इराक में फंसे इंडियन वर्कर्स के पासपोर्ट पर विवाद

iraq
नयी दिल्ली। इराक में शिया-सुन्नी के बीच जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। आतंकी एक-एक कर इराक के अलग-अलग शहरों पर कब्जा कर रहे हैं तो वहीं इराक में फंसे भारतीय की आंच में भारत के लोग भी झुलस रहे हैं। अभी चरमपंथी संगठन आईएसआईएस के चंगुल में फंसे 40 भारतीयों की सुरक्षा का मसला हल नहीं हुआ कि इराक में सैकड़ों इंडियन वर्कर्स के पासपोर्ट उनके मालिकों ने देने से इनकार कर दिया है। कंपनी मालिकों द्वारा पासपोर्ट नहीं लौटाए जाने के कारण इंडियन वर्कर्स वहां फंसे हुए हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा दी जा रही जानकारी के मुताबिक इराक के नजफ प्रांत में सैकड़ों इंडियन वर्कर्स के पासपोर्ट उनके मालिक नहीं दे रहे हैं। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि इराक में लड़ाई तेज हो रही है और इसमें इराक की जनता के साथ इंडियन वर्कर्स को भी खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

ये अहम देने वाली एमनेस्टी का दावा है कि इराक में फंसे इंडियन वर्कर्स से खुद फोन पर उनसे बात कर ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पांच महीने से कंपनी ने वेतन नहीं दिया है। पीड़ितों का कहना है कि कंपनी ने उनका पासपोर्ट भी रख लिया है। एमनेस्टी से बात करते हुए इन वर्कर्स ने बताया कि वे हिंसा भड़कने के डर से कंपनी परिसर में ही सिमटे हुए हैं। वर्कर्स ने इस संबंध में बगदाद स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क साधा है। दूतावास ने एक मोबाइल मेसेज के जरिए पासपोर्ट का ब्योरा भेजने की मांग की है।

कुछ इंडियन वर्कर्स ने एमनेस्टी को बताया कि वह सुरक्षित हैं। उनके एजेंटों ने कहा है कि आईएसआईएस का खतरा सामने आने पर उन्हें सुरक्षित जगह पर भेज

दिया जाएगा।

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