों के साथ संवेदनशील, भाषाई रूप से अलग-अलग मुद्दों पर कैसे संपर्क करते हैं, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, कि "कूटनीति का मतलब इसे (विभिन्न दृष्टिकोण) सुलझाने और किसी प्रकार के समझौते के लिए इसे सुलझाने आने का एक तरीका ढूंढना है।"
फिर, जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया, कि कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं, जब स्पष्टता होती है और कोई भ्रम नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर आतंकवाद को लेकर उन्होंने कहा, कि "आप इसे किसी भी भाषा में ले सकते हैं, लेकिन आतंकवादी किसी भी भाषा में आतंकवादी ही होता है।"
वहीं, बिना चीन और पाकिस्तान का नाम लिए भारतीय विदेश मंत्री ने चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और भारत के कुछ प्रस्तावों में बाधा डालने की ओर इशारा किया गया। चीन ने कई पाकिस्तानी आतंकवादियों को वैश्विक आतंकी नामित होने की कोशिशों को रोक दिया है। जिसपर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "आतंकवाद जैसी किसी चीज़ को कभी भी माफ़ करने या बचाव करने की अनुमति न दें, क्योंकि वे एक अलग भाषा या एक अलग स्पष्टीकरण का उपयोग कर रहे हैं।"
2. भारत सिंगापुर संबंध
भारत और सिंगापुर के बीच लंबे समय से चले आ रहे और विकसित हो रहे संबंधों पर विचार करते हुए, जयशंकर ने टिप्पणी करते हुए कहा, कि कि दोनों देशों के संबंध सुभाष चंद्र बोस द्वारा भारतीय राष्ट्रीय सेना की स्थापना के समय से हैं।
उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद व्यवसाय-केंद्रित प्रवासी भारतीयों से कहा, कि दोनों देशों के संबंध, जो लुक ईस्ट पॉलिसी और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के रूप में शुरू हुए थे, भारत-प्रशांत में भारत तक बढ़ गए हैं। उन्होंने इसका श्रेय वैश्वीकरण को दिया। जयशंकर ने कहा, सिंगापुर भारत के वैश्वीकरण में हमारा भागीदार रहा है और वह भूमिका और सहयोग कुछ ऐसा है, जिसे हम काफी महत्व देते हैं।
3. भारतीयों और भारत मूल के लोगों की सुरक्षा
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, कि यह भारत है जिसे अगर कोई विकल्प चुनना होगा, तो वह अपने नागरिकों के कल्याण के लिए विकल्प चुनेगा। उन्होंने कहा, कि भारत अपने नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों का ख्याल रखता है।
यूक्रेन और सूडान की स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "जैसा कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बसते हैं, उन्हें सुरक्षित करना, उनकी भलाई सुनिश्चित करना, अगर वे किसी कठिन दौर में हैं, तो उन्हें घर लाना हमारी जिम्मेदारी है।"
4- रूस पर क्या बोले विदेश मंत्री
वही, भारत और रूस संबंधों पर बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि रूस के साथ हमेशा भारत के सकारात्मक संबंध रहे हैं और ये रिश्ता विश्वास पर बना है। कार्यक्रम में बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "तो फिर मुझे बताएं, कि क्या रूस ने हमारी मदद की है या हमें नुकसान पहुंचाया है? क्या रूस ने महत्वपूर्ण क्षणों में योगदान दिया है या बाधा उत्पन्न की है? क्या रूस से हमें कोई लाभ होगा या यह केवल नुकसान ही होगा?"












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