एक तरफ खालिस्तानी, तो दूसरी तरफ हिन्दुस्तानी... कनाडा में भारत विरोधी रैली की भारतीयों ने निकाली हवा
Khalistani Vs Indians in Canada: कनाडा के टोरंटो में शनिवार को भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर भारत विरोधी रैली में हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने दो खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। हालांक, खालिस्तानियों ने जोर-शोर से भारत के खिलाफ रैली निकालने का आह्वान किया था, लेकिन टोरंटो की रैली में करीब ढाई सौ खालिस्तान समर्थक जुटे थे।
लेकिन, खालिस्तानियों के इस रैली के खिलाफ हिन्दुस्तानी भी उतर आए और कनाडा में रास्ते के एक तरफ खालिस्तानी जुटे थे, तो दूसरी तरह उन्हें करारा जवाब देने के लिए भारतीय लोग भी जुट गये थे। टोरंटो में भारतीयों ने खालिस्तानियों को जोरदार जवाब दिया है और इसके साथ ही, खालिस्तानियों का एक और फ्लॉप शो खत्म हो गया है।

खालिस्तानियों का फ्लॉप शो
अलगाववादी समूह 'सिख फॉर जस्टिस' यानि एसएफजे द्वारा समर्थित इस विरोध को कुख्यात 'किल इंडिया' पोस्टरों के जरिए सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया था, जिसमें कनाडा में भारत के सबसे वरिष्ठ दूतों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।
लेकिन, महज ढाई सौ खालिस्तानियों के जुटने की वजह से खालिस्तान अलगाववादियों का मुंह उतरा नजर आया। लोग कह रहे हैं, कि खालिस्तानियों को देश नहीं, एक गांव मांगनी चाहिए।
इस बार खालिस्तान समर्थक समूह को भारत समर्थक प्रदर्शनकारियों ने जमकर चुनौती दी है, और खालिस्तानियों को उन्हीं की भाषा में करारा जवाब दिया गया है। टोरंटो में पुलिसकर्मियों ने एक खालिस्तानियों और हिन्दुस्तानियों के बीच एक सीमा रेखा बना दी थी। रोड के एक तरफ खालिस्तानी थे, तो दूसरी तरफ हिन्दुस्तानी और कनाडा की सरकार, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का तमाशा देख रही थी।
प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए थे और ब्लर स्ट्रीट का वह हिस्सा, जहां इमारत स्थित है, यातायात के लिए अवरुद्ध कर दिया गया था।
सैकड़ों की संख्या में हिन्दुस्तानियों के जुटने के बाद खालिस्तानियों का आंदोलन फ्लॉप साबित होने लगा, जिससे बौखलाए खालिस्तान समर्थकों ने मोर्चाबंदी तोड़ते हुए भारत समर्थकों पर हमला करने की कोशिश की, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसका वीडियो भी ऑनलाइन वायरल हो रहा है।
पुलिस ने दो खालिस्तानियों को पुलिस पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया, हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बाद में उन्हें बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।
क्यों बौखलाए हुए हैं खालिस्तानी?
खालिस्तानी समर्थकों ने मारे गये एसएफजे नेता हरदीप सिंह निज्जर के पोस्टर अपने हाथों में रखे हुए थे, जिसकी 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे क्षेत्र में हत्या कर दी गई थी।
पोस्टरों में हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया गया था। अन्य पोस्टरों ने 16 जुलाई को ग्रेटर टोरंटो एरिया या जीटीए में तथाकथित पंजाब जनमत संग्रह के अगले चरण का प्रचार किया गया था। खालिस्तानियों के पोस्टर्स में भारत विरोधी छवियां थीं और एक-47 हथियार के जरिए भी भारत को धमकी दी गई थी।
हमले की कोशिश के बाद भी भारत समर्थक समूह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए। खालिस्तानियों के खिलाफ खड़े होने वाले अरविंद मिश्रा ने हिन्दुस्ताइन टाइम्स को बताया, कि "हम खालिस्तानियों के प्रति प्रतिरोध प्रदर्शित करने में सफलतापूर्वक सक्षम थे।" उन्होंने कहा, कि खालिस्तानी लगातार फ्रीडम ऑफ स्पीच का उल्लंघन कर रहे हैं।
खालिस्तानियों का हिंसक आंदोलन
भारत समर्थक नील सहगल ने कहा, कि "खालिस्तानियों का हिंसक पक्ष तब उजागर हुआ, जब उनमें से एक ने हमारी शांतिपूर्ण सभा पर हमला करने की कोशिश करने के लिए पुलिस बैरिकेड तोड़ दिया।"
उन्होंने कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी सरकार से "ऐसी हिंसक रैलियों और जनमत संग्रह पर तुरंत प्रतिबंध लगाने के लिए तेजी से और दृढ़ता से कार्य करने" का आह्वान किया।
खालिस्तानियों ने दावा किया था, कि 8 जुलाई को भारत के खिलाफ विशालकाय कैम्पेन किया जाएगा और वास्तव में उन्होंने ऐसा ही किया।
ग्राउंट रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानियों के विशाल आंदोलन में ओटावा में भारतीय उच्चायोग के सामने 30 प्रदर्शनकारी, वैंकूवर में विरोध प्रदर्शन में लगभग 50 प्रदर्शनकारी शामिल हुए थे। यानि, पूरे कनाडा में खालिस्तानियों के विशाल प्रदर्शन में करीब 500 खालिस्तानी जुटे थे। जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर सही मांग की जा रही है, कि उन्हें कनाडा में ही एक गांव दे दिया जाए।












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